पुष्पा साहू की जगह अब रोक्तिमा यादव संभालेंगी कमान जिले में चर्चा-‘क्या जाते-जाते सेटिंग कर गईं पूर्व कलेक्टर?’
-रवि सिंह-
कोरिया 08 मई 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ शासन के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों कोरिया जिला सबसे अधिक चर्चा में है, वजह है एक ऐसा आदेश,जिसने महज 48 घंटे के भीतर नया मोड़ ले लिया,पहले जारी आदेश में आईएएस अधिकारी पुष्पा साहू को कोरिया जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया था, लेकिन दो दिन भी पूरे नहीं हुए कि शासन ने संशोधित आदेश जारी कर उनकी जगह रोक्तिमा यादव को जिले की नई कलेक्टर नियुक्त कर दिया,यह बदलाव सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से कहीं अधिक राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक चर्चाओं का विषय बन गया है, जिले से लेकर राजधानी तक सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि सरकार को 48 घंटे के भीतर अपने ही आदेश में संशोधन करना पड़ा?
सोशल मीडिया में पहले बधाई,फिर मायूसी
जैसे ही पुष्पा साहू के कोरिया कलेक्टर बनने का आदेश सामने आया,समाज विशेष में उत्साह की लहर दौड़ गई थी,सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बधाइयों की बाढ़ सी आ गई,कई लोगों ने इसे अपने समाज के सम्मान और प्रतिनिधित्व से जोड़ते हुए पोस्ट साझा किए, फेसबुक,व्हाट्सएप और अन्य माध्यमों में ‘हमारी बेटी’,‘हमारे समाज का गौरव’ जैसे संदेश तेजी से वायरल हुए,लेकिन शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह खुशी केवल 48 घंटे की मेहमान साबित होगी, अब संशोधित आदेश आने के बाद वही सोशल मीडिया मायूसी से भरा नजर आ रहा है, कुछ लोग खुलकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं तो कुछ इसे प्रशासनिक राजनीति का हिस्सा बता रहे हैं।
रोक्तिमा यादव की एंट्री से बढ़ी हलचल
अब जब रोक्तिमा यादव को जिले की नई कलेक्टर बनाया गया है तो प्रशासनिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं,समाज कल्याण विभाग में निदेशक पद पर कार्यरत रोक्तिमा यादव को तेज-तर्रार और सख्त प्रशासनिक अधिकारी माना जाता है, प्रशासनिक कार्यशैली में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है, सूत्रों का दावा है कि वह हालिया समय में जिले में पदस्थ रही कलेक्टर के बैच की अधिकारी हैं और दोनों के बीच बेहतर प्रशासनिक तालमेल भी माना जाता है, यही कारण है कि अब जिले में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या जाते-जाते पूर्व कलेक्टर ने अपनी पसंद की अधिकारी की नियुक्ति करवा ली? हालांकि यह केवल चर्चाओं का हिस्सा है, लेकिन जिला मुख्यालय से लेकर चाय की दुकानों तक यही चर्चा गर्म है।
आखिर क्यों बदला गया आदेश?
सरकार की ओर से आदेश परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है,लेकिन प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो इसके पीछे व्यक्तिगत कारण प्रमुख बताए जा रहे हैं, चर्चा यह है कि पुष्पा साहू अपने बच्चे की 12वीं बोर्ड परीक्षा के कारण फिलहाल जिला प्रभार नहीं लेना चाहती थीं,बताया जा रहा है कि परीक्षा के इस महत्वपूर्ण समय में परिवार को छोड़कर नए जिले में जाना उनके लिए सहज नहीं था,हालांकि यह केवल सूत्रों के हवाले से चल रही चर्चा है, शासन की ओर से इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि ऐसा था तो फिर प्रारंभिक आदेश जारी होने से पहले इस पहलू पर विचार क्यों नहीं किया गया?
क्या छोटा जिला होने से बच रहे अधिकारी?
कोरिया जिले को लेकर एक और चर्चा प्रशासनिक गलियारों में लंबे समय से चलती रही है, कई लोग मानते हैं कि छोटा जिला होने के कारण बड़े अधिकारी यहां पदस्थापना को लेकर बहुत अधिक उत्साहित नहीं रहते, सीमित संसाधन, कम प्रशासनिक विस्तार और राजनीतिक समीकरणों के कारण कई अधिकारियों की प्राथमिकता सूची में यह जिला पीछे माना जाता है, यही वजह है कि जिले में अक्सर अल्पकालिक प्रशासनिक नियुक्तियां देखने को मिलती रही हैं, जिले के जानकार बताते हैं कि यहां प्रशासन चलाने से अधिक स्थानीय समीकरणों को संभालना चुनौतीपूर्ण माना जाता है, ऐसे में अधिकारी भी यहां लंबी पारी खेलने के मूड में कम दिखाई देते हैं।
चुगली ब्रिगेड फिर सक्रिय होने की चर्चा
कोरिया जिले की राजनीति और प्रशासन में एक शब्द अक्सर सुनाई देता है — ‘चुगली ब्रिगेड ‘। यह उन लोगों के लिए व्यंग्यात्मक रूप से इस्तेमाल किया जाता है जो अधिकारियों के आसपास रहकर सूचनाएं पहुंचाने, माहौल बनाने और समीकरण प्रभावित करने का काम करते हैं, नई नियुक्ति के बाद जिले में यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि क्या अब वही पुराना तंत्र दोबारा सक्रिय होगा? क्या फिर अधिकारियों के आसपास वही चेहरे दिखाई देंगे जो हर प्रशासनिक फैसले में अपनी भूमिका तलाशते हैं? जिले के कुछ लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि कोरिया जिले में प्रशासन से ज्यादा ‘सूचना तंत्र’ चलता है, जहां कौन किसके करीब है, यही सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
महिला नेतृत्व बरकरार,लेकिन सवाल कायम
एक बात जरूर है कि शासन ने कोरिया जिले में महिला नेतृत्व को बरकरार रखा है, पहले पुष्पा साहू और अब रोक्तिमा यादव,दोनों महिला अधिकारी हैं, इससे यह संदेश जरूर गया है कि सरकार जिले में महिला प्रशासनिक नेतृत्व पर भरोसा जता रही है,लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी कायम है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक आदेश को 48 घंटे के भीतर बदलना पड़ा? क्या यह केवल व्यक्तिगत कारण था? क्या प्रशासनिक दबाव काम आया? क्या राजनीतिक समीकरण बदले? या फिर यह केवल संयोग है? इन सवालों के जवाब भले अभी न मिले हों,लेकिन इतना तय है कि कोरिया जिले की राजनीति और प्रशासन में यह घटनाक्रम लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।
अब सबकी नजर नई कलेक्टर पर…
फिलहाल जिले की जनता की नजर अब नई कलेक्टर रोक्तिमा यादव पर टिक गई है, लोग यह जानना चाहते हैं कि उनकी कार्यशैली कैसी होगी, प्रशासनिक प्राथमिकताएं क्या होंगी और जिले में चल रहे कई विवादित मामलों पर उनका रुख कैसा रहेगा,खनिज,जल संसाधन, स्वास्थ्य,शिक्षा और स्थानीय राजनीति जैसे कई मुद्दे पहले से जिले में चर्चा में हैं। ऐसे में नई कलेक्टर के सामने प्रशासनिक चुनौतियां भी कम नहीं होंगी,अब देखना यह होगा कि रोक्तिमा यादव जिले में अपनी अलग कार्यशैली स्थापित कर पाती हैं या फिर कोरिया की पुरानी प्रशासनिक राजनीति उन्हें भी अपने रंग में रंग देती है।
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