नगर निगम की बैठक में अक्टूबर मध्य से डामरीकरण का लक्ष्य,शहर की बदहाल सड़कों पर लोगों में नाराजगी
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,12 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। शहर की सड़कों पर गड्ढे,जगह-जगह उखड़ी सतह और बारिश के बाद बढ़ी परेशानी के बीच नगर पालिक निगम ने अब सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को गति देने की कवायद शुरू की है। आयुक्त विनय अग्रवाल की अध्यक्षता में तकनीकी टीम और सड़क निर्माण एजेंसियों की बैठक में बारिश रुकते ही गड्ढा भराई, समतलीकरण और नाली-पुलिया निर्माण शुरू कराने तथा अक्टूबर मध्य से डामरीकरण का लक्ष्य तय किया गया है। सवाल यह है कि जिन सड़कों की बदहाली लंबे समय से नजर आ रही थी, उनकी मरम्मत के लिए बारिश खत्म होने का इंतजार क्यों किया गया?
निगम के मुताबिक शहर में करीब 42 छोटे-बड़े सड़क निर्माण कार्य होने हैं। इनमें 36 कार्य अधोसंरचना मद और 6 मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत शामिल हैं। बैठक में अभियंताओं को ठेकेदारों से समन्वय कर स्वीकृत कार्य तत्काल शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन शहरवासियों के लिए यह घोषणा नई नहीं है। सड़क निर्माण को लेकर हर साल बारिश के पहले और बाद में योजनाएं,बैठकें और समय-सीमाएं सामने आती हैं। इसके बावजूद कई इलाकों में सड़क की हालत सवाल खड़े करती रही है। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भरने से वाहन चालकों और पैदल चलने वालों की परेशानी बढ़ती है, वहीं अस्थायी गड्ढा भराई के बाद सड़क दोबारा उखड़ने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
गड्ढा भरने से आगे बढ़कर स्थायी समाधान जरूरी : शहर की सड़कों के लिए सिर्फ गड्ढा भराई को समाधान मानना पर्याप्त नहीं होगा। जहां सड़क बार-बार खराब हो रही है, वहां उसके मूल कारण—खराब ड्रेनेज, जलभराव, कमजोर बेस अथवा घटिया निर्माण—की पहचान जरूरी है। नाली और पुलिया का काम सड़क के साथ समन्वित रूप से नहीं हुआ तो नई सड़क भी अगली बारिश में सवालों के घेरे में आ सकती है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि निगम की यह बैठक सिर्फ कागजी समय-सीमा तक सीमित रहती है या वास्तव में शहर की सड़कों पर बदलाव दिखाई देता है। अक्टूबर में डामरीकरण शुरू होने के बाद गुणवत्ता और काम की गति ही तय करेगी कि इस बार निगम की घोषणा गड्ढों से राहत में बदलती है या फिर अगले साल एक और बैठक की जरूरत पड़ती है।
अक्टूबर का इंतजार या गुणवत्ता की परीक्षा?
निगम ने अक्टूबर के मध्य से डामरीकरण शुरू करने का लक्ष्य रखा है। अब असली परीक्षा सिर्फ सड़क बनाने की नहीं, बल्कि सड़क कितने समय तक टिकती है,इसकी होगी। सड़क निर्माण में गुणवत्ता, निर्धारित मोटाई, सामग्री की गुणवत्ता,बेस तैयार करने और जल निकासी जैसे पहलुओं की निगरानी नहीं हुई तो करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी समस्या स्थायी रूप से खत्म नहीं होगी। आयुक्त ने निर्माण एजेंसियों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य करने और निर्माण के दौरान यातायात व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि निगम इन निर्देशों की मैदानी स्तर पर कितनी सख्ती से निगरानी करता है और खराब गुणवत्ता मिलने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur