- दस्तावेजों पर आधारित खबर से घबराहट क्यों? लीगल नोटिस ने खाद्य विभाग की नियुक्तियों पर बढ़ाए सवाल
- खबर रोकने की कोशिश या सच्चाई से बचने की कवायद?
- लीगल नोटिस के बाद जांच की मांग तेज
- जब खबर में कई नाम थे,तो नोटिस केवल
- दो की ओर से ही क्यों? उठे नए सवाल
- जनहित के सवालों पर लीगल नोटिस,अब जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
- लीगल नोटिस से नहीं रुकेगी खोजी पत्रकारिता,
- अब नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच बनेगी असली कसौटी
- दस्तावेजों, भर्ती नियमों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार
- पर प्रकाशित खोजी खबर को बताया गया मानहानिकारक
- दैनिक घटती-घटना बोला—सच्चाई सामने लाने के लिए जांच ही सबसे बड़ा जवाब
- जब खबर में कई अधिकारियों के नाम थे,तब नोटिस केवल दो अधिकारियों की ओर से ही क्यों? क्या विभाग निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएगा?


-न्यूज डेस्क-
अंबिकापुर/रायपुर,30 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में नियुक्तियों,पदोन्नतियों और शैक्षणिक योग्यताओं को लेकर दैनिक घटती-घटना द्वारा प्रकाशित खोजी समाचारों के बाद दो अधिकारियों की ओर से अधिवक्ता के माध्यम से ?50 लाख की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा गया है, नोटिस में समाचारों को हटाने,सार्वजनिक माफी प्रकाशित करने,क्षतिपूर्ति देने और भविष्य में ऐसे समाचार प्रकाशित नहीं करने की मांग की गई है, दैनिक घटती-घटना इस कानूनी नोटिस का विधिसम्मत उत्तर देगा और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय में भी उपलब्ध दस्तावेजों, भर्ती नियमों, राजपत्रों, न्यायालयीन अभिलेखों तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखेगा, लेकिन इस पूरे प्रकरण ने अब एक नया और बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या जनहित से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर सवाल उठाना मानहानि है, या फिर उन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से दिया जाना चाहिए?
खबर किसी व्यक्ति विशेष के
खिलाफ नहीं,पूरी व्यवस्था पर थी…
दैनिक घटती-घटना द्वारा प्रकाशित समाचार किसी व्यक्ति विशेष को अपराधी घोषित करने या उसकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से प्रकाशित नहीं किए गए थे,समाचारों का आधार था विभागीय दस्तावेज,भर्ती नियम, राजपत्र,न्यायालयीन अभिलेख,शैक्षणिक योग्यताओं से संबंधित उपलब्ध जानकारी,तथा जनहित से जुड़े तथ्य,समाचारों में यह प्रश्न उठाया गया था कि क्या खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में हुई नियुक्तियां और पदोन्नतियां वास्तव में उन नियमों के अनुरूप थीं, जिनके पालन की अपेक्षा शासन स्वयं अपने विभागों से करता है,यदि विभाग की पूरी प्रक्रिया वैधानिक है तो निष्पक्ष जांच स्वयं इसकी पुष्टि कर देगी।
शैक्षणिक योग्यताओं को लेकर उठे प्रश्नों का जवाब जांच से मिलना चाहिए- प्रकाशित समाचारों में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर कुछ अधिकारियों की शैक्षणिक योग्यताओं को लेकर भी प्रश्न उठाए गए थे, इन्हीं में एक नाम सर्वेश यादव का है, जिनकी शैक्षणिक योग्यता Vinayaka Missions University, Salem (Distance Education) से प्राप्त M.Sc. बताई गई, इसी प्रकार सिद्धार्थ पांडे की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी समाचार में दस्तावेजों के आधार पर प्रश्न उठाए गए थे,समाचार का उद्देश्य किसी डिग्री को स्वतः अमान्य घोषित करना नहीं था, बल्कि यह जानना था कि संबंधित समय में लागू भर्ती नियमों,FSSAI के प्रावधानों और विभागीय प्रक्रिया के अनुसार इन योग्यताओं की विधिक स्थिति क्या थी।
यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है,तो जांच से परहेज क्यों?-यदि विभाग यह दावा करता है कि सभी नियुक्तियां वैध हैं, सभी पदोन्नतियां नियमों के अनुरूप हुई हैं, सभी अधिकारियों की शैक्षणिक योग्यताएं विधिसम्मत हैं,तो फिर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए,जांच होने से यदि सभी तथ्य सही पाए जाते हैं तो इससे संबंधित अधिकारियों की स्थिति और मजबूत होगी,वहीं यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
पत्रकारिता का दायित्व सवाल पूछना है,न्यायालय का दायित्व निर्णय देना– दैनिक घटती-घटना यह स्पष्ट करना चाहता है कि समाचार प्रकाशित करना और दस्तावेजों के आधार पर प्रश्न उठाना पत्रकारिता का संवैधानिक दायित्व है, किसी नियुक्ति, पदोन्नति या शैक्षणिक योग्यता की अंतिम वैधता तय करना न्यायालय अथवा सक्षम प्राधिकारी का कार्य है, पत्रकारिता का कार्य केवल इतना है कि यदि किसी व्यवस्था में प्रश्न उठते हैं तो उन्हें जनता और शासन के सामने रखा जाए।
सवाल नियुक्ति प्रक्रिया पर थे,किसी
व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया गया था…
प्रकाशित समाचारों में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि कोई अधिकारी अपराधी है या उसके विरुद्ध कोई दोष सिद्ध हो चुका है, समाचारों में केवल यह पूछा गया कि क्या भर्ती नियमों का पालन हुआ? क्या निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं का परीक्षण किया गया? क्या सभी अभ्यर्थियों के साथ समान व्यवहार हुआ? क्या पदोन्नतियां नियमों के अनुरूप हुईं? लोकतंत्र में ऐसे प्रश्न पूछना पत्रकारिता का दायित्व है।
जब खबर में कई अधिकारियों के नाम थे,तब
नोटिस केवल दो अधिकारियों की ओर से ही क्यों?
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि प्रकाशित समाचारों में केवल सर्वेश यादव और सिद्धार्थ पांडे का ही उल्लेख नहीं था, समाचारों में विभाग से जुड़े अनेक अधिकारियों,नियुक्तियों और पदोन्नतियों का उल्लेख किया गया था,फिर केवल दो अधिकारियों की ओर से ही कानूनी नोटिस भेजा जाना कई नए प्रश्न खड़े करता है,क्या केवल इन्हीं दो अधिकारियों को समाचार से आपत्ति हुई? क्या इन्हीं की नियुक्ति और पदोन्नति को लेकर सबसे अधिक विवाद है? या फिर समाचारों में उठाए गए प्रश्नों का उत्तर देने के बजाय उन्हें कानूनी नोटिस के माध्यम से रोकने का प्रयास किया जा रहा है? इन प्रश्नों का उत्तर अब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।
हाईकोर्ट के निर्णय ने भी उठाए थे Vinayaka Missions University के Distance Education पर सवाल- दैनिक घटती-घटना के पास उपलब्ध छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के निर्णय में Vinayaka Missions University से संचालित Distance Education कार्यक्रमों और उनके अध्ययन केंद्रों को लेकर गंभीर कानूनी प्रश्नों का उल्लेख किया गया है, न्यायालय ने उस मामले में GC एवं Distance Education संबंधी नियमों के अनुपालन की आवश्यकता पर विस्तार से विचार किया था, यही कारण था कि समाचार में यह प्रश्न भी उठाया गया कि यदि किसी विश्वविद्यालय की Distance Education प्रणाली पहले न्यायिक जांच के दायरे में रही है, तो उससे प्राप्त शैक्षणिक योग्यताओं के आधार पर हुई नियुक्तियों की वैधानिक स्थिति की भी जांच होनी चाहिए।
भर्ती नियम भी स्पष्ट हैं- राज्य सरकार द्वारा जारी भर्ती नियमों में Food Safety Officer के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं का स्पष्ट उल्लेख किया गया है,इनमें स्नशशस्रFood Technology, Dairy Technology, Biotechnology, Agricultural Sciences,Veterinary Sciences,Biochemistry,Microbiology, Chemistry तथा Medicine सहित निर्धारित योग्यताओं का प्रावधान है तथा स्नस्स््रढ्ढ द्वारा मान्य समकक्ष योग्यता का भी उल्लेख किया गया है, दैनिक घटती-घटना ने इन्हीं नियमों तथा उपलब्ध दस्तावेजों का अध्ययन कर प्रश्न उठाए थे।
लीगल नोटिस से नहीं
रुकेगी खोजी पत्रकारिता
दैनिक घटती-घटना पिछले दो दशकों से अधिक समय से जनहित से जुड़े विषयों पर खोजी पत्रकारिता कर रहा है, इस दौरान अनेक प्रभावशाली लोगों और संस्थाओं की ओर से कानूनी नोटिस भी प्राप्त हुए, लेकिन अनेक मामलों में बाद की जांचों और कार्रवाई में वही तथ्य सामने आए जिनकी ओर हमारे समाचारों ने पहले संकेत किया था,हम कानून का सम्मान करते हैं, न्यायपालिका का सम्मान करते हैं और इस नोटिस का भी विधिसम्मत उत्तर देंगे, लेकिन हम यह भी मानते हैं कि दस्तावेजों के आधार पर उठाए गए जनहित के प्रश्नों का उत्तर कानूनी नोटिस नहीं,बल्कि निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, यदि विभाग और शासन को अपने निर्णयों पर विश्वास है, तो पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराकर जनता के सामने सत्य रखा जाना चाहिए।
दैनिक घटती-घटना
का संकल्प स्पष्ट है…
न तो किसी व्यक्ति के प्रति दुर्भावना, न किसी के प्रति पूर्वाग्रह; हमारा दायित्व केवल जनहित, पारदर्शिता और व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने वाले प्रश्नों को समाज के सामने रखना है। सत्य जो भी होगा, वही जनता के सामने आए, यही हमारी पत्रकारिता का उद्देश्य है।
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