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बैकुण्ठपुर/पटना@ हादसे में मौतों के बाद पटना सीएचसी की व्यवस्था पर सवाल,बीएमओ पर गंभीर आरोप

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सर्व आदिवासी समाज और कांग्रेस ने प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम को सौंपा शिकायत पत्र, बीएमओ को हटाने की मांग; राजनीतिक स्तर पर बचाव की चर्चाओं ने मामले को और गरमाया
बैकुण्ठपुर/पटना 04 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
2 अक्टूबर की रात कोरिया जिले के पटना थाना क्षेत्र में हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना के बाद अब हादसे में घायलों के उपचार और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पटना की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं, दुर्घटना के बाद घायलों को उपचार के लिए पटना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, लेकिन अस्पताल में चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों में नाराजगी की स्थिति बनी, इसी मामले को लेकर सर्व आदिवासी समाज और कांग्रेस से जुड़े लोगों ने संयुक्त रूप से कोरिया जिले के प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम को शिकायत पत्र सौंपकर पटना सीएचसी के बीएमओ के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें हटाने की मांग की है।
सर्व आदिवासी समाज की ओर से दिए गए शिकायत पत्र में दुर्घटना के समय बीएमओ की कथित अनुपस्थिति और अस्पताल पहुंचने में हुई देरी को गंभीर विषय बताते हुए जांच की मांग की गई है, पत्र में कहा गया है कि घटना की सूचना बीएमओ को बार-बार दिए जाने के बावजूद वे तत्काल अस्पताल नहीं पहुंचे और बाद में अस्पताल पहुंचे। शिकायतकर्ताओं ने आपातकालीन स्थिति में जिम्मेदार अधिकारी की मौजूदगी और समय पर चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने को आवश्यक बताया है।
कर्जी गांव के पास हुआ था हादसा- 2 अक्टूबर को पटना थाना क्षेत्र के सांवाराव गांव के आसपास एक ऑटो और पिकअप वाहन के बीच जोरदार टक्कर की घटना सामने आई। बताया गया कि ऑटो में कई लोग सवार थे, पिकअप की टक्कर के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए, दुर्घटना के बाद घायलों को बचाने और तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के लिए उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पटना ले जाया गया, हादसे की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता घायलों को तत्काल उपचार दिलाने की थी, लेकिन इसी दौरान अस्पताल में चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे।
अस्पताल में डॉक्टर की मौजूदगी को लेकर सवाल– शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जब दुर्घटना के घायल पटना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, उस समय अपेक्षित चिकित्सकीय व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी, उनका कहना है कि डॉक्टर की मौजूदगी और उपचार में देरी के कारण स्थिति गंभीर हुई तथा कुछ घायलों की मौत अस्पताल परिसर में ही हो गई, हालांकि यह एक शिकायत में लगाया गया आरोप है और इसकी स्वतंत्र जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि मौतों का कारण क्या था तथा उपचार में किसी प्रकार की देरी या चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं, सर्व आदिवासी समाज के पत्र में भी दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद बीएमओ के अस्पताल पहुंचने में देरी को लेकर सवाल उठाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए बीएमओ को तत्काल अस्पताल पहुंचकर घायलों के उपचार और आवश्यक चिकित्सकीय व्यवस्था की निगरानी करने का आग्रह किया गया था।
बीएमओ को हटाने की मांग– घटना के बाद सर्व आदिवासी समाज और कांग्रेस से जुड़े लोगों ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए कोरिया जिले के प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम को शिकायत पत्र सौंपा, शिकायत में पटना सीएचसी के बीएमओ की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है, शिकायत में यह भी मांग रखी गई है कि आपातकालीन परिस्थितियों में पटना सीएचसी में ऐसा जिम्मेदार चिकित्सकीय अधिकारी मौजूद रहे, जो दुर्घटना जैसी गंभीर स्थिति में तत्काल उपचार व्यवस्था शुरू करा सके।
सवाल सिर्फ बीएमओ की मौजूदगी का नहीं, आपात व्यवस्था का भी- इस पूरे मामले ने पटना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, सड़क दुर्घटनाएं किसी भी समय हो सकती हैं और ग्रामीण क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऐसे मामलों में प्राथमिक उपचार का महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं, ऐसे में सवाल यह है कि यदि एक साथ बड़ी संख्या में घायल अस्पताल पहुंचते हैं तो वहां तत्काल उपचार के लिए डॉक्टर, दवाइयां, आवश्यक उपकरण और जिम्मेदार अधिकारी की उपलब्धता किस स्तर पर सुनिश्चित की जाती है? शिकायतकर्ताओं ने इसी व्यवस्था की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। पत्र में पूर्व में भी बीएमओ के कार्यकलाप को लेकर शिकायतें सामने आने का उल्लेख करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
राजनीतिक बचाव की चर्चाओं ने बढ़ाई हलचल- मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है, सूत्रों के अनुसार भाजपा से जुड़े कुछ लोगों द्वारा बीएमओ के बचाव का प्रयास किए जाने की बात सामने आ रही है, हालांकि इस संबंध में कोई स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं है। ऐसे में यह भी जांच का विषय होगा कि शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर क्या कार्रवाई होती है और बीएमओ की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच किस निष्कर्ष तक पहुंचती है, दूसरी ओर शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि मामला किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध का नहीं बल्कि दुर्घटना के बाद घायलों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने और स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही तय करने का है।
जांच से ही सामने आएगा सच- सर्व आदिवासी समाज और कांग्रेस की ओर से की गई शिकायत के बाद अब पूरे मामले में जांच की मांग जोर पकड़ रही है, शिकायत में दुर्घटना के दौरान बीएमओ की अनुपस्थिति, अस्पताल पहुंचने में कथित देरी, घायलों के उपचार की व्यवस्था तथा जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका की जांच की मांग की गई है, अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत को किस स्तर पर जांच के लिए लेता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, यदि चिकित्सकीय लापरवाही या कर्तव्य में चूक प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी तय होना स्वाभाविक है, वहीं यदि आरोप तथ्यहीन पाए जाते हैं तो वास्तविक स्थिति भी सार्वजनिक होना जरूरी होगा, फिलहाल 2 अक्टूबर की दुर्घटना ने एक तरफ कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है, तो दूसरी तरफ पटना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की आपातकालीन व्यवस्था और जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन सवालों का जवाब अब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकेगा।


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