स्वामी आत्मानंद विद्यालय सोनहत में जागरूकता कार्यक्रम एवं चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित,पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प…
-संवाददाता-
सोनहत (कोरिया),03 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। विश्व बाघ दिवस के अवसर पर स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय, सोनहत में वन्यजीव संरक्षण एवं पर्यावरण जागरूकता को समर्पित प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया, कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों में प्रकृति, वन्यजीवों और जैव विविधता के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के उद्देश्य से जागरूकता सत्र एवं वृहद चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई,विद्यालय परिसर ‘बाघ बचाओ,जंगल बचाओ’तथा ‘प्रकृति संरक्षण ही मानव जीवन का आधार है’जैसे संदेशों से गूंज उठा।
बाघ संरक्षण के महत्व से विद्यार्थियों को कराया गया अवगत-कार्यक्रम की शुरुआत विश्व बाघ दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए की गई, शिक्षकों ने विद्यार्थियों को बताया कि बाघ केवल भारत का राष्ट्रीय पशु ही नहीं,बल्कि वन पारिस्थितिकी तंत्र का सबसे महत्वपूर्ण प्रहरी भी है, उन्होंने कहा कि यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो बाघ सुरक्षित रहेंगे और यदि बाघ सुरक्षित रहेंगे तो संपूर्ण जैव विविधता तथा प्राकृतिक संतुलन भी सुरक्षित रहेगा,विद्यार्थियों को बाघों की घटती संख्या के कारणों और उनके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
चित्रों में उभरा प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण का संदेश-कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में कक्षा पहली से बारहवीं तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, नन्हे बच्चों से लेकर वरिष्ठ विद्यार्थियों तक सभी ने अपनी कल्पनाशक्ति और कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए बाघ, घने जंगल,वन्यजीव, नदियां,हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य को रंगों के माध्यम से जीवंत किया। विद्यार्थियों ने अपने चित्रों के जरिए वन संरक्षण और जैव विविधता बचाने का प्रभावशाली संदेश दिया, प्रतियोगिता में कक्षा 10वीं की छात्राएं भूमिका,प्रियंशी एवं अनुराधा ने बाघ संरक्षण और पर्यावरण संतुलन पर आधारित आकर्षक एवं संदेशपरक चित्र प्रस्तुत किए, जिनकी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने सराहना की।
पर्यावरण संरक्षण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण-शिक्षकों ने विद्यार्थियों को बताया कि अनियंत्रित वनों की कटाई,अवैध शिकार और प्राकृतिक आवासों के लगातार सिकुड़ने से बाघों का अस्तित्व प्रभावित हो रहा है,उन्होंने कहा कि बाघ खाद्य श्रृंखला के शीर्ष शिकारी हैं और उनकी मौजूदगी पूरे वन तंत्र के स्वस्थ होने का संकेत है। इसलिए बाघों का संरक्षण केवल वन्यजीवों की रक्षा नहीं,बल्कि जंगलों,जल स्रोतों, पर्यावरण और मानव जीवन की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है,विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत छोटी-छोटी जिम्मेदारियों से होती है,अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना,प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना,वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहना और पर्यावरण संरक्षण अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
विद्यालय परिवार ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता की सराहना की-विद्यालय के प्राचार्य एवं समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच, पर्यावरण के प्रति जागरूकता और उत्साह की सराहना की, उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों में सामाजिक उत्तरदायित्व,प्रकृति प्रेम और संरक्षण की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं,साथ ही विद्यार्थियों को भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रकृति संरक्षण का लिया सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे प्रकृति एवं वन्यजीवों की रक्षा के लिए सदैव जागरूक रहेंगे, अधिक से अधिक लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित करेंगे तथा‘बाघ बचाओ,जंगल बचाओ’ के संदेश को समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे साथ ही सकारात्मक संदेश दिया गया और कहा गया की जब सुरक्षित रहेगा बाघ, तभी सुरक्षित रहेंगे जंगल,और जब जंगल सुरक्षित रहेंगे,तभी मानव जीवन,जल,वायु और सम्पूर्ण पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।
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