
अंबिकापुर,30 सितम्बर 2024 (घटती-घटना)। पशु पालन विभाग के शूकर फार्म में बीआरआरएस बीमारी जो की वायरस के कारण होती है उसके वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। 9 सितंबर को नेशनल इंस्टिट्यूट एनिमल डिजीस लैब भोपाल की टीम ने वैक्सीन का प्रथम डोज लगाया था और साथ में लड को कलेक्ट कर जांच के लिए भोपाल ले गए थे।
आज पुन: भोपाल की टीम उन सीकरी पआर बूस्टर टीका लगाने के लिए अंबिकापुर आये हैं जो 2 दिनों में पीआरआरएस का बूस्टर टीका लगा कर और लड को पुन: कलेक्ट कर भोपाल ले जाएंगे। शूकर फार्म अंबिकापुर में 51 सीकरो पर इस वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। नेशनल इंस्टिट्यूट एनिमल डिजीस लैब भोपाल से डॉ. वेंकटेश और डॉ. सेंथिल बूस्टर का टीकाकरण करेंगे।
शूकरों (सुअर) में होने वाली गंभीर संक्रामक बीमारी ‘पोर्सिन रीप्रोडक्टिव एंड रेस्पिरेटरी सिंड्रोम’ (पीआरआरएस)से बचाव के लिए वैक्सीन तैयार की गई है। इसका ट्रायल सरगुजा जिले के शासकीय शूकर पालन केंद्र सकालो के अलग-अलग आयु के 50 शूकरों में किया जा रहा है। इस बीमारी को लू इयर के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल में वैक्सीन तैयार किया गया है। संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. राजू कुमार व डॉ फतह सिंह द्वारा वैक्सीन का ट्रायल किया जा रहा है। वैक्सीन लगने के बाद शूकरों पर इसके प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है। अभी तक शूकरों में स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या नहीं आई है। 21 दिन बाद शूकरों को बूस्टर डोज लगाया जाएगा। देश के एक या दो अन्य केंद्रों के शूकरों में भी वैक्सीन का ट्रायल करने के बाद इसे उपयोग के लिए लाया जाएगा।
देश में तेजी से फैल रही बीमारी
शूकरों की इस बीमारी को सबसे पहले 1987 में अमेरिका में देखा गया था। उसके बाद 1991 में नीदरलैंड में वायरस की पहचान हुई। यूरोपीय और अमेरिकी देशों के बाद यह बीमारी अब भारत में भी पहुंच चुकी है। यह बीमारी शूकर पालकों को बड़ा आर्थिक चोट पहुंचाती है। इसी कारण भारत देश में इसका वैक्सीन तैयार किया गया है।
शूकर फार्म अंबिकापुर में बीआरआरएस बीमारी का ट्रायल चल रहा है। एसओपी का पालन करते हुए सहयोग किया जा रहा है।
डॉ. सीके मिश्रा,
प्रभारी शासकीय सूकर फ़ार्म अंबिकापुर
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