पर नहीं बदले तो मनेंद्रगढ़ में लम्बे समय से पदस्थ थाना प्रभारी ?
पुलिस अधीक्षक के तबादले सूची में कुछ पुलिस कर्मचारियों पर की गई मेहरबानी
- लंबे समय से जमे थाना प्रभारियों का नाम तबादला सूची से दिखा बाहर…किसकी थी कृपा?
- मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी पर किसकी कृपा…लगभग 2 साल से जमे होने के बावजूद तबादले सूची में नहीं आया नाम?
- विवादित पुलिस कर्मचारियों पर दिखी अधिकारियों की मेहरबानी की?

-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 03 मार्च 2022 (घटती-घटना)। हमारे मामा भी आईपीएस होते तो कोरिया पुलिस के कार्यप्रणाली पर लगाते लगाम? पर मामा तो नहीं पर प्रेदश के मुखिया हमारे काका आप ही सुनो हमारी फरियाद आप के रहते यहाँ की पुलिस दुश्मनी निकाल रही। पुलिस अपनी कमियों को करती है नजरअंदाज, कमियां बताने वाले पत्रकार हो जाता है एंटी पुलिस क्यों? पुलिस विभाग के कर्मचारी खबरों से अपनी कमियां दूर करने के बजाय क्यों पालते हैं द्वेष? क्या काका के रहते पुलिस लोक सेवक नहीं गुंडा बनी रहेगी? काका आपकी पुलिस लोगो के साथ लोक सेवक जैसा नहीं गुंडे जैसा व्यवहार कर रही है जिसे आप की साफ छवि धूमिल हो रही है। अब आप ही संभालो अपनी बिगड़ी पुलिस को नहीं तो आपकी जनता का अपने काका से भरोसा उठ जाएगा।
नव पदस्थ पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर के तबादला सूची का लोगों को इंतजार था कि इस बार विवादित पुलिस कर्मचारियों पर गाज गिरेगी पर ऐसा होता नहीं दिखा, पुलिस अधीक्षक ने 165 पुलिस कर्मियों की तबादला सूची जारी की इस सूची में वे नाम नहीं दिखे जो दिखने थे, जिसमें सबसे पहला नाम मनेंद्रगढ़ के थाना प्रभारी सचिन सिंह जो लंबे समय से एक ही थाने में पदस्थ है ऐसा लग रहा है कि यह थाना इन्हीं के लिए ही बना है इनके अलावा कोई नहीं चला सकता इस थाने को, इनके कार्यकाल में मनेंद्रगढ़ में जमकर जुआ, सट्टा व अवैध कारोबार चल रहे हैं जिसकी चर्चा आम है पर शायद यह चर्चा पुलिस अधीक्षक के कानों तक नहीं पहुंची होगी, एनडीपीएस के सारे कार्यवाहीयो में मनेन्द्रगढ़ के थाना प्रभारी ने पॉकेट विटनेस का उपयोग करते हुए जबरदस्ती कई कार्रवाई की जिसे लेकर काफी सुर्खियों में रहे इस बार यह माना जा रहा था कि इनका तबादला निश्चित ही होगा पर ऐसा नहीं हुआ, ऐसा लग रहा है कि इनके ऊपर किसी बहुत बड़े नेता व अधिकारी का हाथ है।
दूसरे नंबर पर पटना में पदस्थ थाना प्रभारी सौरभ द्विवेदी जो आते ही विवादों से घिरे रहे, कभी जुए की कार्यवाही में तो कभी एनडीपीएस की कार्यवाही में इनके ऊपर तो यह तक आरोप लगे कि इनके थाने में 151 भय दिखाकर 36 (चा) के मामले में भी जमकर उगाही की गई पर शायद यह भी बात पुलिस अधीक्षक के कानों तक ना पहुंची हो, तीसरा नाम जिले के सुपर कॉप प्रधान आरक्षक जिनका नाम नवीन दत्त तिवारी है इन्हें तो शायद ही कोई भूल सकता हो या फिर इनके कारनामे को उनकी शिकायतों की एक बहुत बड़ी लिस्ट और शायद उनकी बातें भी पुलिस अधीक्षक तक ना पहुंची हो, पुलिस अधीक्षक के तबादले सूची में सिर्फ तीन थाना प्रभारियों का ही स्थानतरण किया गया जबकि जिले में एक दर्जन थाने हैं सिर्फ चुनिदा थाना प्रभारी का ही स्थानांतरण कर खानापूर्ति की गई है सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि अनुभवी निरीक्षकों को कोटाडोल व जनकपुर जैसे थानों में थाना प्रभारी बनाया जा रहा है वही जिले के मनेंद्रगढ़ जैसे बड़े थानों को उप निरीक्षक द्वारा चलाया जा रहा है जबकि जिले में निरीक्षक मौजूद है और उन्हें बड़े थाने चलाने योग शायद नहीं समझा जा रहा है यही वजह है कि उप निरीक्षक सचिन सिंह ही सिर्फ इस थाने योग है ऐसा मानकर इन्हें थाने में लंबे समय से बैठा दिया गया है।
काश! हमारे मामा भी आईपीएस होते
येसा एक उदाहरण से समझा जा सकता है आईपीएस रतन लाल डांगी के ट्वीट से जब युवक के गुहार लगाने से उसके चोरी हुई बाइक पर मामला पंजीबद्ध भी हुवा और बाइक बरामद भी। यह सिर्फ इसलिए हो पाया, क्यों की छत्तीसगढ़ के आईपीएस ने संबंधित थाना के कार्यवाही पर ट्वीट करते हुए सवाल किया। हालांकि पुलिस कहीं की भी हो ज्यादातर लापरवाही देखी जाती है। कई मामलों में वह स्वत: मामले पर सज्ञान नहीं लेते पैरवी की जरूरत पड़ ही जाती है तब लगता है कि काश हमारे मामा भी आईपीएस होते, इस सम्बन्ध में छत्तीसगढ़ के कोरिया पुलिस के कार्यकलाप पर भी कई सवाल उड़ते है, सवाल कोरिया के नवपदस्त पुलिस कप्तान के नेतृत्व में अपने महकमे में भारी बदलाव करते हुए 02.03.2022 को तबादले सूची जारी करते है पर इस सूची में कोरिया के विवादित टॉप 10 के सूची में शामिल पुलिसकर्मियों के नाम क्यों नहीं होता?
कोरिया जिले का एक आरक्षक सोशल मीडिया में लिखा काश सभी के मामा आईजी होते हैं
पुलिस विभाग के एक ऐसा विभाग है जहां पर अपने कर्मचारियों को बचाने की परंपरा है पर सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि क्या उन कर्मचारियों को बचाया जाता है जो चापलूस किस्म के होते हैं या फिर सभी को विभाग के अधिकारी बचा सकते हैं छोटी मोटी गलतियों पर, क्या पूरे जिले में सिर्फ एक प्रधान आरक्षक को एक नहीं कई शिकायतों से बचाने के लिए जो भी अधिकारी आता है वह उन्हें बचाता है और वही कुछ ऐसे भी पुलिसकर्मी है जिस पर कार्रवाई करने में थोड़ी भी विलंब नहीं होता, कुछ सालों में कोरिया जिले में ही कई पुलिसकर्मियों पर कार्यवाही हुई है क्या इसकी वजह उनके पास कोई पकड़ नहीं था या फिर अपने अधिकारियों को अपने बस में करने का हुनर नहीं था ऐसा लगता है कि बचने के लिए अधिकारियों को अपने वश में करने का हुनर होना ही आवश्यक है जो सिर्फ एक प्रधान आरक्षक में है, जिसकी एक नहीं कई शिकायतें हैं पर कार्यवाही करें तो करें कौन? वही बाकी कर्मचारी कार्यवाही का शिकार हो जाते हैं पर उनकी सुने तो सुने कौन ऐसे ही एक आरक्षक ने सोशल मीडिया पर लिखा कि काश सभी के मामा आईजी होते हैं? काश मेरे मामा भी आईजी होते तो पटना थाना की पुलिस मेरे आवेदन की जांच भी करती और एफआईआर भी होती है लेकिन यह मेरा बदकिस्मती है कि मेरे मामा आईजी नहीं है।
सवाल- कोरिया के थाना मनेन्द्रगढ़ में पदस्त थाना प्रभारी लम्बे सालों से जमे है और सूत्र के मुताबित उनके कार्य पर भी सवाल हैं उनके कारवाही में लगभग गवाहों में एकरूपता झलकती है यैसा लगता है कि यह जब कारवाही करने जाते है तो गवाह भी साथ रखते है।
सवाल- पटना व चिरीमिरी थाना में विगत 25 सालो से कोयला व कबाड़ का अवैध धंधा यहा के थाने पर चारचांद लगता आ रहा है आखिर यैसा क्या कारण है कि कोई ठोस कारवाही नही होती?
सवाल- कोरिया जिले में जब से प्रधान आरक्षक नवीन जी पधारे है यह कोरिया पुलिस के लिये बदनामी के मिसाल बने है फिर भी इन ऊपर कार्यवाही क्यों नहीं?
सवाल- कोरिया जिले में एक वाइरल चैट का मामले का एक महीना पूरा हुआ पर इस पर से अब तक पर्दा नही उठा बल्कि इस मामले को उजागर करने वाले पत्रकार पर ही मामला पंजीबद्ध कर पुलिस अपना द्वेष निकालने एड़ी चोटी एक करके पूरे मामले का ठीकरा पत्रकार के सिर मढ़ने के फिराक में क्यों लगी रही?
सवाल- कोरिया पुलिस के एक कर्मचारी जिनके द्वारा लगातार सोसल मीडिया में अपनी व्यथा लिख रहा है जिसे सुनने वाला क्या कोई नहीं?
सवाल- आदिवासी समुदाय के लिए आपत्तिजनक बात पुलिस द्वारा कही जाती है इसके बावजूद पुलिस कप्तान को कार्यवाही करने पर उनके हाथ क्यों कांप रहे आखिर चैट लिखने वाले पुलिस पर किसका आशीर्वाद है?
सवाल- क्या वर्तमान पुलिस अधीक्षक का पूरा कार्य माइक वन के द्वारा संचालित किया जा रहा है? या माइक वन का माइक दो पर अभिषेक छत्रछाया?
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