संजीवनी 108 के देखरेख में करोड़ों हुए खर्च, अब कौडिय़ों के भाव बिका कबाड़ में।
पूर्व सरकार की संजीवनी 108 मौजूदा सरकार में बिका कबाड़ में कोरिया का मामला।
कंडम वाहन की हुई नीलामी, किसी को पता भी नहीं चला।
कोरिया जिले में नीलामी में कौडिय़ों के भाव खरीदे 9 वाहन को कबाडिय़ो ने।
स्वास्थ्य विभाग ने जिन वाहनों को कंडम बताया उसे कबाड़ी काटकर ले गए नीलामी में।
नीलामी की प्रक्रिया को लेकर भी स्वास्थ विभाग संदेह के घेरे में। स्वास्थ विभाग ने चहेते को नीलामी में 9 वाहनो को बेच दिया।
आज भी वह वाहन कटकर पड़े हैं खेतों में,खेतों से उठाकर कव्वाली ले जाने के जुगत में।
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 05 मई 2022 (घटती-घटना)। लोगों को स्वास्थ्य देने के लिए पूर्व की भाजपा सरकार ने 2011 में संजीवनी 108 की शुरुआत की थी जो काफी कारगर भी थी और लोगों को काफी मदद भी मिली पर भाजपा सरकार के दौरान खरीदी गई वाहन सरकार जाते ही कंडम घोषित कर दी गई जबकि वाहनों की देखरेख के लिए भी करोड़ों खर्च किए गए थे निजी कंपनियों को इसका ठेका दिया गया था फिर भी क्यों देखरेख के बावजूद वाहन इतनी जल्द कंडम हो गई और इसे नीलामी में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी चुप के चुप के वाहनों को कंडम घोषित कर कौडय़िों के दाम नीलामी में बेच दिया, जबकि कोरिया जिले में कुछ वाहने वर्ष 2011 में आई तो कुछ वाहिने 2014 में तो कुछ वाहने 2017 में ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सारी वाहने एक साथ कंडम हो गई थी और यदि यह वाहिनी कंडम हो गई तो फिर जिस कंपनी को इसकी देखरेख के लिए रखा गया था आखिर उसने ऐसा क्या देख रेख की कि वहने 15 साल भी की नहीं चल पाई, कोरिया जिले में स्वास्थ्य अधिकारी ने चुपके चुपके वाहनों को कंडोम भी घोषित करा दिया और नीलामी करके बेच भी दिया और इसकी भनक किसी को नहीं लगी अब इसकी नीलामी को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी पर संदेह जताया जा रहा है और यह भी कहा जा रहा है कि उन्होंने यह काम अपने ही किसी खास को लाभ पहुंचाने के लिए किया है।
ज्ञात हो कि संजीवनी 108 में दौड़ेंगी सरकारी नहीं निजी कंपनी की एंबुलेंस 2011 में संजीवनी एंबुलेंस सेवा शुरू हुई लांच के दौरान 240 एंबुलेंस दौड़ हैं प्रदेश भर में 1200 पॉयलट, ईएमटी भी एंबुलेंस के साथ दिया गया हैं संजीवनी सेवा सड़क हादसों में घायल, घर, बाहर और दफ्तर में हार्ट अटैक या अन्य इमरजेंसी कॉल में मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए 2011 से पहले कोई सरकारी एंबुलेंस व्यवस्था नहीं थी ताकि पीड़ितों को जैसे-तैसे अस्पताल पहुंचाया जा सके। समय पर इलाज न मिलने, खून अधिक बहने से मरीजों की मौत हो जाती थी। जब से यह सेवा शुरू की गई है, हजारों मरीजों की जान बचाई गई इसलिए इसका नाम संजीवनी सेवा पड़ा। इस सेवा में सरकार को न गाडिय़ां खरीदनी होगी न ही गाडिय़ों के रखरखाव पर माथापच्ची करनी पड़ेगी। अनुबंधित कंपनी यह भी नहीं कह सकेगी कि आपकी दी गाडिय़ां खराब हैं, मेंटेनेंस संभव नहीं है, इसलिए सेवाएं बाधित हो रही हैं। अब पूरी व्यवस्था अनुबंधित कंपनी करेगी। सरकार सिर्फ एक मुश्त राशि जारी करेगी। इस सिस्टम को कैपेक्स कहा जाता है। इससे घायल व्यक्ति और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगी। स्वास्थ्य विभाग ने इन्हीं बदलाव के साथ नया टेंडर जारी कर दिया है, नई कंपनी अनुबंधित हो जाएगी। बता दें कि इस सेवा के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) राशि जारी करता है, ये बदलाव उसकी गाइड-लाइन के तहत भी हुआ है। जीवीके- ईएमआर के साथ अनुबंध साल 2011 से है, जिसे जून 2019 में दो महीने के लिए बढ़ाया गया था। अब नई सरकार में यह काम जय अंबे के पास है और अब नई एंबुलेंस हो गई है जयअम्बे स्वास्थ सुविधा के लिए एंबुलेंस को संचालित कर रहा है पहले की एंबुलेंस जहां सीजी 02 हुआ करती थी अब की एंबुलेंस का नंबर भी बदल कर सीजी 04 हो गया है।
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