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अम्बिकापुर@वनभूमि पर कार्रवाई : नोटिस के बाद चला बुलडोजर

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डबरीपानी में 20 अवैध मकान ढहाए,वर्षों से कब्जे पर प्रशासन सख्त
हाईकोर्ट स्टे के बीच बची जमीन पर बढ़ी कार्रवाई,भारी पुलिस बल तैनात
अम्बिकापुर,08 मई 2026 (घटती-घटना)।
शहर से लगे ग्राम पंचायत खैरबार के डबरीपानी क्षेत्र में संरक्षित वन भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ शुक्रवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। वन विभाग, प्रशासनिक अधिकारियों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में 20 अवैध मकानों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने पुलिस बल को तैनात किया गया था। यह कार्रवाई लंबे समय से विवाद और शिकायतों के घेरे में रही वनभूमि पर कब्जे को लेकर की गई। बताया जा रहा है कि डबरीपानी,घुटरापारा और नवागढ़ क्षेत्र में संरक्षित जंगल की जमीन पर बड़ी संख्या में लोगों ने मकान बनाकर कब्जा कर लिया था। वन विभाग की जांच में मामला सही पाए जाने के बाद अतिक्रमणकारियों को बेदखली नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी कब्जा नहीं हटाया गया। इसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बुलडोजर कार्रवाई की। मामले को लेकर भाजपा नेता और पार्षद आलोक दुबे ने करीब दो माह पहले वन विभाग के अधिकारियों से शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया था कि संरक्षित वनभूमि पर पेड़ों की कटाई कर अवैध कब्जा किया गया है और वहां स्थायी मकान बना लिए गए हैं। शिकायत के बाद वन विभाग ने जांच कराई, जिसमें अतिक्रमण की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर वन विभाग ने 12 मार्च और 17 मार्च को अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर 10 दिन के भीतर जमीन खाली करने के निर्देश दिए थे। हालांकि निर्धारित समय के बाद भी कब्जा जस का तस बना रहा। इसके बाद भी लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठने लगे थे।
सीएम को पत्र लिखकर उठाया मुद्दा : कार्रवाई में देरी को लेकर भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने 29 अप्रैल को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी दी थी। पत्र में उन्होंने आरोप लगाया था कि अंतिम बेदखली नोटिस जारी होने के बाद भी वन विभाग के अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाने के लिए ठोस पहल नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन और पुलिस से बल नहीं मांगा गया,जिसके कारण कार्रवाई लंबित रही। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि देरी का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने हाईकोर्ट से स्टे हासिल कर लिया। बताया गया कि डबरीपानी और नवागढ़ क्षेत्र के कुछ लोगों ने न्यायालय से राहत प्राप्त की,जिससे आगे की कार्रवाई प्रभावित हुई। इसके बावजूद जिन मकानों पर कानूनी अड़चन नहीं थी,वहां प्रशासन ने कार्रवाई आगे बढ़ाई।
सुबह से शुरू हुई कार्रवाई
शुक्रवार सुबह प्रशासनिक टीम,वन विभाग और पुलिस बल डबरीपानी पहुंचा। कार्रवाई शुरू होने से पहले लोगों को घरों से जरूरी सामान निकालने का समय दिया गया। इसके बाद चार बुलडोजरों की मदद से अवैध निर्माणों को गिराया गया। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार संरक्षित वनभूमि पर अतिक्रमण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में अब भी अवैध कब्जे हैं, वहां भी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर आगे कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी चल चुका है अभियान
महामाया पहाड़ से लगे क्षेत्रों में वनभूमि पर कब्जे का मामला नया नहीं है। इससे पहले भी प्रशासन द्वारा करीब 40 अवैध मकानों को हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है। वन विभाग का कहना है कि लगातार जंगल क्षेत्र में अतिक्रमण बढऩे से हरियाली और पर्यावरण पर असर पड़ रहा है। यही वजह है कि संरक्षित भूमि को खाली कराने अभियान चलाया जा रहा है।
प्रशासन बोला…जंगल बचाना जरूरी
अधिकारियों का कहना है कि संरक्षित वनभूमि पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लगातार हो रहे अतिक्रमण से जंगल क्षेत्र सिकुड़ रहे हैं। ऐसे में वनभूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना जरूरी है। प्रशासन ने साफ किया है कि आगे भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।


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