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सरगुजा@ तबादला खुद मांगा,अब पदोन्नति में वरिष्ठता गंवाने का संकट प्रधान आरक्षकों के तबादले ने बदली पदोन्नति की तस्वीर

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  • नए राजपत्र ने खोली वरिष्ठता की गांठ…अनुरोध पर तबादला तो सबसे नीचे…
  • तबादला बना वरिष्ठता की बड़ी चुनौती, प्रधान आरक्षकों पर नए नियम का असर
  • पुरानी वरिष्ठता गई! अनुरोध पर तबादला लेने वाले अब नए जिले में ‘नवीनतम’
  • एक तबादला, बदल गई वरिष्ठता, प्रधान आरक्षकों की पदोन्नति पर नए नियम का असर
  • पदोन्नति से पहले बड़ा झटका! अनुरोध पर तबादला वालों की वरिष्ठता बदली
  • नए जिले में पहुंचते ही वरिष्ठता सबसे नीचे, राजपत्र में साफ हुआ नियम
  • जिस तबादले की खुद मांग की,वही अब वरिष्ठता में पड़ सकता है भारी
  • प्रधान आरक्षक से सहायक उप निरीक्षक पदोन्नति के नए नियम ने बदली तस्वीर
  • राजपत्र के बिंदु 17(क) में साफ प्रावधान—अनुरोध पर स्थानांतरण वाले कर्मचारी को नए जिले की वरिष्ठता सूची में माना जाएगा ‘नवीनतम’


-न्यूज डेस्क-
सरगुजा,29 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)।
छत्तीसगढ़ पुलिस में प्रधान आरक्षक से सहायक उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति को लेकर अब एक नई प्रशासनिक और विभागीय तस्वीर सामने आई है,पहले जारी पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर उच्च न्यायालय,बिलासपुर में कई याचिकाएं दायर हुई थीं, इसके बाद 11 अगस्त 2026 को उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के पालन में पुलिस मुख्यालय ने 27 अगस्त 2026 को वर्ष 2026 की पदोन्नति प्रक्रिया के लिए संशोधित समय-सारणी जारी की है, इसके साथ ही 8 सितंबर 2026 को छत्तीसगढ़ राजपत्र में पुलिस कार्यपालिक बल के भर्ती, पदोन्नति और सेवा की शर्तों से संबंधित संशोधित नियम प्रकाशित हुए हैं। नई व्यवस्था सामने आने के बाद अब सरगुजा संभाग में उन प्रधान आरक्षकों की स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है, जिन्होंने पूर्व में प्रशासनिक आदेश से हुए तबादले के बाद स्वयं के अनुरोध पर अपना जिला बदलवा लिया था,उस समय मनचाहे जिले में पदस्थापना हासिल करना उनके लिए सुविधा का विषय रहा होगा,लेकिन अब पदोन्नति प्रक्रिया के दौरान यही निर्णय उनके लिए प्रशासनिक पेच बन सकता है,प्रधान आरक्षक से सहायक उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया में लागू किए गए नए नियम ने संभाग के उन पुलिस कर्मचारियों के सामने नई स्थिति खड़ी कर दी है, जिन्होंने पूर्व में अपने अनुरोध पर एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण कराया था, अब ऐसे कर्मचारियों की वरिष्ठता नए जिले में उसी पुराने क्रम से नहीं चलेगी,8 सितंबर 2026 को जारी राजपत्र में पदोन्नति प्रक्रिया के बिंदु 17 (क) ‘वरिष्ठता’ में इस संबंध में स्पष्ट प्रावधान किया गया है, राजपत्र में कहा गया है कि आरक्षक तथा प्रधान आरक्षक के पद जिला संवर्ग के हैं, इसके बाद प्रशासनिक स्थानांतरण और कर्मचारी के स्वयं के अनुरोध पर किए गए स्थानांतरण के बीच वरिष्ठता के निर्धारण को अलग-अलग रखा गया है, सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान में स्पष्ट लिखा है की कर्मचारी के अनुरोध पर स्थानांतरण होने पर उसे स्थानांतरण आदेश की तारीख से संबंधित जिला/इकाई की वरिष्ठता सूची में नवीनतम माना जाएगा, यानी मामला केवल नए जिले में पदस्थापना का नहीं है, बल्कि स्थानांतरण के साथ वरिष्ठता क्रम पर सीधा असर पड़ने का है।
मनचाहे जिले में पहुंचना अब भारी पड़ने की आशंका- कई कर्मचारियों के लिए स्वयं के अनुरोध पर तबादला उस समय राहत का रास्ता रहा होगा, लेकिन अब वही तबादला उनके सेवा रिकॉर्ड में एक महत्वपूर्ण तथ्य है, किस कर्मचारी का तबादला किस आदेश से हुआ? क्या वह प्रशासनिक था? क्या कर्मचारी ने बाद में स्वयं आवेदन किया? उस आवेदन के आधार पर किस जिले में पदस्थापना मिली? वहां कर्मचारी ने कितने समय तक सेवा की? पदोन्नति के लिए संबंधित अवधि में उसकी वरिष्ठता और सेवा-अभिलेख किस इकाई में माना जाएगा? ये सारे प्रश्न अब महत्वपूर्ण हो गए हैं, यही वजह है कि सरगुजा संभाग में कुछ प्रधान आरक्षकों द्वारा कथित रूप से अपने रेंज के पुलिस महानिरीक्षक के समक्ष आवेदन देकर पूर्व पदस्थापन पर वापस भेजे जाने की कोशिश किए जाने की चर्चा है, इन आवेदनों में यदि कर्मचारी पूर्व में किए गए अपने अनुरोध को वापस लेने की मांग कर रहे हैं तो मूल सवाल यह है कि क्या बाद में आवेदन वापस लेने से पहले हुए स्थानांतरण का प्रशासनिक प्रभाव समाप्त हो जाएगा? इसका निर्णय संबंधित नियमों और सक्षम प्राधिकारी को करना होगा।
अब आवेदन वापस लेने से क्या बदलेगा?- यही पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है,यदि किसी कर्मचारी ने स्वयं आवेदन देकर दूसरे जिले में स्थानांतरण प्राप्त किया और उसके बाद वहां पदभार ग्रहण कर सेवा भी की, तो उस अवधि का रिकॉर्ड विभाग के पास रहेगा,बाद में यदि वही कर्मचारी यह कहता है कि वह अपना पुराना आवेदन वापस लेना चाहता है और पहले वाले जिले में पदस्थ किया जाए, तो केवल आवेदन वापस लेने से पिछली सेवा अवधि और उस दौरान हुए प्रशासनिक घटनाक्रम स्वतः समाप्त हो जाएंगे या नहीं—यह अलग प्रश्न है, इसलिए अब इस तरह के मामलों में केवल कर्मचारी की इच्छा नहीं, बल्कि स्थानांतरण आदेश, पदस्थापना आदेश, कार्यभार ग्रहण, सेवा-अभिलेख और पदोन्नति नियम महत्वपूर्ण होंगे, यही कारण है कि इस मामले में किसी कर्मचारी के संबंध में अभी से यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि वह निश्चित रूप से पदोन्नति सूची से बाहर हो जाएगा।
जिस जिले में पहुंचे,वहीं वरिष्ठता सूची के सबसे नीचे– इस प्रावधान का सीधा अर्थ यह है कि यदि कोई प्रधान आरक्षक अपने अनुरोध पर पुराने जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण कराता है,तो नए जिले में उसकी पूर्व वरिष्ठता स्वतः उसके साथ नहीं आती, स्थानांतरण आदेश की तारीख से उसे उस जिला/इकाई की वरिष्ठता सूची में नवीनतम माना जाएगा, उदाहरण के तौर पर किसी प्रधान आरक्षक ने पुराने जिले में कई वर्षों की सेवा पूरी कर वरिष्ठता हासिल की है,बाद में उसने अपनी इच्छा से दूसरे जिले में स्थानांतरण मांगा और आदेश जारी हो गया,नए नियम के अनुसार नए जिले में उसकी वरिष्ठता पुराने जिले के वर्षों के आधार पर ऊपर नहीं रहेगी, बल्कि उसे संबंधित जिला/इकाई की वरिष्ठता सूची में नवीनतम माना जाएगा,यही वह प्रावधान है, जिसने अब पदोन्नति की दौड़ में शामिल होने वाले कई प्रधान आरक्षकों की स्थिति को महत्वपूर्ण बना दिया है।
प्रशासनिक तबादला और अनुरोध पर तबादला—दोनों में फर्क-राजपत्र में वरिष्ठता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रशासनिक कारणों से किए गए स्थानांतरण और कर्मचारी के अनुरोध पर किए गए स्थानांतरण को एक जैसा नहीं माना गया है, यदि स्थानांतरण प्रशासनिक आवश्यकता के कारण किया गया है,तो उसकी वरिष्ठता का निर्धारण अलग प्रावधानों के अनुसार होगा,लेकिन कर्मचारी ने स्वयं स्थानांतरण का अनुरोध किया और उसी आधार पर दूसरे जिले/इकाई में स्थानांतरण हुआ, तो नया नियम सीधे लागू होता है,यही अंतर अब पुलिस विभाग के भीतर चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
पुरानी वरिष्ठता बचाने की कोशिश? लौटने के आवेदन की चर्चा- बताया जा रहा है कि सरगुजा संभाग में ऐसे कुछ प्रधान आरक्षक,जिन्होंने पूर्व में अपने अनुरोध पर स्थानांतरण कराया था,अब नए नियम के प्रभाव को देखते हुए पुराने जिले में वापसी का रास्ता तलाश रहे हैं, कुछ कर्मचारियों द्वारा रेंज स्तर पर अपने पूर्व स्थानांतरण संबंधी आदेश को वापस लेने अथवा पुराने जिले में पुनः पदस्थापना के लिए आवेदन किए जाने की जानकारी सामने आ रही है,हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सिर्फ वापसी के लिए आवेदन कर देने से पुरानी वरिष्ठता स्वतः बहाल हो जाएगी, ऐसा राजपत्र के उपलब्ध प्रावधान में नहीं लिखा है, वापसी का आवेदन स्वीकार होगा या नहीं और स्वीकार होने की स्थिति में वरिष्ठता किस प्रकार निर्धारित होगी,यह संबंधित सक्षम प्राधिकारी के आदेश और लागू नियमों पर निर्भर करेगा, इसलिए अब पूरा मामला केवल तबादले का नहीं, बल्कि तबादले के बाद वरिष्ठता के पुनर्निर्धारण का भी बन गया है।
16 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक दावा-आपत्ति का महत्वपूर्ण चरण-पुलिस मुख्यालय की संशोधित समय-सारणी के अनुसार रेंज पुलिस महानिरीक्षक द्वारा कर्मचारियों की दावा-आपत्तियों के निराकरण के लिए 16 अक्टूबर 2026 से 30 अक्टूबर 2026 तक की अवधि निर्धारित की गई है, यह अवधि इसलिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इसी दौरान कर्मचारी अपने सेवा रिकॉर्ड या वरिष्ठता को लेकर अपनी बात रख सकेंगे,इसके बाद 16 नवंबर 2026 तक रेंज स्तर की समिति द्वारा पात्र आरक्षकों और प्रधान आरक्षकों के रिकॉर्ड एवं मास्टर चार्ट का परीक्षण कर चयन सूची अनुमोदन के लिए भेजने की प्रक्रिया निर्धारित है,इसके बाद 30 नवंबर 2026 को योग्यता सूची जारी करने की तारीख निर्धारित की गई है।
हाईकोर्ट की कार्यवाही के बाद बदली प्रक्रिया- पुलिस मुख्यालय के 27 अगस्त के आदेश में स्पष्ट रूप से उच्च न्यायालय, बिलासपुर में दायर विभिन्न याचिका प्रकरणों में 11 अगस्त 2026 को पारित आदेश का उल्लेख किया गया है, आदेश में याचिकाओं के क्रमांक 4339/2026,4471/2026, 5018/2026, 4809/2026, 4713/2026, 4691/2026, 4383/2026, 4446/2026, 4445/2026 और 4364/2026 सहित अन्य प्रकरणों में पारित आदेश के संदर्भ में वर्ष 2026 की पदोन्नति प्रक्रिया की संशोधित समय-सारणी निर्धारित की गई है, पुलिस मुख्यालय ने संबंधित अधिकारियों को न्यायालय के 11 अगस्त के आदेश में दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। अब वरिष्ठता सूची पर सबकी नजर- पदोन्नति प्रक्रिया का सबसे संवेदनशील हिस्सा अब वरिष्ठता सूची और पात्रता सूची बनने का है, किस प्रधान आरक्षक को किस आधार पर वरिष्ठ माना जाएगा? किसका सेवा रिकॉर्ड किस इकाई से लिया जाएगा? तबादले के बाद उसकी सेवा किस तरह दर्ज है? क्या प्रशासनिक तबादले और स्वयं के अनुरोध पर किए गए स्थानांतरण को समान रूप से देखा जाएगा या अलग प्रशासनिक परिस्थितियों के रूप में दर्ज किया जाएगा? इन सवालों के जवाब दस्तावेजों और विभागीय परीक्षण के दौरान सामने आएंगे। सरगुजा में क्यों बढ़ी बेचैनी?- सरगुजा संभाग में इस पूरी प्रक्रिया का असर इसलिए अधिक चर्चा में है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में प्रधान आरक्षक लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा में हैं, कुछ कर्मचारियों ने वर्षों तक एक ही इकाई में सेवा की है, जबकि कुछ के तबादले अलग-अलग कारणों से होते रहे हैं, इनमें से जिन कर्मचारियों का प्रशासनिक तबादला हुआ और बाद में उन्होंने स्वयं आवेदन देकर अपनी पदस्थापना बदलवाई, उनके लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग उनकी वरिष्ठता और पात्रता का निर्धारण किस प्रकार करता है, यदि ऐसे कर्मचारी अब पुराने जिले में वापस जाने का प्रयास करते हैं तो यह अपने आप में एक नया प्रशासनिक मामला होगा।
30 नवंबर को सामने आएगी काफी हद तक तस्वीर- फिलहाल पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण अगला चरण दावा-आपत्ति और रिकॉर्ड परीक्षण है, 16 अक्टूबर से 30 अक्टूबर—दावा-आपत्तियों का निराकरण, 16 नवंबर—रेंज स्तर की समिति द्वारा रिकॉर्ड/मास्टर चार्ट के परीक्षण के बाद चयन सूची भेजने की प्रक्रिया, 30 नवंबर—योग्यता सूची जारी करने की निर्धारित तारीख, यानी अगले दो महीने छत्तीसगढ़ पुलिस के प्रधान आरक्षकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
एक आवेदन ने बदल दी वरिष्ठता की तस्वीर
पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि कर्मचारी द्वारा मांगा गया स्थानांतरण केवल पदस्थापना बदलने वाला आदेश नहीं रह गया है, नए राजपत्र के अनुसार, यदि वह स्थानांतरण उसके अनुरोध पर हुआ है, तो नए जिले में उसकी वरिष्ठता भी नए सिरे से प्रभावित होगी, इसलिए सरगुजा संभाग के प्रधान आरक्षकों के बीच अब यह सवाल सबसे बड़ा है कि जिस तबादले को कभी व्यक्तिगत सुविधा या आवश्यकता के रूप में मांगा गया था, क्या वही निर्णय अब पदोन्नति के समय वरिष्ठता के क्रम में पीछे कर देगा? राजपत्र का बिंदु 17(क) कम से कम इस एक बात को बिल्कुल स्पष्ट करता है—अनुरोध पर हुए स्थानांतरण के बाद संबंधित जिला/इकाई की वरिष्ठता सूची में कर्मचारी को स्थानांतरण आदेश की तारीख से ‘नवीनतम’ माना जाएगा, अब इसका वास्तविक असर आगामी पदोन्नति की वरिष्ठता सूची सामने आने के बाद और अधिक स्पष्ट होगा।
पहले तबादला कराया…अब पुरानी जगह लौटने की कोशिश की चर्चा…
पुलिस विभाग में प्रशासनिक जरूरत के आधार पर समय-समय पर कर्मचारियों के तबादले किए जाते हैं, सरगुजा संभाग में भी प्रधान आरक्षकों सहित पुलिसकर्मियों के प्रशासनिक तबादले होते रहे हैं, लेकिन चर्चा उन कर्मचारियों को लेकर है, जिन्हें प्रशासनिक स्तर पर एक जिले से दूसरे जिले में भेजा गया था और बाद में उन्होंने स्वयं आवेदन देकर दूसरे जिले में तबादला करा लिया, अर्थात विभागीय आदेश से जिस स्थान पर भेजा गया था, वहां सेवा जारी रखने के बजाय कर्मचारी ने अपने अनुरोध के आधार पर दूसरी जगह पदस्थापना हासिल कर ली, उस समय शायद किसी को यह अनुमान नहीं रहा होगा कि आने वाले समय में पदोन्नति की प्रक्रिया में वरिष्ठता, सेवा-अभिलेख और पदस्थापना की स्थिति महत्वपूर्ण सवाल बन सकती है, अब जब प्रधान आरक्षक से सहायक उप निरीक्षक पदोन्नति की प्रक्रिया नए नियमों और निर्धारित समय-सारणी के अनुसार आगे बढ़ रही है, ऐसे कर्मचारियों की स्थिति को लेकर विभागीय स्तर पर हलचल दिखाई दे रही है।


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