

शिक्षकों से नहीं लिया जाएगा कोई आर्थिक सहयोग
शिक्षकों के हित में बड़ा निर्णय,सुप्रीम कोर्ट में केविएट की तैयारी…
कोरिया/सूरजपुर,30 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने शिक्षकों के पेंशन अधिकारों की रक्षा को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है, प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित प्रांतीय वर्चुअल बैठक में यह निर्णय लिया गया कि माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा पेंशन के संबंध में दिए गए फैसले को सुरक्षित रखने के लिए अब सुप्रीम कोर्ट में केविएट याचिका दायर की जाएगी, एसोसिएशन का मानना है कि यह कदम इसलिए जरूरी है ताकि भविष्य में सरकार द्वारा किसी भी प्रकार से एकतरफा आदेश लेकर उच्च न्यायालय के फैसले को प्रभावित न किया जा सके।
आर्थिक सहयोग नहीं लिया जाएगा, एसोसिएशन उठाएगा पूरा खर्च
बैठक में यह स्पष्ट रूप से निर्णय लिया गया कि केविएट दायर करने के लिए किसी भी शिक्षक से कोई आर्थिक सहयोग या चंदा नहीं लिया जाएगा,एसोसिएशन ने साफ किया कि इस पूरी प्रक्रिया का खर्च संगठन स्वयं वहन करेगा, इसके साथ ही शिक्षकों को आगाह किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति या समूह केविएट के नाम पर राशि मांगता है, तो उससे सतर्क रहें।
शिक्षकों को जागरूक करने का अभियान, ‘क्यूआर कोड’ से सावधान रहने की अपील
वर्चुअल बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रत्येक जिले में बैठक आयोजित कर शिक्षकों को जागरूक किया जाएगा, विशेष रूप से यह अपील की गई कि किसी भी भ्रामक सूचना या बहकावे में न आएं, केविएट या पेंशन के नाम पर मांगी जा रही राशि से सावधान रहें,क्यूआर कोड के माध्यम से होने वाले संभावित फर्जी कलेक्शन से दूरी बनाए रखें।
हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत, संघर्ष जारी रखने का संकल्प-बैठक में 23 जनवरी 2026 और 17 फरवरी 2026 को माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा दिए गए फैसलों का स्वागत किया गया, सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि यह फैसला शिक्षकों के लंबे संघर्ष की जीत है और हम इस लड़ाई को अंतिम छोर तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं,एसोसिएशन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में केविएट दायर कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकार को बिना पक्ष सुने कोई स्थगन (स्टे) आदेश प्राप्त न हो सके।
पेंशन को बताया अधिकार,नहीं ‘खैरात’
बैठक में न्यायालय के फैसले की प्रमुख बातों पर भी विस्तार से चर्चा की गई, इस दौरान यह बताया गया कि संविलियन पूर्व की गई सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, सेवा की निरंतरता, कार्य की प्रकृति और प्रशासनिक नियंत्रण को ध्यान में रखना आवश्यक है,संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता और अवसर के सिद्धांतों का पालन जरूरी है, पेंशन कोई दया या खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार है।
संविलियन पूर्व सेवा को जोड़ने की मांग, सरकार से जारी रहेगा संवाद
टीचर्स एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन स्तर पर सरकार से लगातार संवाद कर संविलियन पूर्व प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना कर पूर्ण पेंशन दिलाने का प्रयास जारी रहेगा, इस मुद्दे को लेकर विभिन्न माध्यमों से पहल की जाएगी ताकि सभी शिक्षकों को उनका अधिकार मिल सके।
याचिकाकर्ताओं को दिए गए जरूरी निर्देश-बैठक में उन शिक्षकों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए, जिनके पक्ष में हाईकोर्ट से निर्णय आ चुका है,उन्हें सलाह दी गई कि न्यायालय के आदेश की प्रति संबंधित कार्यालयों में जमा कर पावती प्राप्त करें,यदि समूह में याचिका दायर की गई है,तो सभी याचिकाकर्ता एक ही आवेदन में हस्ताक्षर कर सकते हैं,जो शिक्षक स्वयं उपस्थित नहीं हो सकते,वे रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से आवेदन भेजें,साथ ही यह भी कहा गया कि जो शिक्षक अभी तक इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए हैं,वे भी इस मुहिम में सक्रिय रूप से भाग लें।
प्रदेशभर के पदाधिकारी और याचिकाकर्ता बैठक में शामिल-इस महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक में प्रदेश स्तर से लेकर जिला स्तर तक के कई पदाधिकारी और याचिकाकर्ता शामिल हुए,बैठक में प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा के साथ प्रदेश संयोजक वाजिद खान,उपाध्यक्ष देवनाथ साहू,बसंत चतुर्वेदी,प्रवीण श्रीवास्तव,प्रांतीय सचिव मनोज सनाढ्य,कोषाध्यक्ष शैलेन्द्र पारीक सहित विभिन्न जिलों के अध्यक्ष और बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे, सभी ने एकमत होकर शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का संकल्प दोहराया।
अधिकार की लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट तक-छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन का यह निर्णय स्पष्ट संकेत देता है कि पेंशन के मुद्दे पर शिक्षकों की लड़ाई अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है, हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में केविएट दायर कर संगठन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी परिस्थिति में शिक्षकों के अधिकारों से समझौता न हो,इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षक अब अपने अधिकारों को लेकर सजग हैं और कानूनी स्तर पर हर संभव प्रयास करने के लिए तैयार हैं।
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