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अंबिकापुर@हसदेव अरण्य और रामगढ़ की पहाड़ी को बचाने जुटे लोग,खनन के विरोध में उठा जनआक्रोश

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अंबिकापुर,25अगस्त 2025(घटती-घटना) हसदेव अरण्य के जंगलों और रामगढ़ की ऐतिहासिक पहाड़ी को बचाने के लिए 24 अगस्त को अंबिकापुर में एक जनसभा आयोजित की गई, जिसमें सरगुजा संभाग के नागरिकों, आदिवासी समुदायों,समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ-साथ झारखंड से भी पर्यावरण प्रेमी शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता पूर्व विधायक भानु प्रताप सिंह ने की। उन्होंने कहा कि कोयला खनन के नाम पर संविधान और वन अधिकार कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। फर्जी ग्राम सभाएं दिखाकर पेड़ों की कटाई की जा रही है और आदिवासियों की भूमि, जल, जंगल, जमीन को जबरिया छीना जा रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ता आलोक शुक्ला ने बताया कि हसदेव अरण्य के विनाश की शुरुआत 2013 में परसा ईस्ट केते बासन कोयला खदान के रूप में हुई,जिसमें पांच लाख से अधिक पेड़ों की कटाई हुई। इसके बाद 2024 में परसा खदान को चालू किया गया, जहां एक लाख से अधिक पेड़ काटे जा रहे हैं। हाल ही में केते एक्सटेंशन खदान को भी मंजूरी दे दी गई है, जिसमें छह लाख से अधिक पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। कुल मिलाकर सरगुजा और सूरजपुर जिले की लगभग 1.15 लाख एकड़ जमीन राजस्थान सरकार के नाम पर अदानी समूह को सौंप दी गई है। छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग ने 2024 में जांच के बाद बताया कि वन अधिकार और ग्राम सभा की प्रक्रिया फर्जी व अपूर्ण है और वन स्वीकृति को निरस्त करने की अनुशंसा की,लेकिन बावजूद इसके खनन जारी है। समाजसेवी गिरीश ने चेताया कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से क्षेत्र में तापमान में 2 से 4 डिग्री तक वृद्धि होगी। इससे लू, जल संकट, खेती और पशुपालन पर गंभीर असर पड़ेगा। साथ ही वनों पर आधारित अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो जाएगी। त्रिभुवन सिंह ने कहा कि खनन के कारण रामगढ़ की पहाड़ी की पुरातात्विक विरासत, जैसे प्राचीन नाट्यशाला, ब्राम्ही लिपि में लिखे शिलालेख, सीता बेंगरा गुफा जैसी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरें नष्ट हो जाएंगी। अनंत सिंह, सीपी शुक्ला और आनंद प्रकाश शुक्ला ने कहा कि आने वाली पीढिय़ों के भविष्य को बचाने के लिए यह संघर्ष जरूरी है। उन्होंने लोगों से अडानी के खिलाफ एकजुट होकर आंदोलन चलाने की अपील की।


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