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कोरिया/एमसीबी@ तरईया पुल टूटा,रास्ता बंद…अब 17 की जगह 24 किमी का सफर

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  • तरईया पुल क्षतिग्रस्त,कोटाडोल-कमर्जी आवागमन पर ब्रेक
  • कोटाडोल-कमर्जी मार्ग पर आवागमन प्रतिबंधित…7 सितंबर तक डायवर्जन…उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई…
  • प्रशासन ने जारी किया डायवर्जन रूट, 7 सितंबर तक प्रतिबंध, उल्लंघन पर कहर और मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई…
  • कोटाडोल से महज 300 मीटर दूर है पुल,डायवर्जन से 17 की जगह 24 किलोमीटर करना होगा सफर,कई पंचायतों और सीमावर्ती गांवों पर असर

राजन पाण्डेय
कोरिया/एमसीबी,31 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
मानसून की लगातार बारिश के बीच कोरिया और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर क्षेत्र में सड़क और पुल-पुलियों की स्थिति अब चिंता का विषय बनने लगी है,कोटाडोल-कमर्जी मुख्य मार्ग पर तरईया नदी का पुल 30 अगस्त 2026 को क्षतिग्रस्त हो गया,पुल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर इस मार्ग पर सभी प्रकार के आवागमन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है,उप-विभागीय मजिस्ट्रेट, भरतपुर द्वारा जारी आदेश के बाद अब पैदल यात्रियों से लेकर दोपहिया और अन्य वाहनों के लिए भी पुल का इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा। पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग भी निर्धारित किया है,हालांकि डायवर्जन के कारण कोटाडोल और कमर्जी के बीच पहले की करीब 17 किलोमीटर दूरी बढ़कर लगभग 24 किलोमीटर हो जाएगी,यानी लोगों को करीब सात किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ेगा,क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और लगातार बारिश को देखते हुए यह अतिरिक्त दूरी ग्रामीणों और नियमित यात्रियों के लिए परेशानी बढ़ाने वाली साबित हो सकती है।
कोटाडोल से महज 300 मीटर दूर है पुल-तरईया नदी पर स्थित यह पुल कोटाडोल से लगभग 300 मीटर की दूरी पर है,जबकि खिरकी बैरियर करीब दो किलोमीटर दूर बताया गया है। यह क्षेत्र ग्राम पंचायत कोटाडोल के अंतर्गत आता है और कोटाडोल-कमर्जी मार्ग स्थानीय आवागमन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है,पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों,दोपहिया वाहन चालकों और अन्य यात्रियों के सामने तत्काल वैकल्पिक रास्ते की समस्या खड़ी हो गई,बारिश के मौसम में नदी और पुल पर बढ़ते जलस्तर तथा क्षतिग्रस्त संरचना को देखते हुए प्रशासन ने किसी भी तरह का जोखिम लेने के बजाय मार्ग बंद करने का निर्णय लिया है,प्रशासन का मानना है कि क्षतिग्रस्त पुल से आवागमन जारी रहने पर पुल के और अधिक क्षतिग्रस्त होने के साथ दुर्घटना की आशंका बनी रह सकती है, इसी वजह से आगामी आदेश तक पुल से आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है।
कमर्जी की ओर से आने वालों को भी बदलना होगा रास्ता-इसी तरह कमर्जी की ओर से आने वाले यात्रियों को भी तरईया पुल की तरफ जाने की अनुमति नहीं होगी,उन्हें खिरकी वन विभाग बैरियर से निर्धारित वैकल्पिक मार्ग अपनाना होगा,इस मार्ग में रजरावल, नेरुवा और बरौता होते हुए आगे बढ़ने की व्यवस्था की गई है,प्रशासन द्वारा निर्धारित इस वैकल्पिक व्यवस्था में फिलहाल पैदल यात्रियों,दोपहिया वाहनों और आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं को आवागमन की अनुमति दी गई है,वहीं भारी तथा अन्य वाहनों के लिए इस मार्ग को अनुमति नहीं दी गई है,इसका सीधा अर्थ यह है कि बड़े वाहनों को फिलहाल दूसरे विकल्प तलाशने होंगे,इससे माल परिवहन और नियमित व्यावसायिक आवाजाही पर भी असर पड़ने की संभावना है।
17 किलोमीटर से बढ़कर 24 किलोमीटर हुआ सफर-तरईया पुल बंद होने का सबसे प्रत्यक्ष असर कोटाडोल-कमर्जी के बीच यात्रा की दूरी पर पड़ेगा,पहले दोनों स्थानों के बीच दूरी करीब 17 किलोमीटर थी,अब डायवर्जन मार्ग के कारण यात्रियों को लगभग 24 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी,यानी लोगों के सफर में लगभग सात किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी जुड़ गई है,ग्रामीण क्षेत्र में जहां रोजमर्रा के काम,बाजार,स्वास्थ्य सुविधा,शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए लोगों को नियमित आवागमन करना पड़ता है,वहां सात किलोमीटर अतिरिक्त दूरी भी महत्वपूर्ण होती है,बारिश के मौसम में यदि डायवर्जन का हिस्सा कच्चा है तो समय और परेशानी दोनों बढ़ सकते हैं,फिर भी प्रशासन के सामने फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरक्षा है,क्षतिग्रस्त पुल पर आवागमन की अनुमति देकर किसी दुर्घटना का जोखिम उठाने के बजाय वैकल्पिक रास्ता अपनाना ही सुरक्षित विकल्प माना गया है।
प्रतिबंध तोड़ा तो होगी कानूनी कार्रवाई-प्रशासन ने केवल पुल बंद करने का आदेश जारी नहीं किया है,बल्कि इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है,जारी आम सूचना के अनुसार प्रतिबंध के बावजूद यदि कोई व्यक्ति क्षतिग्रस्त पुल से आवागमन करता है तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता,2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जा सकती है,इसके अलावा वाहन चालकों द्वारा प्रतिबंध का उल्लंघन किए जाने की स्थिति में मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 179(1),184 और 194(1) के तहत अर्थदंड एवं अन्य वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है,प्रशासन का संदेश स्पष्ट है कि पुल बंद करने का फैसला महज औपचारिकता नहीं है,प्रतिबंधित मार्ग से गुजरने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
7 सितंबर तक प्रभावी रहेगा आदेश- उप-विभागीय मजिस्ट्रेट,भरतपुर द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता,2023 की धारा 163 के तहत 30 अगस्त 2026 को आदेश जारी किया गया है,आदेश के अनुसार पुल पर लगाया गया प्रतिबंध 7 सितंबर 2026 तक या प्रशासन द्वारा इससे पहले आदेश को निरस्त अथवा संशोधित किए जाने तक प्रभावी रहेगा,इसका मतलब यह है कि 7 सितंबर तक लोगों को निर्धारित वैकल्पिक मार्ग का ही इस्तेमाल करना होगा,जब तक कि प्रशासन पुल की स्थिति का आकलन करने के बाद कोई नया आदेश जारी नहीं करता।
कई पंचायतों और सीमावर्ती क्षेत्र पर असर-कोटाडोल-कमर्जी मार्ग केवल दो गांवों के बीच का रास्ता नहीं है,इस मार्ग से जुड़े आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और पंचायतों के लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही भी प्रभावित होगी,मध्यप्रदेश सीमा से लगे क्षेत्र होने के कारण इस मार्ग का महत्व और बढ़ जाता है,सीधी,बैढ़न अथवा आसपास के क्षेत्रों की ओर जाने वाले लोगों को भी मार्ग बंद होने से अतिरिक्त दूरी और समय का सामना करना पड़ सकता है, बारिश के मौसम में यदि वैकल्पिक रास्ते की स्थिति खराब होती है तो ग्रामीणों के लिए परेशानी और बढ़ सकती है,खासकर आपातकालीन सेवाओं को लेकर प्रशासन की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी,एंबुलेंस को वैकल्पिक मार्ग से अनुमति दी गई है,लेकिन लगातार बारिश की स्थिति में मार्ग की वास्तविक स्थिति पर भी नजर रखना जरूरी होगा।
पैदल से लेकर दोपहिया और वाहनों तक रोक…
जारी आदेश के तहत क्षतिग्रस्त पुल से पैदल यात्रियों,मोटरसाइकिल,स्कूटर सहित दोपहिया वाहनों तथा हल्के और भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाई गई है,प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित पुल को पार करने की कोशिश करने के बजाय निर्धारित वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल किया जाए,विशेष रूप से बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त पुल को पार करना जान जोखिम में डालने जैसा हो सकता है,यहां प्रशासन की चुनौती केवल पुल बंद कराने तक सीमित नहीं है,ग्रामीणों को डायवर्जन मार्ग की जानकारी देना और यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि लोग सुविधा या दूरी कम करने के प्रयास में प्रतिबंधित पुल का इस्तेमाल न करें।
जनकपुर की ओर से आने वालों के लिए यह होगा डायवर्जन
पुल बंद होने के बाद जनकपुर की ओर से आने वाले पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया गया है,उन्हें ग्राम बरौता से ग्राम नेरुवा,ग्राम रजरावल होते हुए खिरकी वन विभाग बैरियर तक पहुंचना होगा,इसके बाद निर्धारित मार्ग से आगे आवागमन किया जा सकेगा,प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वैकल्पिक मार्ग का कुछ हिस्सा कच्चा है,लगातार बारिश की स्थिति में ऐसे रास्तों पर फिसलन और कीचड़ की समस्या हो सकती है,इसलिए यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी,डायवर्जन मार्ग का उद्देश्य लोगों को क्षतिग्रस्त पुल के स्थान पर तत्काल सुरक्षित आवागमन की सुविधा देना है,इसलिए प्रशासन ने लोगों से निर्धारित मार्ग का ही उपयोग करने की अपील की है।
अब असली चुनौती पुल की मरम्मत
फिलहाल प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से रास्ता बंद कर दिया है,लेकिन इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत कब शुरू होगी और सामान्य आवागमन कब बहाल होगा? यदि पुल की मरम्मत में लंबा समय लगता है तो डायवर्जन का असर भी लंबे समय तक बना रह सकता है। इसलिए संबंधित विभाग को पुल का तकनीकी परीक्षण कराने,क्षति का आकलन करने और आवश्यक मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत होगी,बारिश के मौसम में पुल-पुलियों की स्थिति लगातार बदल सकती है,ऐसे में केवल एक बार निरीक्षण के बजाय नियमित निगरानी भी जरूरी होगी।
सुरक्षा पहले,लेकिन मरम्मत की रफ्तार भी जरूरी
तरईया नदी का पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रशासन द्वारा आवागमन रोकने का निर्णय फिलहाल लोगों की सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है,लेकिन ग्रामीणों के लिए यह राहत तभी पूरी होगी, जब पुल की मरम्मत अथवा वैकल्पिक स्थायी व्यवस्था भी जल्द तैयार हो, फिलहाल कोटाडोल-कमर्जी मार्ग बंद है,सफर सात किलोमीटर लंबा हो गया है और प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी के साथ डायवर्जन लागू कर दिया है,अब निगाह इस बात पर रहेगी कि 7 सितंबर तक पुल की स्थिति में कितना सुधार होता है,संबंधित विभाग मरम्मत के लिए क्या कदम उठाता है और कब तक कोटाडोल-कमर्जी मार्ग पर सामान्य आवागमन बहाल हो पाता है।


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