नई दिल्ली,25 मार्च 2026। भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश की ऊर्जा बुनियादी संरचना को मजबूत करने के लिए प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश, 2026 को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। यह महत्वपूर्ण आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जारी किया गया है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य देश के कोने-कोने तक गैस पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया में आने वाली प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना है। सरकार चाहती है कि स्वच्छ ऊर्जा का लाभ हर घर तक बिना किसी देरी के पहुंचे,जिससे आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार हो सके। इस नए नियम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पारदर्शी और त्वरित मंजूरी प्रक्रिया है। अक्सर देखा जाता है कि पाइपलाइन परियोजनाओं को अलग-अलग विभागों से अनुमति मिलने में महीनों लग जाते हैं, जिससे काम रुक जाता है। अब सरकार ने ‘डीम्ड अप्रूवल’ (स्वचालित मंजूरी) की व्यवस्था की है। यदि संबंधित विभाग तय समय सीमा के भीतर अनुमति प्रदान नहीं करता है, तो उसे स्वतः ही मंजूर मान लिया जाएगा। इसके अलावा, एक समान राष्ट्रव्यापी व्यवस्था लागू होने से कंपनियों को अलग-अलग राज्यों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, जिससे परियोजनाओं की लागत और समय दोनों की बचत होगी। पाइपलाइन बिछाने के दौरान स्थानीय निकायों या अधिकारियों द्वारा की जाने वाली अवैध वसूली और अतिरिक्त शुल्कों पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। नए आदेश के तहत ऐसी किसी भी वसूली को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
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