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नई दिल्ली @ सरकार ने एसकेएम से मांगे पांच नेताओं के नाम

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टिकैत बोले-सरकार ने अब तक नहीं मानी हमारी मांगे


नई दिल्ली,30 नवम्बर 2021 (ए)। तीन कृषि कानूनों की वापसी के बाद सरकार एमएसपी और अन्य मुद्दों को पर बातचीत के लिए तैयार हो गई है। केंद्र सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा को बातचीत का प्रस्ताव दिया है। साथ ही किसान संगठनों से पांच नेताओं के नाम मांगे हैं, जो बातचीत के दौरान सरकार के साथ बैठक करेंगे।
किसान नेता दर्शन पाल ने कहा कि एमएसपी और मुद्दों पर पैनल के लिए सरकार ने किसान संघों से पांच नाम मांगे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा चार दिसंबर को होने वाली बैठक में नाम तय करेगा।
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि चार तारीख को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक है उससे पहले भारत सरकार हमसे रूस्क्क, किसानों पर हुए मुकदमे, किसानों की मौत पर बातचीत करे। हमारा आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है।
टीकरी बार्डर पर चल रही जल्द आंदोलन खत्म होने की चर्चाएं
वहीं, आंदोलनकारी किसानों के टीकरी बार्डर पड़ाव में मंगलवार को हर तरफ आंदोलन के खत्म होने को लेकर चर्चाएं चलती रहीं। हर तरफ लोग गुफ्तगू करते नजर आए कि आंदोलन जल्द खत्म हो सकता है। लेकिन बार्डर पर हुई सभा में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के मंच से हर किसान नेता ने कहा कि संगठन का शीर्ष नेतृत्व जो फैसला करेगा, उसका पालन किया जाएगा। वहीं, दिल्ली पुलिस ने बार्डर पर सुरक्षा के इंतजाम बढ़ा दिए हैं।
इस दौरान मंगलवार को पंजाब किसान यूनियन की प्रधान जसबीर कौर नट ने कहा कि किसानों ने सरकार पर दबाव बनाया है, जिस कारण प्रधानमंत्री को कानून वापस लेने पड़े। हम सभी मांगें मनवाकर यहां से लौटेंगे। बीकेयू पंजाब के लखविंद्र सिंह पीर मोहम्मद ने कहा कि अभी तक हमारा कोई भी फैसला यहां रहने का या जाने का नहीं हुआ है। संयुक्त किसान मोर्चा जो भी फैसला लेगा।
हम वहीं बात मानेंगे। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने पूरे विश्व का भाईचारा बनाया है। किसी को कोई झगड़ा नहीं करना, बल्कि शांति बनाए रखनी है। खुशी मनाओ लेकिन अपने दायरे में रहकर। एडवोकेट मंजीत सिंह भुल्लर ने हमारा किसान भाई तो वापस जाने के लिए तैयार है, लेकिन सरकार के मन में खोट है। हमें एमएसपी और किसानों को मुआवजा दिया जाए। साथ में जिन किसानों पर मुकदमे दर्ज है उन्हें वापस लिया जाए।
एसकेएम की कॉल का होगा पालन: किसान नेता
टीकरी बॉर्डर पर किसानों का धरना मंगलवार को भी जारी रहा। तय समयानुसार यहां किसान सभा हुई और अनेक किसानों व नारी शक्ति ने यहां पहुंचकर धरनारत किसानों को समर्थन दिया। सभा को संबोधित करते हुए कई वक्ताओं व किसान नेताओं ने कहा कि किसानों संघर्ष व एकजुटता के चलते उक्त कृषि कानून वापस लिए गए है लेकिन जब तक किसानों की अन्य मांगें पूरी नहीं होती और संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से आंदोलन को लेकर कोई निर्णय नहीं आता तब तक उनका धरना लगातार जारी रहेगा।
अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर संगठन के सचिव जयकरण दलाल के अलावा अनेक किसान नेताओं ने बॉर्डर पर पहुंचकर किसानों को समर्थन दिया। जयकरण ने कहा कि आंदोलन के दौरान 700 किसानों ने जान गवाई है। उन्होंने अपनी शहीदी देकर आंदोलन को आज तक जीवित रखा।
उन्होंने कहा कि दलाल खाप ने भी आंदोलन का शुरू से ही समर्थन किया है। हुड्डा खाप के प्रतिनिधि रमेश हुड्डा ने कहा कि किसानों के एकजुट रहने के कारण यह जीत हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने तीन कानून वापस ले लिए हैं। लेकिन जब तक एमएसपी की गारंटी नहीं मिल जाती हम यहां से नहीं उठेंगे।
जोगेंद्र सिंह नैन बीकेयू जींद ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा जो भी कॉल देगा, उसका हम पूरा पालन करेंगे। मुकदमे वापिस किए जाए। जिन किसानों की आंदोलन के दौरान जान गई है, उन परिवारों को मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी दिल्ली कूच के दौरान जो ट्रैक्टर थानों में बंद है उन्हें छोड़ा जाए।
नैन ने किसानों को कहा कि प्रधानमंत्री को जो छह मांगें भेजी गई थी, उस पर फैसले की घड़ी का इंतजार करें और शांति बनाए रखे। नैन ने कहा कि हम अपनी मांगे मनवाने के लिए आए हैं न कि सरकार से टकराने के लिए। राजनीतिक पार्टियां हमें भड़काने की कोशिश करेंगी, लेकिन हमें बहकावे में नहीं आना है। परगट सिंह बीकेयू राजेवाल ने भी सभा को संबोधित किया।


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