रायपुर,27 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर न्यायधानी बिलासपुर से आ रही है। कांकेर लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद भोजराज नाग की सांसदी को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने सांसद नाग को बड़ी राहत देते हुए कांग्रेस प्रत्याशी बीरेश ठाकुर की उस अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया है,जिसमें ईवीएम में छेड़छाड़ और काउंटिंग में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे। इस फैसले के बाद कांकेर से लेकर रायपुर तक सियासी हलचल तेज हो गई है।
ईवीएमऔर रैंडमाइजेशन
पर उठाए थे सवाल
मामला कांकेर संसदीय सीट के चुनावी नतीजों से जुड़ा है। कांग्रेस के तत्कालीन उम्मीदवार बीरेश ठाकुर ने हाईकोर्ट में पिटीशन दायर कर आरोप लगाया था कि 26 अप्रैल 2024 को हुए मतदान में इस्तेमाल हुई मशीनों बैलेट यूनिट,कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट में गड़बड़ी की गई थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार,याचिका में दावा किया गया था कि गुंडरदेही, सिहावा, संजरीबालोड, डोंडी लोहारा और केशकाल विधानसभा क्षेत्रों के फॉर्म 17ष्ट और रैंडमाइजेशन रिपोर्ट में मशीन नंबरों का मिलान नहीं हो रहा है।
सिर्फ शक से काम
नहीं चलेगा,सबूत लाएं
जस्टिस की बेंच ने मामले की गंभीरता से सुनवाई की, लेकिन बीरेश ठाकुर की दलीलों को फिलहाल अपर्याप्त माना। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि मशीनों की दोबारा जांच या वेरिफिकेशन का आदेश तब तक नहीं दिया जा सकता,जब तक कि गड़बड़ी के पुख्ता मौखिक या दस्तावेजी सबूत रिकॉर्ड पर न हों। हाईकोर्ट ने साफ किया कि चुनाव प्रक्रिया एक गंभीर संवैधानिक प्रक्रिया है और इसे केवल आशंकाओं के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती।
कांग्रेस प्रत्याशी के
पास अब भी है एक मौका
भले ही कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है, लेकिन बीरेश ठाकुर के लिए दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। कोर्ट ने उन्हें यह छूट दी है कि यदि वे वोटों की गिनती में गड़बड़ी से जुड़े ठोस दस्तावेजी या मौखिक सबूत जुटा लेते हैं, तो वे दोबारा नई एप्लीकेशन फाइल कर सकते हैं। यानी अब गेंद बीरेश ठाकुर के पाले में है कि वे आरोपों को साबित करने के लिए क्या नया रिकॉर्ड पेश करते हैं।
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