Breaking News

खड़गवां (एमसीबी),@पटवारियों के दफ्तर में ‘निजी ऑपरेटर’ का खेल? किसानों से अवैध वसूली के आरोप

Share


शुल्क नहीं देने पर महीनों चक्कर लगाने को मजबूर किसान,खड़गवां तहसील में उठे गंभीर सवाल…
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां (एमसीबी),15 मार्च 2026 (घटती-घटना)।
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के खड़गवां तहसील में हल्का पटवारियों की कार्यप्रणाली को लेकर किसानों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है,किसानों का आरोप है कि कई पटवारियों ने अपने कार्यालय में निजी कंप्यूटर ऑपरेटर बैठा रखे हैं,जो जमीन से जुड़े काम कराने के नाम पर किसानों से अवैध वसूली कर रहे हैं,ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यवस्था अब धीरे-धीरे एक अनौपचारिक लेकिन अनिवार्य प्रक्रिया बन गई है,जहां पटवारी से सीधे काम कराने के बजाय किसानों को पहले कंप्यूटर ऑपरेटर के पास भेज दिया जाता है।
ऑपरेटर के बिना नहीं होता काम?- किसानों का कहना है कि जब वे जमीन से जुड़े कार्य जैसे नक्शा निकलवाना,खसरा या बी-1 की प्रति लेना,नामांतरण से जुड़ी जानकारी, सीमांकन या अन्य राजस्व दस्तावेज के लिए पटवारी कार्यालय पहुंचते हैं,तो उन्हें सीधे निजी कंप्यूटर ऑपरेटर के पास भेज दिया जाता है,वहीं ऑपरेटर द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक राशि मांगे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
शुल्क नहीं दिया तो महीनों का इंतजार-कई किसानों का आरोप है कि यदि वे ऑपरेटर द्वारा मांगी गई अतिरिक्त राशि देने से इनकार कर देते हैं,तो उनका काम लंबे समय तक लंबित रखा जाता है, कुछ किसानों का कहना है कि उन्हें एक छोटे से दस्तावेज के लिए भी महीनों तक पटवारी कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं,इस वजह से किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ रही है।
वसूली का माध्यम बने ऑपरेटर?- स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई पटवारी कार्यालयों में निजी कंप्यूटर ऑपरेटरों को एक तरह से वसूली का माध्यम बना दिया गया है,ग्रामीणों का कहना है कि बिना पैसे दिए फाइलें आगे नहीं बढ़तीं और किसानों को बार-बार यह कहकर लौटा दिया जाता है कि ‘अभी सिस्टम में काम बाकी है’ या ‘कल आना। कुछ किसानों का यह भी कहना है कि यदि ऑपरेटर के माध्यम से काम कराया जाए तो वही काम जल्दी हो जाता है।
व्यवस्था पर उठे सवाल- इस पूरे मामले ने राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, ग्रामीणों का कहना है कि यदि पटवारी कार्यालयों में निजी ऑपरेटर बैठाए जा रहे हैं, तो यह व्यवस्था किस नियम के तहत चल रही है? लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यालय में बैठकर निजी व्यक्ति द्वारा किसानों से पैसे लेना राजस्व प्रणाली की साख पर भी सवाल खड़ा करता है।
जांच की मांग- मामले को लेकर किसानों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पटवारी कार्यालयों में निजी कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका की जांच कराई जाए,उनका कहना है कि यदि अवैध वसूली की शिकायतें सही पाई जाती हैं तो दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
अब प्रशासन के कदम का इंतजार- अब देखना होगा कि मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और किसानों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है, क्योंकि यह मामला केवल अवैध वसूली का नहीं,बल्कि किसानों के अधिकार और राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है।


Share

Check Also

रायपुर@सट्टेबाजी गिरोह के मास्टरमाइंड बाबू खेमानी के घर क्राइम ब्रांच का छापा,विदेशी नेटवर्क और दस्तावेजों की जांच जारी

Share रायपुर,24 अप्रैल 2026। ऑनलाइन सट्टा एप 3 Stumps से जुड़े बड़े नेटवर्क पर रायपुर …

Leave a Reply