2181 भ्रष्टाचार के मामले,330 मामलों में एफआईआर दर्ज,पुराने मामले अब तक अधूरे
रायपुर,09 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारियों द्वारा पारदर्शिता और ईमानदारी का दावा किया जाता है, लेकिन विभागों में चोरी,गबन और वित्तीय अनियमितताओं के मामले इन दावों की पोल खोलकर रख देते है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग विभागों में अब तक 2181 ऐसे मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें अरबों रुपए की अनियमितताओं के आरोप अधिकारियों पर हैं। इन मामलों में से 690 मामले तो 25 साल से भी पुराने हैं, जिनका निपटारा आज तक नहीं हो पाया है। आर्थिक अपराधों को दबाने के लिए अधिकारियों ने सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर की,जिससे 70′ से अधिक मामले फाइलों में ही दब गए। कुल मिलाकर 330 मामलों में स्नढ्ढक्र दर्ज हुई,लेकिन ज्यादातर मामलों में प्रशासनिक कमी के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भ्रष्टाचार के मामले विभागवार इस तरह हैंः-
18 विभागों में सरकारी संपत्ति में सेंधमारी और वित्तीय अनियमितताएं-1998 से अधिक मामले। 20 विभागों में चोरी के 119+ मामले। 15 विभागों में गबन के 64+ मामले। पीडब्ल्यूडी, वन विभाग,शिक्षा,स्वास्थ्य और राजस्व जैसे कई विभाग भ्रष्टाचार के बड़े प्रकरणों में शामिल पाए गए हैं। वित्तीय अपराधों और सरकारी संपत्तियों में अनियमितताओं के बढ़ते मामलों पर शासन ने चिंता जताई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों के निस्तारण में तेजी लाएं और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करें। विश्लेषकों का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था में लगे अधिकारी अपने पद का गलत इस्तेमाल कर निजी लाभ उठा रहे हैं। इसका सीधा असर सरकारी सिस्टम और सेवाओं पर पड़ रहा है। इसके बावजूद अब तक कोई वसूली नहीं हुई और जिम्मेदार तय नहीं हो सके हैं।
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