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रायपुर@सहायक मत्स्य अधिकारी भर्ती परीक्षा 2025 का परिणाम हाईकोर्ट ने किया रद्द,दोबारा होगी प्रक्रिया

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रायपुर,31 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य की सहायक मत्स्य अधिकारी भर्ती परीक्षा 2025 की पूरी चयन प्रक्रिया और घोषित परीक्षा परिणाम को निरस्त कर दिया है। 31 जुलाई 2026 को सामने आए इस अहम फैसले में अदालत ने विभागीय लापरवाही, नियमों के उल्लंघन और पूर्व आदेशों की अनदेखी को आधार माना है।
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने उम्मीदवारों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन को निर्देश दिया है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया अब निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दोबारा आयोजित की जाए। इस फैसले से गलत प्रक्रिया का शिकार हुए पात्र अभ्यर्थियों को न्याय मिलने की नई उम्मीद जगी है। हाईकोर्ट में प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, विभाग ने भर्ती प्रक्रियाओं के संचालन में वैधानिक नियमों को दरकिनार किया था। मत्स्य सेवा भर्ती नियम 2009 के तहत चयन समिति में अधिकतम तीन सदस्यों का प्रावधान निर्धारित है। इसके विपरीत विभाग ने नियमों से परे जाकर पांच सदस्यीय समिति का गठन किया और साक्षात्कार आयोजित किए। सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए टिप्पणी की कि जब कानून में किसी प्रक्रिया को पूरा करने का तरीका स्पष्ट रूप से तय हो, तो उसका अक्षरशः पालन अनिवार्य होता है। निर्धारित नियमों से बाहर जाकर बनाई गई समिति द्वारा किया गया चयन पूरी प्रक्रिया को अवैध और शून्य बना देता है। इस विवाद की जड़ें वर्ष 2014 की पुरानी भर्ती से जुड़ी हुई हैं, जब सहायक मत्स्य अधिकारी के 8 पदों पर विज्ञापन जारी हुआ था।
उस समय उम्मीदवारों ने आरोप लगाया था कि सभी अर्हताएं पूरी करने के बावजूद उन्हें अनुचित तरीके से अपात्र करार दिया गया। यह मामला जब डिवीजन बेंच के समक्ष पहुंचा, तब अदालत ने राज्य सरकार को सभी आवेदकों के दस्तावेजों का समान रूप से पुनर्मूल्यांकन करने का आदेश दिया था। हालांकि, विभाग ने सभी आवेदनों की निष्पक्ष जांच करने के स्थान पर केवल प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) के एक अभ्यर्थी से तुलना कर औपचारिकता पूरी कर ली, जिसे अदालत ने अपने आदेश का स्पष्ट उल्लंघन माना।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि डिवीजन बेंच का स्पष्ट उद्देश्य सभी अभ्यर्थियों का पारदर्शी तुलनात्मक मूल्यांकन करना था। किसी एक उम्मीदवार से तुलना करके प्रक्रिया समाप्त कर देना अदालती निर्देशों का पालन नहीं है। इन सभी गंभीर अनियमितताओं को संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2025 को जारी चयन परिणाम और 19 मई 2025 को प्रकाशित चयन सूची को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। अदालत के इस सख्त रुख ने शासकीय विभागों को यह संदेश दिया है कि भर्ती प्रक्रियाओं में प्रशासनिक मनमानी स्वीकार नहीं होगी।
अभ्यर्थियों पर प्रभाव
अदालत के इस फैसले का सीधा असर सैकड़ों प्रभावित अभ्यर्थियों और राज्य के प्रशासनिक तंत्र पर पड़ेगा। वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे पात्र उम्मीदवारों के लिए यह निर्णय बड़ी राहत लेकर आया है। वहीं दूसरी ओर, चयन सूची निरस्त होने से उन अभ्यर्थियों की नियुक्ति अटक गई है जिनका नाम सूची में शामिल था। विभागीय स्तर पर अब नए सिरे से चयन समिति का गठन करना होगा और नियमानुसार साक्षात्कार की तारीखें घोषित करनी होंगी, जिससे भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में कुछ और समय लग सकता है। हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले ने राज्य में सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों के बीच एक मजबूत मानक स्थापित किया है। मत्स्य विभाग को अब वर्ष 2009 के नियमों के तहत तीन सदस्यीय समिति बनाकर पूरी प्रक्रिया नए सिरे से संचालित करनी होगी।


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