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कोरिया/बैकुंठपुर@ठंड क्या होती है…यह बेजुबान…बेसहारा गौवंश से पूछिए

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कड़ाके की ठंड में गौसेवक अनुराग दुबे की पहल,नगर पालिका ने भी लिया संज्ञान
कोरिया/बैकुंठपुर,22 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)।
कड़ाके की ठंड जहां आम इंसान को कंपकंपी में डाल रही है, वहीं बेजुबान और बेसहारा गौवंश के लिए यह ठंड जीवन-मरण का सवाल बन जाती है, ऐसी ही परिस्थितियों को देखते हुए गौसेवक अनुराग दुबे ने एक बार फिर संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की मिसाल पेश की है।
बीते दस वर्षों से लगातार वे अपने घर की गौशाला और बाल मंदिर प्रांगण में जहां उनकी निगरानी में गोवंश रहते हैं, अलाव जलाने की व्यवस्था कर रहे हैं, ताकि ठंड से गौवंश की रक्षा हो सके, अनुराग दुबे ने अन्य गोपालकों से भी अपील की है कि वे जहां-जहां गोपालन करते हैं, वहां सेड/तिरपाल के नीचे अलाव की व्यवस्था अवश्य करें, ताकि इन बेजुबानों को सर्द हवाओं से राहत मिल सके, ठंड क्या होती है यह वही समझ सकता है जिसके पास न छत हो, न कपड़ा और न आवाज। ऐसे में अलाव की एक लौ इन बेजुबानों के लिए जीवन की लौ बन जाती है, समाज और प्रशासन दोनों की साझा संवेदनशीलता से ही इन बेसहारा प्राणियों को सर्दी की मार से बचाया जा सकता है।
ठंड से दो गौवंश की मौत,नगर पालिका हरकत में :
इधर, बैकुंठपुर के हाई स्कूल परिसर में बीते एक सप्ताह के भीतर ठंड से दो गौवंश की मौत के बाद नगर पालिका ने तत्काल संज्ञान लिया, संजय दुबे, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, ने तुरंत निर्देश देते हुए उस स्थान पर जहां रात में गोवंश को रखा जाता है, दो अलाव कुंड जलाने की व्यवस्था करवाई, कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि रात्रि के समय आग जलती रहे, ताकि गोवंश को ठंड से बचाव मिल सके।
संवेदनशीलता ही असली सेवा :
कड़ाके की ठंड में यह पहल बताती है कि गौसेवा केवल आस्था नहीं, जिम्मेदारी भी है, जहां एक ओर सामाजिक कार्यकर्ता अपने स्तर पर पहल कर रहे हैं, वहीं प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि बेजुबानों की पीड़ा पर अनदेखी नहीं होनी चाहिए।


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