अंबिकापुर, 20 अक्टूबर 2024 (घटती-घटना)।संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में 3 अक्टूबर से छाीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 52 लागू की गई थी। इससे जुड़ी एक अधिसूचना का प्रकाशन राजपत्र में कर कुलपति की शक्तियां छीन ली गई थी। अब ये सारे अधिकार राज्यपाल के पास चले गए थे। राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना में धारा 52 लागू करने के तीन कारण बताए गए थे जो विवि में कुछ सालों से चले आ रहे विवादों से जुड़े थे। इसी क्रम में राज्य शासन के आदेश पर डॉ. प्रेम प्रकाश सिंह प्राध्यापक (प्राणीशास्त्र) विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त किए गए हैं। वहीं पूर्व कुलपति डॉ. अशोक ङ्क्षसह को प्रभाव से हटा दिया गया है। डॉ. प्रेम प्रकाश सिंह महली भगत शासकीय स्नातक महाविद्यालय कुसमी में प्राध्यापक के पद पर पदस्थ थे। इन्होंने रविवार को पदभार ग्रहण किया है।
गौरतलब है कि संत गहिरा गुरु विश्विद्यालय अपनी स्थापना के बाद से ही विवादित कार्यशैली की वजह से सुर्खियों में रहा है। विशेषकर यहां प्रशासनिक पदों को लेकर टकराव की स्थिति व अव्यवस्था स्थापना काल से ही चली आ रही है। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है। ये विवाद इस कदर बढ़ा कि अब राज्य सरकार द्वारा 3 अक्टूबर को राजपत्र में अधिसूचना का प्रकाशन कर छाीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 52 लागू कर दी गई थी। इससे 3 अक्टूबर से कुलपति अशोक सिंह की शक्तियां क्षीण हो गईं थी। इनके सारे अधिकार राज्यपाल के पास चले गए थे। इसी क्रम में 20 अक्टूबर को पत्र जारी कर राज्यपाल रमेन डेका ने कुलाधिपति संत गहिरा गुर विश्वविद्यालय को छाीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की यथा उपांतरित धारा 13 एवं 14 सहपाठित धारा 52 (2) के अधीन प्रदा शक्तियों को प्रयाग करते हुए एवं राज्य शासन के परामर्श से डॉ. प्रेम प्रकाश सिंह प्राध्यापक (प्राणीशास्त्र) स्व. महली भगत शासकीय स्नातक महाविद्यालय कुसमी जिला बलरामपुर को अगामी आदेश तक कुलपति नियुक्त किया गया है। जिन्होंने पदभार ग्रहण कर लिया है।
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