राहुल गांधी की जयपुर रैली से उठे सवाल
-डॉ.राजकुमार मिश्र-
राजस्थान की राजधानी जयपुर में रविवार को राहुल गांधी को सुनने आये लोगों की बहुत बड़ी तादाद ने भाजपा को चौंका दिया।आनेवाले दिनों में जिन पांच राज्यो में चुनाव होने जा रहे है उनमें शामिल नही होने के बावजूद कांग्रेस ने राजस्थान में ही इतनी बड़ी रैली क्यो की?इसका जबाब एक तिलमिलाए हुए नेता ने यह कहकर दिया कि अगर राहुल ने यूपी में कहीं हिंदू और हिंदुत्व को एक दूसरे का विरोधी बताने की ( जयपुर जैसी) “हमाकत की होती तो योगी जी की पुलिस अबतक उनकी अक्ल ठिकाने लगा चुकी होती।
अब बहस इस बात पर भी चल पड़ी है कि भाजपा के खिलाफ भड़ास निकालने के लिए कांग्रेस शासित राज्य के सभी साधनों संसाधनों का इस्तेमाल करके राहुल गांधी ने गलत किया या ठीक किया !
हालांकि उक्त रैली मंहगाई विरोधी महारैली के नाम से आयोजित की गई थी मगर राहुल गांधी ने लोगों से कहा कि महंगाई से दिनरात परेशान हो रहे नागरिकों को सब पता है पर देश मे विचारधाराओं का युद्ध चल रहा है उसपर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।
राहुल गांधी की रैली के लिए राजस्थान सरकार द्वारा सारे साधन हाजिर कर देने की आलोचना पर कांग्रेस की ओर से भाजपा को यह कहते हुए आईना दिखाने में देर नही लगाई गई कि प्रधानमंत्री ने खुद यूपी में एक विशुद्ध शासकीय (लोकार्पण) कार्यक्रम में लाल टोपी (सपा)के खिलाफ जो संकीर्ण सोचवाली बयानबाजी पिछले ही दिनों की थी क्या वह प्रधानमंत्री जैसी शख्सियत का घोर अवमूल्यन नही था?
भले ही राहुल गांधी ने “हिन्दू और हिंदुत्व” के फर्क के प्रति लोगो को जागरूक करने के लिए अपनी रैली यूपी में नही की मगर यूपी के वोटरों तक उनकी बातें नही पहुंची होंगी,आज के संचार प्रधान युग मे ऐसा तो शायद ही कोई सोच सकता है।
अभी तो यूपी में अपनी सरकार को बचाने की चुनौती ने मोदीजी की पार्टी को धर्म की धूनी रमाने की राह पर लगा रखा है।राहुल गांधी की माने तो हिन्दू और हिंदुत्व को परस्पर विरोधी बताकर हिन्दू को हिन्दू के ही खिलाफ खड़ा करने की कोशिश से देश का कोई भला नही हो सकता।
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