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धमतरी/बिलासपुर@हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला….

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कोटवार का पद बाप-दादा की जागीर नहीं अब वंश नहीं बल्कि योग्यता से होगी नियुक्ति

धमतरी/बिलासपुर,12 मार्च 2026। ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता को बढ़ावा देने के लिए हाईकोर्ट ने एक बेहद अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि गांवों में ‘कोटवार’ का पद किसी भी परिवार की पुश्तैनी जागीर नहीं है। अब इस पद पर नियुक्ति वंश परंपरा या रिश्तेदारी के आधार पर नहीं, बल्कि उम्मीदवार की योग्यता,चरित्र और प्रशासनिक उपयुक्तता के आधार पर होगी। दरअसल,यह पूरा मामला एक नियुक्ति विवाद से जुड़ा है। एक याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए दावा किया था कि उसके पिता गांव के कोटवार थे,इसलिए नए कोटवार की नियुक्ति में उसे ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए। दूसरी ओर,स्थानीय प्रशासन ने नियमों का पालन करते हुए एक अन्य पात्र और योग्य व्यक्ति को गांव का कोटवार नियुक्त कर दिया था। प्रशासन के इसी फैसले को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने रिकॉर्ड और संबंधित नियमों का बारीकी से परीक्षण किया और प्रशासन द्वारा की गई नियुक्ति को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।


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