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रायपुर@ढाई वर्षों में स्वास्थ्य अधोसंरचना का विस्तार, 1000 से अधिक डॉक्टरों की भर्ती,मातृ मृत्यु दर में सुधार का दावा

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  • 11 नए उप स्वास्थ्य केंद्र,43 पीएचसी,हजारों नर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति,मलेरिया और टीबी नियंत्रण पर विशेष फोकस
  • ढाई साल का रिपोर्ट कार्डं ‘अस्पताल बढ़े, डॉक्टर बढ़े…अब स्वास्थ्य व्यवस्था को मिली नई मजबूती
  • स्वास्थ्य ढांचे में विस्तार,भर्ती में तेजी और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
  • स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने गिनाईं उपलब्धियां… कहा…सिर्फ भवन नहीं,गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देना सरकार का लक्ष्य
  • हजारों नर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति,मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी का दावा


न्यूज डेस्क
रायपुर,02 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की उपलब्धियों का विस्तृत उल्लेख करने के बाद स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने लगभग ढाई वर्ष के कार्यकाल में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार,चिकित्सकों की भर्ती, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकेतकों में हुए बदलावों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया,उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल भवन निर्माण पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि डॉक्टर,नर्स,पैरामेडिकल स्टाफ, आधुनिक उपकरण और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को प्राथमिकता दी।
प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना का हुआ व्यापक विस्तार-स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के उद्देश्य से अनेक नए स्वास्थ्य संस्थानों की स्थापना एवं पुराने अस्पतालों के उन्नयन का कार्य किया गया,उन्होंने बताया कि इस अवधि में राज्य सरकार द्वारा 11 नए उप स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए,43 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत किए गए,2 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए,5 सिविल अस्पतालों की स्थापना की स्वीकृति दी गई,3 मातृ एवं शिशु चिकित्सालय स्वीकृत किए गए,एक मानसिक चिकित्सालय स्थापित किया गया,एक क्षेत्रीय नेत्र चिकित्सालय की स्थापना की गई,चार इमरजेंसी हेल्थ क्लीनिक प्रारंभ किए गए,100 बिस्तरों वाले जिला चिकित्सालय के निर्माण एवं विस्तार को स्वीकृति प्रदान की गई,मंत्री ने कहा कि इन संस्थानों का उद्देश्य केवल भवन तैयार करना नहीं बल्कि उनमें पर्याप्त मानव संसाधन एवं आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है।
45 स्वास्थ्य संस्थानों का उन्नयन
उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में 45 स्वास्थ्य संस्थानों का उन्नयन किया गया है,इन संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की पदस्थापना,आधुनिक उपकरण,नए भवन,ऑपरेशन थिएटर,मातृ एवं शिशु सेवाओं का विस्तार,जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं,मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता केवल भवनों से नहीं बल्कि वहां उपलब्ध सेवाओं से तय होती है।
सिर्फ सीमेंट और ईंट का भवन बनाना पर्याप्त नहीं…
प्रेस वार्ता के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने कहा…यदि अस्पताल में डॉक्टर नहीं हैं,नर्स नहीं हैं,उपकरण नहीं हैं और मरीज को इलाज नहीं मिल रहा है,तो केवल सीमेंट और ईंट का भवन बना देने से स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत नहीं होती,उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के हर पहलू पर समान रूप से काम किया है।
डॉक्टरों की भर्ती में आई तेजी…
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से रिक्त पड़े पदों को भरने की दिशा में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई, उन्होंने बताया कि—लगभग 1000 नए डॉक्टरों की भर्ती की गई, मेडिकल ऑफिसर एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियमित नियुक्तियां की गईं, वर्तमान में 100 मेडिकल ऑफिसर एवं 100 विशेषज्ञ चिकित्सकों की नई भर्ती प्रक्रिया जारी है, उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
525 नर्सों की भर्ती,3000 से
अधिक पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति

मंत्री ने बताया कि डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की भी बड़े पैमाने पर भर्ती की गई,उन्होंने कहा 525 स्टाफ नर्स एवं पैरामेडिकल कर्मचारियों की भर्ती व्यापम के माध्यम से पूरी हो चुकी है,एचएम के माध्यम से लगभग 3000 स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती की गई है अथवा अंतिम चरण में है,उन्होंने कहा कि इन नियुक्तियों से जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा।
दूरस्थ क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
मंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है,उन्होंने कहा कि बस्तर,सरगुजा,वनांचल,आदिवासी क्षेत्र जैसे इलाकों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए विशेष नीति अपनाई गई है।
बंधपत्र व्यवस्था में बड़ा बदलाव
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मेडिकल विद्यार्थियों की लंबे समय से यह मांग थी कि एमबीबीएस के बाद लागू बंधपत्र की अवधि कम की जाए, सरकार ने दो वर्ष की अवधि को घटाकर एक वर्ष कर दिया,उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में नियमित भर्ती होने पर इस व्यवस्था में और सुधार किया जा सकता है।
मातृ मृत्यु दर में सुधार सरकार की बड़ी उपलब्धि
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जब वर्तमान सरकार ने कार्यभार संभाला तब मातृ मृत्यु दर के मामले में छत्तीसगढ़ देश के सबसे पिछड़े राज्यों में था,उन्होंने बताया पहले मातृ मृत्यु दर 146 थी, वर्तमान में यह घटकर 124 हो गई है,उन्होंने स्वीकार किया कि अभी भी सुधार की आवश्यकता है,लेकिन यह परिवर्तन स्वास्थ्य विभाग के सतत प्रयासों का परिणाम है।
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी पर विशेष निगरानी
मंत्री ने कहा कि मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नई रणनीति अपनाई,इसके अंतर्गत हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान,नियमित जांच,विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी,संस्थागत प्रसव,पर विशेष ध्यान दिया गया,उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान में भी 10,938 हाई रिस्क गर्भवतियों की पहचान इसी रणनीति का हिस्सा थी।
भारत सरकार से मिला 450 करोड़ का प्रोत्साहन
मंत्री ने बताया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए कार्यों को देखते हुए भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ को लगभग 450 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई है, उन्होंने कहा कि यह राशि भविष्य की स्वास्थ्य योजनाओं के विस्तार में उपयोग की जाएगी।
116 एफआरयू केंद्र विकसित किए जाएंगे…
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में 116 एफआरयू विकसित किए जा रहे हैं, इन केंद्रों में सुरक्षित प्रसव,सर्जरी,नवजात शिशु की देखभाल,रक्त उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सक,जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
मलेरिया नियंत्रण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति
मंत्री ने कहा कि बस्तर क्षेत्र लंबे समय से मलेरिया प्रभावित रहा है,उन्होंने अपने निजी अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय वे स्वयं भी मलेरिया से प्रभावित हुए थे,उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 में वार्षिक परजीवी सूचकांक 16.80 तक था, बाद में यह घटकर 5.21 हुआ,वर्तमान सरकार के कार्यकाल में यह घटकर 0.90 तक पहुंच गया है, सरकार का लक्ष्य इसे 0.50 से भी नीचे लाना है।
मलेरिया नियंत्रण के लिए बहुआयामी रणनीति
उन्होंने बताया कि घर-घर जांच,रक्त परीक्षण,फॉगिंग,दवा वितरण,मच्छर नियंत्रण, जनजागरूकता अभियान,लगातार चलाए जा रहे हैं,मंत्री ने कहा कि यदि एक भी व्यक्ति की मलेरिया से मृत्यु होती है तो सरकार उसे गंभीरता से लेती है।
टीबी मुक्त पंचायतों में छत्तीसगढ़ अग्रणी
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश की लगभग 4500 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित हो चुकी हैं,उन्होंने कहा कि टीवी उन्मूलन अभियान में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों तथा स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त भूमिका रही है।
जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की भी हो रही स्क्रीनिंग
मंत्री ने कहा कि अब स्वास्थ्य विभाग केवल संक्रामक रोगों तक सीमित नहीं है,प्रदेशभर में—उच्च रक्तचाप,मधुमेह,कैंसर,जैसी गैर-संचारी बीमारियों की प्रारंभिक जांच भी बड़े पैमाने पर की जा रही है,इससे गंभीर बीमारियों का समय रहते उपचार संभव हो रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं का नया मॉडल
अपने संबोधन के अंत में इस खंड में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाना नहीं है,बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जहां—मरीज को समय पर डॉक्टर मिले,जांच उपलब्ध हो,दवाइयां मिलें,विशेषज्ञ सेवाएं मिलें,और ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों को भी शहरों जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हों,उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में आने वाले वर्षों में और भी बड़े परिवर्तन दिखाई देंगे।
विशेष रिपोर्ट (भाग-3) में पढि़ए…
– 26 जिलों में कीमोथेरेपी सुविधा
– 32 जिलों में निशुल्क डायलिसिस
– 108 एवं एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस का विस्तार
– 1297 स्वास्थ्य संस्थानों को राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन
– आयुष्मान भारत योजना में छत्तीसगढ़ को देश में पहला स्थान
– अटल आरोग्य जांच योजना
– दवा गुणवत्ता नियंत्रण
– अत्याधुनिक 96 करोड़ की इंटीग्रेटेड लैब
– खाद्य एवं औषधि प्रशासन की बड़ी कार्रवाइयां
– और कई महत्वपूर्ण घोषणाएं।


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