ईडी का दावा-170 ट्रांजेक्शन मिले,मैरिज पैलेस में बांटे प्रश्नपत्र,भूपेश के ओएसडी थे…
रायपुर,14 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग पेपर लीक मामले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल के तत्कालीन ओएसडी चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया गया था। ईडी ने चेतन बोरघारिया से पूछताछ की है। ईडी के अनुसार चेतन के बैंक खाते में 170 ट्रांजेक्शन के जरिए 66.64 लाख कैश जमा हुए। चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कई वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं। ईडी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग परीक्षा 2021 में कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। प्रिलिम्स एग्जाम से पहले रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र बांटा गया। इसके बाद बरनवापारा अभयारण्य के एक रिसॉर्ट में ठहराकर मुख्य परीक्षा के लीक प्रश्नपत्र के आधार पर कथित तौर पर कोचिंग दी गई।
3 करोड़ से ज्यादा की अवैध रकम लेने का आरोप : ईडी की जांच के मुताबिक, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग राज्य सेवा परीक्षा 2021 के अलग-अलग अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपए से ज्यादा की कथित अवैध रकम जुटाई। आरोप है कि अभ्यर्थियों को पहले ही प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और उनका चयन कराने का भरोसा दिया गया था। इसके लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में अपने कथित संपर्क और प्रभाव का इस्तेमाल करने की बात कही गई। जांच में यह भी सामने आया कि ऐसे आश्वासनों के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में ओएसडी रहे चेतन बोरघरिया के नाम और उनके आधिकारिक पद का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया।
मोबाइल की फोरेंसिक जांच में बातचीत सामने आई : ईडी के मुताबिक,जब्त डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक जांच में चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच हुई बातचीत सामने आई। इनमें वित्तीय लेन-देन और रकम वापस करने या भुगतान की मांग से संबंधित बातचीत भी शामिल थी। जांच में M/s Figurecave E-Com (OPC) Private Limited से जुड़े कई वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं। ईडी को संदेह है कि इस कंपनी का इस्तेमाल रकम को अलग-अलग स्तर पर घुमाने और फंड की लेयरिंग के लिए किया गया।
पीएमएलए की धारा 19 में गिरफ्तारी : ईडी ने कहा कि जांच के दौरान जुटाए गए डिजिटल साक्ष्य,बैंकिंग लेन-देन और पीएमएलए के तहत दर्ज बयानों से चेतन बोरघरिया की अपराध से अर्जित रकम से जुड़े कामों में कथित संलिप्तता सामने आई है। इनमें रकम हासिल करना, अपने कब्जे में रखना, छिपाना और उसका इस्तेमाल करना शामिल है। इसके आधार पर चेतन बोरघरिया को पीएमएलए की धारा 19 के तहत 11 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। ईडी के अनुसार, चेतन बोरघरिया वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज में अतिरिक्त कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। यह मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया।
इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का खेल हुआ। प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए हैं।
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