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अम्बिकापुर@अंबिकापुर में रिंग बांध तालाब पर अवैध कब्जे का खुलासा

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फर्जी दस्तावेजों से नामांतरण का आरोप,एफआईआर की मांग


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,26 अपै्रल 2026 (घटती-घटना)। नगर निगम क्षेत्र के रिंग रोड स्थित प्रसिद्ध रिंग बांध तालाब को पाटकर कब्जा किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जल भराव क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी के आरोपों के बीच भाजपा नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर खुलासे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आजाद इराकी द्वारा स्वयं को भूमि स्वामी बताते हुए तालाब की जमीन को पाट दिया गया और कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण करा लिया गया। मिश्रा ने कलेक्टर सरगुजा से पूरे मामले की जांच कर एफआईआर दर्ज करने, नामांतरण निरस्त करने और तालाब को मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग की है।
6.25 एकड़ से सिमटकर 57 डिसमिल रह गया तालाब : कैलाश मिश्रा के अनुसार,मूल रूप से करीब 6.25 एकड़ निस्तार भूमि वाले रिंग बांध तालाब का क्षेत्रफल घटकर अब मात्र 57 डिसमिल रह गया है। आरोप है कि जनवरी 2026 में बची हुई भूमि की भी रजिस्ट्री कर दी गई और रातोंरात बड़े हिस्से को मिट्टी डालकर पाट दिया गया। इससे तालाब की जल संरक्षण क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो भविष्य में शहर में जल संकट और जलभराव दोनों की समस्या बढ़ सकती है।
खसरा नंबर 3714 पर उठे सवाल : प्रेस वार्ता में श्री मिश्रा ने खसरा नंबर 3714 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि रिंग बांध तालाब क्षेत्र का हिस्सा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो भूमि पहले कृष्ण बहादुर सिंह वल्द राम सिंह के नाम पर दर्ज थी,वह वर्ष 1982-83 में अचानक जयलाल के नाम पर कैसे दर्ज हो गई? उन्होंने आरोप लगाया कि इस परिवर्तन की कभी गंभीर जांच नहीं हुई।
एक व्यक्ति की दो मौत? फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र का आरोप :मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्रों को लेकर सामने आया है। मिश्रा के अनुसार, पहले एक नामांतरण प्रकरण में जयलाल का मृत्यु प्रमाण-पत्र लगाया गया, जिसमें मृत्यु तिथि 23 अप्रैल 1976, स्थान होली क्रॉस हॉस्पिटल अंबिकापुर दर्ज है, जबकि प्रमाण-पत्र का पंजीकरण 24 फरवरी 2018 को हुआ। बाद में दूसरे नामांतरण प्रकरण में फिर जयलाल पिता बोधन का नया मृत्यु प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें मृत्यु तिथि 12 अप्रैल 1963, स्थान अमलभित्ति, लखनपुर बताया गया। यह प्रमाण-पत्र 1 सितंबर 2025 को जारी किया गया।
श्री मिश्रा ने सवाल उठाया—
‘एक ही व्यक्ति की मौत दो अलग-अलग तारीखों और दो अलग-अलग स्थानों पर कैसे हो सकती है? ‘
उन्होंने इसे फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का स्पष्ट मामला बताया।
आजाद इराकी के पक्ष में नामांतरण निरस्त करने की मांग : भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि इन संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर भूमि का नामांतरण कर आजाद इराकी के पक्ष में रिकॉर्ड दर्ज किया गया। उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से उक्त नामांतरण निरस्त करने की मांग की है।
शहर के जल संसाधनों पर संकट : रिंग बांध तालाब लंबे समय से अंबिकापुर का प्रमुख जल भराव क्षेत्र माना जाता रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि तालाबों और निस्तार भूमि पर इसी तरह कब्जा होता रहा तो शहर में पर्यावरणीय असंतुलन, भूजल संकट और बाढ़ जैसी समस्याएं बढ़ेंगी।
अब प्रशासन पर नजर : मामले के सार्वजनिक होने के बाद अब शहरवासियों की नजर जिला प्रशासन पर टिक गई है। सवाल यह है कि—
– क्या फर्जी दस्तावेजों की जांच होगी?
– क्या नामांतरण निरस्त होगा?
– क्या तालाब को फिर से जीवित किया जाएगा?
– क्या दोषियों पर एफआईआर दर्ज होगी?
– अंबिकापुर अब जवाब चाहता है—तालाब बचेगा या कब्जे का खेल जारी रहेगा?


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