जिसमें कई हजार छोटे बेशकीमती पौधे,व औषधि पौधे जलकर हुआ खाक,वन विभाग सो रही कुंभकरणीय नींद
- सोनू कश्यप –
प्रतापपुर,07 जून 2024(घटती-घटना)।प्रतापपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पी 17 के जंगल ग्राम पंचायत केवरा के जंगलों में लगा दिए गया। षड्यंत्र के तहत भीषण आग जिससे कई हजार बड़े पेड़ों समेत प्लांट का छोटा छोटा पौधा जो पूर्व में बरसात के दिनों लगाया गया प्लांटेशन जलकर हुआ राख कई हजार पौधे हुए खाक लाखों करोड़ों खर्च करके विभाग द्वारा किया गया था। जंगल के प्लांट में पौधा-रोपन वन विभाग के कर्मचारी अधिकारी मौके पर नहीं करते मोनेट्रिंग वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी नहीं करते अपने बीटों का निरीक्षण।
हफ्तों पहले लगी आग आज तक नहीं भनक लगी वन विभाग को भनक पहुंचे जिससे उनके ऊपर कई सवाल खडा हो रहा है कि अभी तक हफ्ता हो गया आग लगे हुए लेकिन जंगल को आग लगाने वाले का ना किसी प्रकार से सुराग ना किसी को पकड़ सके।
ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि ग्राम में वन विभाग के समिति अध्यक्ष सिर्फ नाम मात्र का बना रहता है जिससे इन सभी का जंगल में उतना ही भूमिका है जितना आग लगाने वाले का। ना किसी प्रकार से कोई खौफ,ना कोई डर,ना कोई जांच ना पड़ताल, सभी सो रहे हैं कुंभकरण की नींद। लगातार गांव के युवको लोगों द्वारा इसकी आवाज बुलंदी से उठाया जा रहा है लेकिन किसी का कोई सुनवाई नहीं हो रहा है। ऐसा लग रहा है कि वन विभाग अपनी काली करतूत को छुपाने के लिए खुद ही इस जंगल को आग की लपटों में झोंक दिया है। लाखों करोड़ों के नुकसान हुआ लेकिन वन विभाग को क्या,पैसा तो सरकार का है। जैसे पचाना है पचा लो। सिर्फ पैसों का बंदरबाट करना है और कुछ नहीं। कोई पूछने वाला ना कोई सुनने वाला है ना कोई मौके को देखने वाला जो की काफी दयनीय स्थिति में दिख रही है जहां लगातार इस भीषण गर्मी के वजह से जहां हजारों पेड़ जलकर हुआ स्वाहा हो गया।
जल स्तर जिससे पीने के लिए लोगों को भटकना पड़ सकता है दर-बदर जल संकट हमारा दैनिक जीवन में बढ़ सकता है। इसका असर हमारे ऊपर मंडरा रहा है आने वाले दिनो में बड़ा खतरा लगातार नीचे की ओर जा रहा है जलस्तर लेकिन वन विभाग द्वारा इतनी भी समझदारी नहीं है कि इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी इनकी आंखें नहीं खुल रही है। हो सकता है कि स्थानीय लोगों द्वारा अतिक्रमण के करने के लिए भी लगा सकते हैं को जांच पश्चात पता चल जाएगा। दूध और पानी हो जायेगा अगर ऐसी स्थिति अगर निर्मित हर जगह होती रहे तो वह दिन दूर नहीं होगा जब गर्मी के दिनों में लोगों को घर में रहना भी दुभर हो जाएगा। पेड़ पौधे ही नहीं रहेंगे तो हमें ऑक्सीजन कहां से मिलेगा जीवन जीने के लिए कहां जायेंगे लेकिन किसी को इसका कोई परवाह नहीं है जिसका खामियाजा और अंजाम आगे आने वाले दिनों में सभी को भुगतना पड़ेगा । संबंधित ग्राम के जनप्रतिनिधि और ग्राम में बनाया वन समिति अध्यक्ष वन विभाग के ऊपर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए क्योंकि इनके ऊपर कई सवालिया निशान खड़ा होता है कि अभी तक इसकी जांच क्यों नहीं हुआ। इतनी बड़ी लापरवाही किसी भी कीमत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ग्रामीणों की माने तो वन विभाग के द्वारा हजारों पेड़ों का प्लांटेशन किया गया था जो सिर्फ कागजों में दर्ज हो गया। क्योंकि हजारों पेड़ों का प्लांटेशन इस क्षेत्र में वन विभाग के द्वारा केंद्र एवं राज्य सरकार के दिशा निर्देश पर बेशकीमती पेड़ लगाए गए थे। जो लगने के साथ कुछ दिनों बाद भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ गया तथा कुछ पौधे पनप भी गए मगर सही तरीके से पौधारोपण नहीं होने के कारण कागजों में खाना पूर्ति किया गया । जहां बताया जाता है कि भारी मात्रा में पौधा लगाया गया था जिसमें कई अन्य प्रकार के भी पौधे उसमें पनप गए थे उसके बावजूद अचानक से आग लगना समझ से परे हैं। जिसमें कई प्रकार के पौधे जड़ी बूटी वाले भी थे। बताया जा रहा है कि वन विभाग की लापरवाही के कारण शुरू से ही यह पौधारोपण भ्रष्टाचार का भेद चढ़ गया था। अधिकारी-कर्मचारी अपने करतूत एवं भ्रष्टाचार खाना पूर्ति करते हुए पौधारोपण का नाम से लाखों रुपए डकार गए। इसी तरह से प्रतापपुर विकासखंड में कई स्थानों पर पौधारोपण किया गया है जो सिर्फ कागजों में ही गड्ढा और वृक्षों के नाम से शासन को चूना लगाते रहे हैं।
सबसे बड़ी लापरवाही तो यह है कि वन विभाग को अब तक इस विषय में कोई जानकारी ही नहीं है। ना इसकी भनक लगी है। जो जांच का विषय बनता है।
इस विषय में वन विभाग एसडीओ आशुतोष भगत ने कहा कि उक्त स्थान पर तत्काल मैं स्वयं जाऊंगा वन अमला के साथ और मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी हजारों छोटे पौधे प्लांटेशन का जल जाना एवं उचित देखरेख नहीं करने पर तत्काल सख्त कार्यवाही हेतु जांच करते हुए दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी।
निष्पक्ष जांच पश्चात हो सकता है बड़ा खुलासा स्थानीय लोगों द्वारा भी अवैध अतिक्रमण कर कजा करने के चलते उजाड़ दिए प्लांटेशन,,सैकड़ो हेक्टर में लगे पौधे आग से जलकर खाक।
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