- 46 मिनट की प्रेस वार्ता में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने गिनाईं उपलब्धियां,कहा—स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार का लक्ष्य
- मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान से लेकर अस्पतालों के विस्तार,डॉक्टरों की भर्ती मातृ-शिशु सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा तक विभागीय कार्यों का रखा विस्तृत ब्यौरा
- विशेष श्रृंखला भाग-1 ढाई साल का स्वास्थ्य रिपोर्ट कार्डः ‘स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं’
न्यूज डेस्क
रायपुर,01 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण,चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने लगभग ढाई वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा राजधानी रायपुर में आयोजित लगभग 46 मिनट की प्रेस वार्ता में रखा,प्रेस वार्ता में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए कार्यों, नई योजनाओं,अधोसंरचना के विस्तार,भर्ती, चिकित्सा शिक्षा,खाद्य सुरक्षा तथा बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर आंकड़ों सहित जानकारी दी,प्रेस वार्ता में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, स्वास्थ्य आयुक्त संजीव झा,आयुष विभाग के संचालक डॉ. राजेंद्र कटारा,सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक उज्ज्वल पुरवार सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
मीडिया का जताया आभार-अपने संबोधन की शुरुआत में मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मीडिया का स्वागत करते हुए कहा कि लोकतंत्र में मीडिया जनता और सरकार के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है, उन्होंने कहा कि कई ऐसे दुर्गम क्षेत्र हैं जहां प्रशासनिक अधिकारी भी नियमित रूप से नहीं पहुंच पाते, लेकिन मीडिया वहां तक पहुंचकर वास्तविक स्थिति सामने लाता है,उन्होंने सभी मीडिया संस्थानों का स्वागत करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग के कार्यों को जनता तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
13 अप्रैल से शुरू हुआ अभियान- मंत्री ने बताया कि इस अभियान का शुभारंभ 13 अप्रैल को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में किया गया,अभियान की शुरुआत एक साथ लगभग 1100 स्थानों से की गई, इस पूरे अभियान में लगभग 1300 स्वास्थ्य टीमों को लगाया गया,इन टीमों में शामिल थे—चिकित्सक,स्टाफ नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सचिव, जनप्रतिनिधि, स्थानीय प्रशासन।
34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच- मंत्री ने बताया कि अभियान का लक्ष्य लगभग 36 लाख आबादी तक पहुंचना था,हालांकि इनमें से कुछ लोग बाहर रोजगार के लिए चले गए थे तथा कुछ लोगों की मृत्यु हो चुकी थी,जिसके कारण वास्तविक लक्ष्य में अंतर आया, इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने लगभग 34 लाख 29 हजार लोगों की स्क्रीनिंग कर लक्ष्य का लगभग शत-प्रतिशत हासिल कर लिया, उन्होंने कहा कि यह केवल सरकारी उपलब्धि नहीं बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र की जनता की सफलता है।
10,938 हाई रिस्क गर्भवतियों की पहचान- प्रेस वार्ता का एक महत्वपूर्ण बिंदु मातृ स्वास्थ्य रहा, मंत्री ने बताया कि अभियान के दौरान 10,938 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की पहचान की गई,ऐसी महिलाओं की नियमित निगरानी शुरू की गई,विशेषज्ञ चिकित्सकों से जांच कराई गई,सुरक्षित संस्थागत प्रसव की व्यवस्था की गई, उन्होंने कहा कि मातृ मृत्यु दर कम करने में यह अभियान महत्वपूर्ण साबित होगा।
अभियान का दूसरा चरण शुरू-मंत्री ने बताया कि पहले चरण में केवल पहचान और स्क्रीनिंग का कार्य किया गया, अब दूसरा चरण चल रहा है,इसमें चिन्हित मरीजों का उपचार, विशेषज्ञ परामर्श, रेफरल, फॉलोअप किया जा रहा है,यह चरण 31 अगस्त तक चलेगा।
स्वास्थ्य कर्मियों को दिया श्रेय- मंत्री ने विशेष रूप से स्वास्थ्य विभाग के सभी कर्मचारियों की सराहना की, उन्होंने कहा कि यदि मितानिन, नर्स, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सचिव और स्थानीय जनप्रतिनिधि सहयोग नहीं करते तो इतना बड़ा अभियान सफल नहीं हो सकता था, उन्होंने अभियान से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
स्वस्थ बस्तर अभियान मेरे जीवन का सबसे भावनात्मक अभियान
प्रेस वार्ता के दौरान स्वास्थ्य मंत्री कई बार भावुक भी नजर आए…उन्होंने कहा कि जब भी मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की चर्चा होती है तो उनके मन में विशेष भावनाएं उमड़ पड़ती हैं, उन्होंने कहा—ऐसा लगता है कि पिछले जन्म में मैंने कोई बहुत बड़ा पुण्य किया होगा कि मुझे स्वास्थ्य जैसा विभाग मिला और वह भी छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में,जहां बस्तर जैसा विशाल और वर्षों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित क्षेत्र है,उन्होंने कहा कि बस्तर में ऐसे अनेक गांव हैं जहां दशकों तक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंच सकीं,कई गांव ऐसे रहे जहां लोगों ने न कभी डॉक्टर देखा, न नर्स और न ही आधुनिक दवाइयों की सुविधा प्राप्त की।
नक्सलवाद के कारण वर्षों तक स्वास्थ्य सेवाओं से दूर रहे गांव
मंत्री ने बताया कि नक्सलवाद के कारण अनेक गांव सड़क,बिजली और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रह गए,उन्होंने कहा कि कई गांवों तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था,अनेक क्षेत्रों में सड़क तक नहीं थी,स्वास्थ्य कर्मियों के लिए वहां पहुंचना जोखिम भरा था,गर्भवती महिलाओं,बच्चों और बुजुर्गों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता था,ऐसी परिस्थितियों में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान शुरू किया गया।
घर-घर पहुंची स्वास्थ्य टीम
मंत्री ने बताया कि अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव और घर-घर पहुंचीं,प्रत्येक व्यक्ति की प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की गई,जांच में शामिल थे रक्तचाप (बीपी),ब्लड शुगर, सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण,बुखार की जांच,आवश्यक दवाइयों का वितरण जहां मामूली बीमारी मिली,वहीं उपचार उपलब्ध कराया गया।
गंभीर मरीजों के लिए बनाया रेफरल सिस्टम
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अभियान केवल जांच तक सीमित नहीं रहा,यदि किसी मरीज की स्थिति गंभीर पाई गई तो उसे पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र,फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र,आवश्यकता पड़ने पर जिला अस्पताल,और जरूरत होने पर रायपुर के बड़े अस्पतालों तक भेजा गया,उन्होंने कहा कि पहली बार बस्तर के दूरस्थ गांवों के लोगों को व्यवस्थित रेफरल प्रणाली का लाभ मिला।
6000 से अधिक गंभीर मरीजों को
उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजा गया…
मंत्री ने बताया कि अभियान के दौरान लगभग 6000 ऐसे मरीज मिले जिन्हें उच्च स्तरीय चिकित्सा की आवश्यकता थी, इन सभी मरीजों को चरणबद्ध तरीके से विशेषज्ञ अस्पतालों में भेजा गया, कुछ मरीजों का उपचार अभी भी जारी है।
बस्तर में स्वास्थ्य
सेवा का नया अध्याय
मंत्री ने कहा कि वर्षों तक नक्सल प्रभावित रहा बस्तर अब विकास और स्वास्थ्य सेवाओं के नए दौर में प्रवेश कर रहा है, उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य केवल इलाज करना नहीं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति तक समय पर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है,उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में बस्तर में और अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक,आधुनिक उपकरण और नई स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
अगले भाग (भाग-2) में पढि़ए…
– ढाई वर्षों में स्वास्थ्य अधोसंरचना का विस्तार
– 11 उप स्वास्थ्य केंद्र,43 पीएचसी, नए अस्पतालों की स्थापना
– 1000 नए डॉक्टरों की भर्ती
– 3000 से अधिक नर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ
– मातृ मृत्यु दर में सुधार
– 450 करोड़ की प्रोत्साहन राशि
– मलेरिया नियंत्रण की रणनीति
– टीबी मुक्त पंचायतों की सफलता
– और कई अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं।
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