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अंबिकापुर@महावीर जयंतीःअहिंसा, सत्य और करुणा का संदेश देने वाला पावन पर्व

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अंबिकापुर, 30 मार्च 2026(घटती-घटना)।
महावीर जयंती जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व माना जाता है, जिसे भगवान महावीर स्वामी के जन्मकल्याणक के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व न केवल जैन समुदाय के लिए, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
भगवान महावीर का जन्म लगभग 599 ईसा पूर्व में कुंडलपुर में हुआ था। उनके पिता राजा सिद्धार्थ और माता रानी त्रिशला थीं। बचपन में उनका नाम वर्धमान था। युवावस्था में उन्होंने राजसी जीवन का त्याग कर सत्य और आत्मज्ञान की खोज के लिए संन्यास ग्रहण किया।
कठोर तपस्या, ध्यान और आत्मसंयम के लगभग 12 वर्षों के बाद उन्हें कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई, जो जैन धर्म में पूर्ण और सर्वज्ञ ज्ञान माना जाता है। इस ज्ञान के माध्यम से उन्होंने संसार को सत्य, अहिंसा और करुणा का मार्ग दिखाया।
केवल्य ज्ञान की विशेषताएं
केवल्य ज्ञान वह अवस्था है, जिसमें व्यक्ति को भूत, वर्तमान और भविष्य का पूर्ण ज्ञान हो जाता है। यह आत्मज्ञान की सर्वोच्च स्थिति है, जिसमें क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे सभी विकार समाप्त हो जाते हैं और मन पूर्णतः शांत एवं संतुलित हो जाता है।
उत्सव का स्वरूप
महावीर जन्मकल्याणक के अवसर पर जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक एवं भव्य शोभायात्राओं का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु दान-पुण्य करते हैं, जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं और भगवान महावीर के उपदेशों का प्रचार-प्रसार करते हैं।
मानवता के लिए प्रेरणा
महावीर जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता को शांति, प्रेम और सद्भाव का संदेश देने वाला दिवस है। आज के समय में जब समाज में हिंसा और स्वार्थ बढ़ रहा है, तब भगवान महावीर के आदर्श और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।
महावीर स्वामी के प्रमुख उपदेश
भगवान महावीर ने मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए पांच मुख्य सिद्धांत बताए—
अहिंसा: किसी भी जीव को मन, वचन और कर्म से कष्ट न पहुँचाना।
सत्य: सदैव सत्य बोलना और सत्य का पालन करना।
अस्तेय: बिना अनुमति किसी की वस्तु ग्रहण न करना।
ब्रह्मचर्य: इंद्रियों पर नियंत्रण और संयमित जीवन।
अपरिग्रह: आवश्यकता से अधिक संग्रह न करना।
इन सिद्धांतों का पालन कर समाज में शांति, प्रेम और भाईचारे को बढ़ाया जा सकता है।
अंततः, महावीर जयंती हमें यह सिखाती है कि सच्ची महानता शक्ति या धन में नहीं, बल्कि दया, सत्य और आत्मसंयम में निहित है। भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


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