बसदेई चौकी में एक आरक्षक व एक प्रधान आरक्षक दो साल से एक ही जगह जमे हुए,क्या उच्च अधिकारियों की नहीं जा रही इन पर नजर?
क्या प्रधान आरक्षक व आरक्षक का मिल रहा अवैध कारोबारियों को संरक्षण?
चौकी प्रभारी,प्रधान आरक्षक व आरक्षक एक ही जाति समाज के चौकी में चला रहे अपनी मनमानी:सूत्र

-ओंकार पाण्डेय-
सुरजपुर 27 मार्च 2024 (घटती-घटना)। सुरजपुर जिले का कोई पुलिस थाना इतना सुर्खियां नहीं बटोर रहा है फिलहाल जितना एक पुलिस चौकी आजकल सुर्खियों में है जिसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में जमकर अवैध कारोबार हो रहा है और पुलिस मामले में मौन है। सुरजपुर जिले के जिला मुख्यालय से कुछ दूर भैयाथान मार्ग पर ही यह पुलिस चौकी स्थित है और दो पुलिस थानों के बीच इस चौकी का क्षेत्र भी काफी बड़ा है जहां इस चौकी के माध्यम से ही कानून व्यवस्था स्थापित किए जाने का प्रयास होता है। बसदेई पुलिस चौकी को लेकर माना जाता है की एक पुलिस थाना में पदस्थापना जैसा जोर इस चौकी के लिए लगाना पड़ता है तब इस चौकी में प्रभारी या पुलिसकर्मी बतौर काम करने का मौका मिल पाता है। हाल फिलहाल में बसदेई पुलिस चौकी की सुर्खियां और फैली हुई हैं इसका नाम और लोकप्रिय हुआ है जबसे यहां अवैध कारोबार की बाढ़ सी आई हुई है।
सूत्रों की माने तो इस पुलिस चौकी के अंतर्गत दुनिया भर के अवैध कारोबार हो रहे हैं, जुआ का एक बड़ा फड़ हाल में ही यहां पकड़ा गया था जहां से लाखों रुपए और को दर्जन जुआड़ी पकड़े गए थे वहीं इस कार्यवाही में सबसे आश्चर्यजनक यह था की कार्यवाही में स्थानीय बसदेई पुलिस को शामिल नहीं किया गया था और तभी जाकर कार्यवाही सफल हो सकी थी स्थानीय पुलिस बसदेई पुलिस को यदि भनक भी लगती कार्यवाही सफल नहीं होती इसलिए उन्हे शामिल नहीं किया गया था उन्ही की संरक्षण में जुआ फड़ संचालित था, पुलिस के लिए बकायदा एक डिब्बा में हिस्सा निकलता था यह मामला भी समाने आया था तब जाकर पुलिस अधीक्षक सूरजपुर तत्कालीन ने यह कार्यवाही करने अन्य पुलिस थानों के पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया था जिसमे बड़े जुआ फड़ का पर्दाफाश हो सका था।

प्रधान आरक्षक सहित एक आरक्षक हैं दो साल से चौकी में पदस्थ,जिन्हे हटाने उच्च अधिकारियों को देना होगा ध्यान
चौकी में एक प्रधान आरक्षक एक आरक्षक दो वर्षों से पदस्थ हैं जिन्हे हटाने में कोई अधिकारी अभी तक रुचि लेता नजर नहीं आया है। अधिकारियों को इन्हे हटाने ध्यान देना होगा तब पुलिस चौकी क्षेत्र बसदेई अवैध कारोबार से मुक्त होगा,चौकी क्षेत्र में दो वर्षों से पदस्थ दोनो जिनमे एक प्रधान आरक्षक है वहीं एक आरक्षक है का क्षेत्र में काफी दबदबा कायम हो चुका है और दोनो दबदबा कायम कर अब संरक्षण प्रदान करने का काम कर रहे हैं। इनके द्वारा जुआ फड़ में अपने नाम का वसूली डब्बा रखा जाना ही इसी बात का प्रमाण है की यह कितने शातिर हो चुके हैं और अवैध कारोबार के मामले में इनका किस तरह का सहयोग है हिस्सेदारी है। वैसे इन्हे स्थानीय होने का भी फायदा मिल रहा है और यह आसानी से अवैध कारोबारियों से संपर्क स्थापित कर पा रहे हैं क्योंकि स्थानीय होने के कारण सूचना पूर्व से ही इनके पास उपलब्धि रहती है। वैसे वर्तमान में प्रभारी सहित तीन की तिकड़ी तोड़ी जानी जरूरी है जिससे क्षेत्र में अवैध कारोबार रोका जा सके। तीन की तिकड़ी बसदेई चौकी क्षेत्र में है प्रसिद्ध,तीनों में से किसी एक से भी संपर्क किसी भी मामले में संरक्षण के लिए है काफी बसदेई पुलिस चौकी में पदस्थ तीन पुलिसकर्मियों की तिकड़ी काफी प्रसिद्ध है। तीन में से किसी एक से भी संपर्क करके किसी भी मामले में संरक्षण प्राप्त किया जा सकता है ऐसा बताया जाता है। तीनों एक ही जाति के पुलिसकर्मी हैं और तीनों का पुराना आपसी परिवारिक संबंध भी है जो उन्हे हमराज बनाने में मददगार साबित हो रहा है। चौकी क्षेत्र में वैसे तो पहले भी ऐसे क्षेत्र शामिल थे जहां अवैध कारोबार होते थे जिसमे जुआ और नशे का कारोबार बड़े स्तर पर होता आ रहा था लेकिन तीन तिकड़ी के चौकी क्षेत्र में पदस्थ होते ही अवैध कारोबार को काफी संरक्षण मिलने लगा और इसमें वृद्धि देखी जाने लगी यह लोगों का कहना है। वैसे जब जुआ फड़ पकड़ा गया माना जा रहा था की तीन तिकड़ी का अब चौकी से जाना तय है लेकिन तत्कालीन पुलिस अधीक्षक का ही तबादला हो गया और यह बच निकले,जिन्हे अब कौन हटाएगा यह बड़ा प्रश्न है।
बसदेई पुलिस चौकी में सूरजपुर जिले के किसी थाने से ज्यादा इस चौकी का प्रभार पाने की मारा मारी है
सूत्रों की माने तो आज भी बसदेई पुलिस चौकी अंतर्गत जुआ फड़ संचालित है छोटे स्तर पर वहीं अन्य कई अवैध कारोबार फल फूल रहे हैं जिसमे नशे का भी कारोबार बड़े स्तर पर यहां हो रहा है। सभी अवैध कारोबार पुलिस संरक्षण में ही जारी हैं यह भी सूत्रों का कहना है वहीं एक ही जाति के चौकी प्रभारी, प्रधान आरक्षक,आरक्षक यह संरक्षण प्रदान कर रहे हैं यह भी सूत्रों का ही कहना है जिन्होंने एक तरह से इस चौकी क्षेत्र अंतर्गत अपना दबदबा कायम कर रखा है और इनके बिना जानकारी कुछ भी किसी के लिए कर पाना असंभव है जिसे संरक्षण प्रदान कर यह संभव बना रहे हैं। बसदेई पुलिस चौकी सूरजपुर जिले का वह पुलिस चौकी है जहां जाने के लिए प्रभार पाने के लिए किसी पुलिस थाने से ज्यादा मारा मारी है और अभी उक्त पुलिस चौकी में उप निरीक्षक स्तर के प्रभारी प्रभार में हैं जिन्हे बिना प्रभार नौकरी करते देखा भी नहीं गया है वहीं जब उनका एमसीबी जिले से तबादला हुआ तब उन्हे पहली बार अपने गृह जिले से बाहर जाते देखा गया पूरे सेवाकाल में वहीं वह नए जिले में जाते ही बसदेई पुलिस चौकी प्रभारी बने जिसके लिए बताया जाता है की गृह जिला छोड़ने से पहले ही उन्होंने शर्त रख दी थी जो जब पूरी हुई तभी उन्होंने गृह जिला छोड़ा। वैसे अभी बसदेई पुलिस चौकी में प्रभारी सहित प्रधान आरक्षक एवम एक आरक्षक की तिकड़ी जमी हुई है जो एक ही जाति से हैं और जिन्होंने चौकी क्षेत्र में सब कुछ सेट कर रखा है और जमकर चौकी क्षेत्र में अवैध कारोबार चल रहा है।

जमकर होता है बसदेई चौकी अंतर्गत अवैध कारोबार,संरक्षण बिना इस स्तर पर कारोबार संभव नहीं
सुरजपुर जिले के बसदेई चौकी अंतर्गत जमकर अवैध कारोबार होता है,इस चौकी क्षेत्र में जुआ,नशा,अवैध उत्खनन सहित कई अवैध कारोबार धड़ल्ले से होते हैं जिन्हे रोकने में किसी की रुचि नजर नहीं आती,जुआ का बड़ा फड़ यहां कई समाचार प्रकाशन के बाद पकड़ा तो गया लेकिन वह तब संभव हो पाया जब छापा दूसरे जगह के पुलिस टीम से द्वारा डाला गया। माना जाता है की यदि बसदेई चौकी के पुलिसकर्मियों को पता भी चला होता की जुआ फड़ पर छापा पड़ रहा है वह छापा असफल कर देते इसलिए पुलिस अधीक्षक तत्कालीन ने बसदेई पुलिस को बिना सूचना दिए छापा डलवाया और बड़े स्तर पर चल रहे जुआ फड़ से लाखों रुपए सहित कई दर्जन जुआड़ी पकड़े गए। जुआ स्थानीय पुलिस के सह पर चल रहा था यह कई बार जब खबरों में छपा एक प्रधान आरक्षक और एक आरक्षक के नाम पर जुआ फड़ में होने वाली वसूली का जब खबरों में उल्लेख हुआ तब पुलिस अधीक्षक ने संज्ञान लिया और कार्यवाही हुई जो यह भी साबित कर गई की बसदेई चौकी अंतर्गत जुआ फड़ का पुलिस संरक्षण में संचालन मामले में प्रकाशित खबर सत्य थी और जो जुआडियों के पकड़े जाने के बाद सच साबित हुई। वैसे प्रभारी,प्रधान आरक्षक और आरक्षक चौकी अंतर्गत ऐसे तीन चेहरे हैं जिनके अलावा किसी का चौकी क्षेत्र में चलता भी नहीं है वहीं उनमें से ही एक दो का स्थानीय होना और स्थानीय संपर्क होना उनका मददगार साबित हो रहा है जो उन्हे विरोध से बचा रहा है गलत करने पर।
क्या बसदेई चौकी में है ज्यादा कमाई?
क्या चौकी या थाना पाना सिर्फ कमाई करना ही होता है उद्देश्य? यह सवाल इस समय सूरजपुर के पुलिसिंग को लेकर लोगों के जेहन में है, पुलिस की जिम्मेदारी शांति व कानून व्यवस्था बनाए रखना की है ताकि समाज में शांति बनी रहे और आपराधिक गतिविधियां बंद हो सकें ,सुरजपुर जिले में पुलिसिंग इसके अनुरूप नहीं चल रहा है यहां पर शांति व्यवस्था नहीं जिन थानों में कमाई ज्यादा है वहां पर पदस्थापना पाना पुलिसकर्मियों का शौक है अब सवाल यह उठता है कि पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी सिर्फ कमाई तक सीमित है या फिर अपराध को खत्म करने की? लेकिन जैसा सूत्रों का कहना है सूरजपुर जिले की बसदेई पुलिस चौकी अवैध कारोबारी का गढ़ बना हुआ है यहां पर हर तरह के अवैध कारोबार संचालित होते हैं पर अवैध कारोबारी से पुलिस महीना वसूल रही है और उन्हें अवैध कारोबार करने का छूट दे रखा है ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि ऐसी स्थिति वहां पर आम हो चली है यह बात सभी को पता है यहां तक की वहां के स्थानीय पुलिस को भी पता है पर कार्यवाही करना उनकी जिम्मेदारी नहीं है कुछ ऐसा ही लगता है और कार्यवाही ना होना भी उनके वह अवैध कारोबारी के साठ गांठ की तरफ इशारा करता है?
थाने से ज्यादा कमाई बसदेई चौकी की?
सूरजपुर जिले में लगभग दर्जन भर पुलिस थाना है पर उस थाने से ज्यादा कमाई एक चौकी की है ऐसा सूत्रों का कहना है यही वजह है कि इस चौकी का प्रभारी अच्छे-अच्छे बनना चाहते हैं इसके लिए काफी पैरवी भी लगाई जाती है तब जाकर शातिर पुलिसकर्मियों को यहां का प्रभारी बनाया जाता है, कुछ ऐसा ही कोरिया एमसीबी जिले का मोह छोड़ स्थानांतरण के बाद आने वाले उप निरीक्षक जो स्थानांतरण के एक महीने बाद जिले में आमद दी थी पर आते ही उन्हें सीधे बसदेई चौकी का प्रभारी बना दिया गया था, उनके क्षेत्र में उनके आने के बाद से अवैध कारोबार बढ़ा है एक बार तो बहुत बड़ा जुआ फड़ पर भी कार्यवाही हुई थी, सूत्रों का यह भी कहना है कि उनके भाई एक पुलिस अधीक्षक के स्टेनो है जिसकी वजह से उन्हें काफी सहयोग मिलता है। सूरजपुर जिले में 10 पुलिस चौकी व 13 पुलिस थाना है जिसमें से सबसे ज्यादा कमाई वाला पुलिस चौकी बसदेई को माना जाता है, यहां पर थाने से भी ज्यादा कमाई की उम्मीद पुलिसकर्मियों को रहती है। अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता होगा कि जो पुलिसकर्मियों का थाना पाना सपना होता है उसके लिए थाना छोड़ चौकी पाना का सपना देखना कहीं ना कहीं स्वार्थ की तरफ इशारा करता है।
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