बिलासपुर,23 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में ट्रांसफर आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जब कर्मचारी ने पहले ट्रांसफर पर कोई आपत्ति नहीं जताई, तो बाद में उसी आधार पर नए ट्रांसफर को चुनौती नहीं दी जा सकती।
याचिकाकर्ता अशोक कुमार सिंह नगर निगम चिरमिरी में सब-इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 2017 में उन्हें नगर निगम चिरमिरी से नगर पंचायत लखनपुर (जिला सरगुजा) में पदस्थ किया गया था। इसके बाद 21 फरवरी 2022 को राज्य सरकार ने उनका ट्रांसफर लखनपुर से नगर पंचायत कसडोल (जिला बलौदाबाजार-भाटापारा) कर दिया। इस आदेश को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि,यह ट्रांसफर एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन है। उनका बार-बार ट्रांसफर किया जा रहा है। कोर्ट ने 25 फरवरी 2022 को अंतरिम राहत (स्टे) दी थी, जिसके कारण वे लखनपुर में ही कार्यरत रहे। जबकि,राज्य की ओर से कहा गया कि, जब 2017 में चिरमिरी से लखनपुर ट्रांसफर हुआ था, तब याचिकाकर्ता ने कोई आपत्ति नहीं की। अब नए ट्रांसफर को उसी आधार पर चुनौती देना उचित नहीं है। इसलिए याचिका खारिज की जानी चाहिए। न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय ने कहा कि, याचिकाकर्ता ने प्रारंभिक ट्रांसफर (2017) पर कोई आपत्ति नहीं की।लगभग 3 वर्षों तक स्टे का लाभ उठाया। ऐसे में बाद के ट्रांसफर को चुनौती देना स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही 25 फरवरी 2022 का अंतरिम आदेश (स्टे) समाप्त (वैकेंट) कर दिया गया।
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