रायपुर,10 मार्च 2026। बहुचर्चित कोयला घोटाले मामले में ईओडब्ल्यू ने बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी ने आरोपी राकेश जैन के खिलाफ करीब मंगलवार को 1200 पेज का पूरक चालान पेश किया है। जांच में सामने आया है कि अवैध कोल लेवी से मिली करीब 40 करोड़ रुपए की राशि को शेल कंपनियों और बैंक खातों के जरिए डायवर्ट कर नकद में बदला जाता था। और बाद में इसे नेटवर्क के जरिए घोटाले में शामिल अधिकारियों और नेताओं तक पहुंचाया जाता था। आरोपी राकेश रायपुर के सेंट्रल जेल में बंद है। पूर्व में आरोपी राकेश जैन के खिलाफ रायपुर पुलिस में तीन आपराधिक मामले दर्ज है जिनमें एक प्रकरण मे चालान पेश किया जा चुका है और दो केस में जांच जारी है।
कई फर्मों के खातों में भेजी गई रकम
ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया है कि बड़ी रकम अलग-अलग फर्मों के खातों में ट्रांसफर की गई। इनमें अनवर ढेबर से जुड़ी फर्मों के साथ आर.ए. कॉरपोरेशन, स्टार ट्रेडर्स,महावीर एंटरप्राइजेज,सृष्टि मिनरल्स, मार्श एंटरप्राइजेज, सोमवत्ती सेल्स और आर्या एंटरप्राइजेज शामिल हैं। इन खातों से राशि को चरणबद्ध तरीके से निकालकर अवैध नेटवर्क के माध्यम से सूर्यकांत तिवारी तक पहुंचाया जाता था।
पहले भी कई आरोपियों के खिलाफ चालान : इस मामले में ईओडब्ल्यू पहले भी कई आरोपियों के खिलाफ चालान पेश कर चुकी है। जुलाई 2024 में 15 आरोपियों सौम्या चौरसिया, रानू साहू, समीर विश्नोई, शिवशंकर नाग, सदीप कुमार नायक, सूर्यकांत तिवारी, निखिल चंद्राकर, लक्ष्मीकांत तिवारी, हेमंत जायसवाल, चंद्रप्रकाश जायसवाल, शेख मोइनुद्दीन कुरैशी, पारेख कुर्रे, राहुल सिंह, रोशन कुमार सिंह एवं वीरेन्द्र जायसवाल के खिलाफ ईओडब्ल्यू के द्वारा अवैध कोल लेवी प्रकरण में प्रथम पहला चालान पेश किया गया था। अक्टूबर 2024 में 02 आरोपियों मनीष उपाध्याय एवं रजनीकांत तिवारी, अक्टूबर 2025 में 02 आरोपियों-देवेन्द्र डडसेना एवं नवनीत तिवारी तथा दिसम्बर 2025 में 01 आरोपी-जयचंद कोशले के विरूद्ध पूरक चालान प्रस्तुत किया गया था।
शेल कंपनियों के जरिए ब्लैक मनी को वाइट दिखाने की कोशिश
जांच के दौरान एजेंसी को पता चला कि अवैध कोल लेवी की राशि ज्यादातर नकद में वसूली जाती थी,लेकिन जिन लोगों के पास नकद भुगतान की व्यवस्था नहीं होती थी, उनके लिए सूर्यकांत तिवारी के नेटवर्क ने शेल कंपनियों के जरिए लेन-देन की व्यवस्था कर रखी थी। आरोप है कि राकेश जैन ने कई फर्जी कंपनियों और बैंक खातों का इस्तेमाल कर करीब 40 करोड़ रुपए की रकम को बैंकिंग चैनल के जरिए रूटिंग और लेयरिंग कर नकद में परिवर्तित किया। इस प्रक्रिया में फर्जी बिलिंग, अलग-अलग व्यावसायिक मदों के नाम पर भुगतान और कई खातों में ट्रांसफर कर असली स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई।
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