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खड़गवां (एमसीबी)@ अवैध कब्जे,सुरक्षा खतरे और कथित अवैध गतिविधियों की शिकायत पर प्रशासन की चुप्पी से उठे सवाल

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7 जुलाई को कलेक्टर जनदर्शन में सौंपा गया था आवेदन,मोहल्लेवासियों के हस्ताक्षर भी लगाए गए,फिर भी कार्रवाई का इंतजार
-संवाददाता-
खड़गवां (एमसीबी),01 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
प्रदेश सरकार सुशासन,पारदर्शिता और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान का दावा करती है, इसी उद्देश्य से जिला स्तर पर नियमित कलेक्टर जनदर्शन आयोजित किए जाते हैं,ताकि आम नागरिक अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के समक्ष रख सकें और उनका समयबद्ध निराकरण हो सके. लेकिन मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के खड़गवां से सामने आए एक मामले ने जनदर्शन व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वार्ड क्रमांक 13 निवासी मुखलाल विश्वकर्मा ने 7 जुलाई 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में लिखित आवेदन देकर पड़ोसी पर अवैध कब्जे का प्रयास, परिवार की सुरक्षा को खतरा,विवाद तथा क्षेत्र में कथित अवैध गतिविधियों की शिकायत की थी। आवेदन के साथ मोहल्ले के कई लोगों के हस्ताक्षरयुक्त समर्थन पत्र भी सौंपा गया था। लेकिन शिकायत दर्ज होने के 24 दिन बाद भी शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्हें किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है।
क्या है पूरा मामला?-शिकायतकर्ता मुखलाल विश्वकर्मा के अनुसार उनके पड़ोसी रामलाल केसरवानी द्वारा उनके मकान से लगी भूमि के समीप मिट्टी डालकर कथित रूप से अवैध कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है, उनका आरोप है कि लगातार मिट्टी डाले जाने से उनके मकान की दीवार पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे दीवार गिरने की आशंका बनी हुई है,यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, शिकायतकर्ता का कहना है कि यह केवल भूमि विवाद नहीं,बल्कि उनके परिवार की सुरक्षा का भी मामला है।
मारपीट और धमकी के भी लगाए आरोप-जनदर्शन में दिए गए आवेदन में शिकायतकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि इस विवाद के दौरान उनके साथ कथित रूप से धमकी,विवाद और मारपीट जैसी घटनाएं भी हुई हैं,उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
कथित अवैध गतिविधियों की जांच की भी मांग-आवेदन में क्षेत्र में शराब एवं गांजा बेचने जैसी कथित अवैध गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है, शिकायतकर्ता ने इन गतिविधियों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है, इनकी सत्यता केवल अधिकृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मोहल्लेवासियों ने भी दिया समर्थन-शिकायतकर्ता का दावा है कि यह केवल उनका व्यक्तिगत विवाद नहीं है, उन्होंने आवेदन के साथ मोहल्ले के कई लोगों के हस्ताक्षर भी प्रशासन को सौंपे थे, जिससे यह दर्शाया जा सके कि स्थानीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर चिंता है, इसके बावजूद यदि जांच आगे नहीं बढ़ी है, तो इससे स्थानीय लोगों में भी असंतोष दिखाई दे रहा है।
जनदर्शन की विश्वसनीयता पर भी सवाल-जनदर्शन व्यवस्था का उद्देश्य लोगों की शिकायतों का शीघ्र समाधान करना है,स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जनदर्शन में दर्ज शिकायतें भी कई सप्ताह तक लंबित रहती हैं और शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी नहीं मिलती,तो लोगों का प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों की मांग- क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि पूरे मामले का तत्काल मौके पर निरीक्षण कराया जाए, आवश्यक होने पर राजस्व विभाग से सीमांकन कराया जाए,शिकायतकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए,कथित अवैध गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर निगाह
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा में है, अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कलेक्टर जनदर्शन में दर्ज इस शिकायत पर संबंधित विभाग कब तक कार्रवाई करते हैं और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच किस निष्कर्ष तक पहुंचती है।
24 दिन बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में दर्ज होकर संबंधित विभागों को भेजी गई थी, तो अब तक क्या राजस्व विभाग ने मौके का निरीक्षण किया? क्या भूमि का सीमांकन कराया गया? क्या नगर पंचायत अथवा संबंधित विभाग ने अवैध निर्माण की जांच की? क्या पुलिस ने शिकायतकर्ता की सुरक्षा को लेकर कोई कदम उठाया? क्या शिकायत पर कोई जांच रिपोर्ट तैयार हुई? यदि कार्रवाई हुई है तो उसकी जानकारी शिकायतकर्ता को क्यों नहीं दी गई?
यदि शिकायत सही है तो देरी गंभीर हो सकती है-
यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं, तो समय पर कार्रवाई नहीं होना भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है, वहीं यदि जांच में आरोप निराधार साबित होते हैं,तो प्रशासन को भी स्पष्ट रूप से अपनी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए,ताकि अनावश्यक विवाद समाप्त हो सके।


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