- राजपत्र में अधिसूचना जारी…अब नकली दूध जैसे उत्पादों के निर्माण से लेकर बिक्री तक पर रोक…
- स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की पहल, उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम…
- स्वास्थ्य के साथ समझौता नहीं : छत्तीसगढ़ में भ्रामक डेयरी एनालॉग उत्पादों पर बड़ा प्रहार…
- राज्य सरकार ने लागू किया प्रतिबंध,अब नकली ‘दूध जैसे’ उत्पादों की बिक्री पर सख्ती…
- कैबिनेट मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की पहल… उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय
-रवि सिंह-
रायपुर/एमसीबी,01 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है,राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में ऐसे डेयरी एनालॉग अथवा गैर-दुग्ध किंतु दुग्ध उत्पादों के समान दिखने वाले खाद्य पदार्थों के निर्माण,प्रसंस्करण,भंडारण,परिवहन, वितरण एवं विक्रय पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है,जो वास्तविक दुग्ध उत्पाद नहीं हैं,लेकिन अपनी पैकेजिंग, लेबलिंग अथवा प्रस्तुति के माध्यम से उपभोक्ताओं को भ्रमित करते हैं। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी 31 जुलाई 2026 के छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में इस संबंध में अधिसूचना प्रकाशित की गई है,आदेश के अनुसार यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(क) एवं धारा 18 के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए की गई है, यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब बाजार में दूध,पनीर,घी, मक्खन,क्रीम और अन्य डेयरी उत्पादों के नाम पर बड़ी संख्या में ऐसे उत्पाद बेचे जा रहे हैं, जिनमें दूध के स्थान पर वनस्पति वसा, वनस्पति तेल अथवा अन्य गैर-दुग्ध अवयवों का उपयोग किया जाता है,ऐसे उत्पाद कई बार अपनी पैकेजिंग और प्रस्तुति से उपभोक्ताओं को भ्रमित कर देते हैं।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने पहले ही दिए थे सख्त संकेत
राज्य के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा,पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास तथा 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने पूर्व में ही स्पष्ट कर दिया था कि जनता के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा, उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदेशवासियों को सुरक्षित, शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है। इसी दिशा में अब सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है,मनेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्री श्री जायसवाल लगातार खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय प्रदेश में खाद्य गुणवत्ता नियंत्रण को नई दिशा देगा।
किन उत्पादों को प्रतिबंध से बाहर रखा गया है?
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ उत्पाद इस प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएंगे, क्योंकि उनके लिए अलग खाद्य मानक निर्धारित हैं,इनमें शामिल हैं फ्रोजन डेजर्ट,प्रोसेस्ड चीज, मिक्स्ड फैट स्प्रेड बशर्ते वे भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के निर्धारित मानकों का पालन करते हों और उनकी लेबलिंग पूरी तरह स्पष्ट एवं नियमानुसार हो।
स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ पर सरकार की सख्ती
विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार उपभोक्ता आकर्षक पैकेजिंग और नाम देखकर ऐसे उत्पाद खरीद लेते हैं, जिन्हें वे दूध या दुग्ध उत्पाद समझते हैं,जबकि वास्तविकता में उनमें दूध की मात्रा नगण्य होती है अथवा बिल्कुल नहीं होती,ऐसे उत्पाद बच्चों के पोषण को प्रभावित कर सकते हैं,बुजुर्गों और मरीजों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं, उपभोक्ताओं के साथ आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी धोखा साबित हो सकते हैं,इसी खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने यह प्रतिबंध लागू किया है।
खाद्य सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत-राज्य सरकार ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को निर्देश दिए हैं कि पूरे प्रदेश में इस आदेश का कड़ाई से पालन कराया जाए,अब संबंधित अधिकारी निर्माण इकाइयों की जांच करेंगे,गोदामों का निरीक्षण करेंगे, परिवहन और वितरण व्यवस्था पर नजर रखेंगे,बाजार में बिक रहे संदिग्ध उत्पादों के नमूने लेकर परीक्षण करेंगे, नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई करेंगे।
खाद्य सुरक्षा कानून के तहत उठाया गया कदम-सरकार ने यह निर्णय खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम,2006 के तहत लिया है, अधिसूचना में कहा गया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से ऐसे उत्पादों का नियंत्रण आवश्यक है जो अपनी प्रस्तुति के माध्यम से उपभोक्ताओं को भ्रमित करते हैं, राजपत्र के अनुसार यह प्रतिबंध अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से प्रभावी हो गया है और यह एक वर्ष अथवा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा इस विषय पर अंतिम मानक अधिसूचित किए जाने अथवा राज्य सरकार द्वारा आदेश में संशोधन/निरस्तीकरण किए जाने तक प्रभावी रहेगा।
प्रदेश में खाद्य सुरक्षा को मिलेगा नया आधार-खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं बल्कि उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है,इससे बाजार में नकली और भ्रामक डेयरी उत्पादों पर प्रभावी अंकुश लगेगा तथा लोगों को शुद्ध और मानक आधारित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
क्या हैं डेयरी एनालॉग उत्पाद?
डेयरी एनालॉग ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो देखने,पैकिंग और नाम से दूध,पनीर,घी,मक्खन या अन्य दुग्ध उत्पादों जैसे प्रतीत होते हैं,लेकिन वास्तव में इनमें दूध की जगह वनस्पति वसा,वनस्पति तेल या अन्य गैर-दुग्ध अवयवों का उपयोग किया जाता है,ऐसे उत्पाद यदि स्पष्ट रूप से अपनी वास्तविक पहचान नहीं बताते और उपभोक्ता को भ्रमित करते हैं तो यह खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन जाते हैं।
किन उत्पादों पर रहेगा प्रतिबंध?
राजपत्र में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध विशेष रूप से उन उत्पादों पर लागू होगा जो वास्तविक दुग्ध उत्पाद नहीं हैं,जिनमें दूध के स्थान पर वनस्पति वसा, वनस्पति तेल अथवा अन्य गैर-दुग्ध अवयवों का उपयोग किया गया है,जिनकी पैकेजिंग,लेबलिंग अथवा प्रस्तुति उपभोक्ता को यह विश्वास दिलाती है कि वह वास्तविक दुग्ध उत्पाद खरीद रहा है,ऐसे उत्पाद जिनकी बिक्री भ्रामक तरीके से की जाती है,हालांकि फ्रोजन डेजर्ट,प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे वे उत्पाद, जो नियमानुसार निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं और जिनकी सही लेबलिंग की गई है,इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रहेंगे।
अमानक पनीर पर विशेष फोकस
हाल के वर्षों में बाजार में बड़ी मात्रा में ऐसा पनीर उपलब्ध होने की शिकायतें सामने आती रही हैं जिसमें दूध के बजाय वनस्पति वसा अथवा अन्य सस्ते विकल्पों का उपयोग किया जाता है,ऐसे पनीर—पोषण की दृष्टि से कमजोर हो सकते हैं, उपभोक्ताओं के साथ धोखा साबित हो सकते हैं,बच्चों एवं मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं,इसी कारण सरकार ने विशेष रूप से अमानकीकृत पनीर जैसे उत्पादों पर सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया है।
खाद्य कारोबारियों को सख्त चेतावनी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अधिसूचना लागू होने के बाद किसी भी निर्माता,थोक व्यापारी,वितरक या विक्रेता द्वारा प्रतिबंधित उत्पादों का कारोबार पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी,खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को पूरे प्रदेश में विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं,निरीक्षण के दौरान—निर्माण इकाइयों की जांच होगी,गोदामों का निरीक्षण होगा,बाजार से नमूने लिए जाएंगे,प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता परीक्षण कराया जाएगा,दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जनस्वास्थ्य सर्वोपरि
छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है,आज जब बाजार में आकर्षक पैकेजिंग के माध्यम से उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले उत्पादों की संख्या बढ़ रही है,ऐसे समय में यह कदम लोगों को सुरक्षित,शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है,यदि इस आदेश का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन होता है तो निश्चित रूप से प्रदेश में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी तथा उपभोक्ताओं का भरोसा भी बढ़ेगा।
मुख्य बिंदु (हाइलाइट्स)
पूरे छत्तीसगढ़ में भ्रामक डेयरी एनालॉग उत्पादों पर तत्काल प्रतिबंध।
अमानक पनीर,क्रीम,मक्खन जैसे उत्पाद सरकार के रडार पर।
दूध की जगह वनस्पति वसा का उपयोग कर भ्रम पैदा करने वाले उत्पादों पर सख्ती।
ठ्ठनिर्माण,भंडारण,परिवहन,वितरण और बिक्री—सभी पर रोक।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन करेगा विशेष जांच अभियान।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की पहल को जनस्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उद्देश्य—प्रदेशवासियों को सुरक्षित, शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना तथा उपभोक्ताओं को भ्रामक खाद्य उत्पादों से संरक्षण देना।
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