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कोरिया@मार्च माह में हुआ तबादला अब तक नहीं किया गया भारमुक्त,क्या शासन के आदेश को लेकर गंभीर नहीं सहायक आयुक्त कोरिया?

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मंडल संयोजक बैकुंठपुर का सुकमा जिले में हुआ है तबादला,भारमुक्त नहीं करने के पीछे क्या खुद मंडल संयोजक की भूमिका?
आदिम जाति एवम अनुसूचित जाति विकास विभाग ने जारी किया है आदेश,आदेश की अवहेलना आखिर क्यों?

-रवि सिंह-
कोरिया,24 जून 2024 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड में पदस्थ मंडल संयोजक सिद्धार्थ खैरवार का तबादला मार्च माह में आदिम जाति एवम अनुसूचित जाति विकास विभाग मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर अटल नगर के आदेश अनुसार सुकमा विकासखंड जिला सुकमा के लिए किया गया है और आज तीन माह माह बाद भी मंडल संयोजक को भारमुक्त नहीं किया गया है जिससे यह प्रश्न अब खड़ा हो रहा है की क्या कोरिया जिले के आदिवासी विकास विभाग की प्रमुख साथ ही सहायक आयुक्त कोरिया शासन के आदेश को लेकर ही गंभीर नहीं हैं और वह शासन के आदेश के बावजूद मंडल संयोजक सिद्धार्थ खैरवार को भारमुक्त नहीं कर रही हैं। मंडल संयोजक को क्यों भारमुक्त नहीं किया जा रहा है यह बड़ा सवाल है। वैसे मंडल संयोजक बैकुंठपुर को भारमुक्त नहीं किया जाना शासन के आदेश की अवहेलना भी है और ऐसी अवहेलना क्यों कर रही हैं सहायक आयुक्त कोरिया यह भी बड़ा सवाल है।वैसे माना जा रहा है की मंडल संयोजक का तबादला होने उपरांत उन्हे भारमुक्त नहीं किए जाने के पीछे की मुख्य भूमिका खुद मंडल संयोजक निभा रहे हैं और वह खुद ही अपना भारमुक्त होने का आदेश रुकवाने में प्रयासरत हैं जिसमे प्रथम तीन माह तक उन्हे सफलता मिल भी चुकी है।
बता दें की सिद्धार्थ खैरवार का तबादला सुकमा जिले में किया गया है और वह वहां नहीं जाना चाहते यह बताया जा रहा है और इसीलिए उन्होंने अपना भारमुक्त होने का आदेश होने से रुकवाए रखा है। वैसे सिद्धार्थ खैरवार का तबादला कोई एक मात्र तबादला भी नहीं था विभाग का मार्च माह में उसी सूची में कई अन्य नाम भी दर्ज थे जो भारमुक्त होकर अब नई जगह काम भी कर रहे हैं लेकिन सिद्धार्थ खैरवार को भारमुक्त नहीं किया जा रहा है। शासन के आदेश की अवहेलना का यह कोई नया मामला नहीं है अब प्रायः यह देखने को मिल रहा है की अब शासन के आदेश के बावजूद अधिकारी कर्मचारी अपनी मंशानुरूप ही एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं यदि उन्हे नई पदस्थापना मंजूर नहीं होती वह भारमुक्त करने वाले अधिकारी से ही भारमुक्त होने का आदेश रुकवा लेते हैं और इस तरह वह शासन के आदेश को ही ठेंगा दिखा देते हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो अब ऐसी परम्परा देखने को मिल रही है लगातार जहां शासन से आदेश से ऊपर जिले के अधिकारी होते चले जा रहे हैं और वह तबादला मामले में अपनी मर्जी से काम करते हैं जिसे वह भेजना नहीं चाहते वह उसे शासन के आदेश के उपरांत भी नहीं भेजते और शासन के आदेश को ही आंख दिखा देते हैं।


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