रामेश्वरम के अंबेडकर भवन में आदिवासी अधिकार दिवस मनाया गया,छात्र-छात्राओं को वितरित की गई शैक्षणिक सामग्री
-संवाददाता-
रामानुजनगर/सूरजपुर,14 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। ग्राम पंचायत रामेश्वरम स्थित अंबेडकर भवन में रविवार को आदिवासी अधिकार दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया,कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुंडा के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। अतिथियों का अक्षत-तिलक से स्वागत किया गया,कार्यक्रम की अध्यक्षता सोशल एक्टिविस्ट एवं सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग सूरजपुर के जिला अध्यक्ष बीपीएस पोया ने की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीपीएस पोया ने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकार केवल कानून और सरकारी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की जानकारी होना जरूरी है,अधिकारों की रक्षा के लिए गांव की ग्राम सभा को मजबूत करना और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना सबसे महत्वपूर्ण है,उन्होंने बताया कि 13 सितंबर 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने स्वदेशी लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा को अपनाया था,संयुक्त राष्ट्र के अनुसार यह घोषणा 143 देशों के समर्थन, चार के विरोध और 11 देशों के मतदान से विरत रहने के साथ अपनाई गई थी,यह स्वदेशी समुदायों के अधिकारों,पहचान, संस्कृति और सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज है।
जल,जंगल,जमीन के साथ भाषा और संस्कृति भी अधिकार-बीपीएस पोया ने कहा कि आदिवासी अधिकार केवल जल, जंगल और जमीन तक सीमित नहीं हैं,भाषा, संस्कृति,परंपरा,पहचान,सामुदायिकजीवन तथा अपने विकास से जुड़े निर्णयों में भागीदारी भी अधिकारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है,उन्होंने कहा कि पारंपरिक भूमि एवं प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े अधिकारों की रक्षा, संस्कृति और भाषा का संरक्षण तथा विस्थापन,शोषण और भेदभाव से सुरक्षा के लिए समाज को जागरूक और संगठित होना होगा,उन्होंने पेसा कानून,वन अधिकार अधिनियम,ग्राम सभा की शक्तियों और सामुदायिक वन प्रबंधन के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी,उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पेसा नियम बनाए गए हैं,लेकिन इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम स्तर पर लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना जरूरी है,उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन से अधिकार मांगने के साथ समुदाय को अपनी शक्तियों और ग्राम सभा की भूमिका को समझना होगा,जागरूक ग्राम सभा ही गांव, जंगल, जमीन और सामुदायिक हितों की प्रभावी रक्षा कर सकती है।
एक कदम गांव,ग्राम सभा और गोटुल शिक्षा की ओर-बीपीएस पोया ने समाज से शिक्षा और सामुदायिक जागरूकता को अभियान के रूप में आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि‘हमें एक कदम गांव की ओर,ग्राम सभा की ओर और एक कदम गोटुल शिक्षा की ओर बढ़ाना है, इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति का सहयोग आवश्यक है, उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को सामाजिक,शैक्षणिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी, गोटुल की सामुदायिक भावना को आधुनिक शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जोड़कर गांवों में शिक्षा का बेहतर वातावरण तैयार किया जा सकता है।
शिक्षा को पहली प्राथमिकता दें : बिरसा मुंडा-कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिरसा मुंडा ने कहा कि आदिवासी समाज को शिक्षा को पहली प्राथमिकता देनी चाहिए, आदिवासी जननायकों ने संघर्ष कर समाज को अधिकारों के लिए आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया है,उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को शिक्षित,जागरूक और सामाजिक-आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं,उन्होंने समाजहित में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया, विशिष्ट अतिथि ज्योति सांगा ने भी शिक्षा पर जोर देते हुए कहा आधे रोटी खाएंगे, फिर भी स्कूल जाएंगे, उन्होंने कहा कि शिक्षा ही बच्चों के बेहतर भविष्य और समाज के विकास की मजबूत नींव है।
छात्र-छात्राओं को बांटी शैक्षणिक सामग्री
आदिवासी अधिकार दिवस के अवसर पर छात्र-छात्राओं को पेन,चार्ट बोर्ड सहित अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई,बच्चों को नियमित पढ़ाई करने और शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया गया,कार्यक्रम में मोतीलाल उर्रे, सोनसाय मरकाम,दीपक मरावी,प्रमोद सिंह मरावी (कार्यकारिणी अध्यक्ष,सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग रामानुजनगर),दिनेश सिंह उर्रे (उपाध्यक्ष,आदिवासी युवा छात्र संगठन रामानुजनगर),भगवत सिंह नेताम,बबीता,मनीषा,लक्ष्मी एवं शांति सहित गोटुल शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।
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