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मनेंद्रगढ़@आदिवासियों की जमीन पर हावी हो रहे हैं पूंजीपति लोग,जिस पर शासन-प्रशासन नहीं दे रहा है ध्यान

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-विक्रम साहू-
मनेंद्रगढ़ 04अप्रैल 2022(घटती घटना)। विभाजन के बाद मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर के नाम से नवीन जिले की घोषणा के बाद से ही शासकीय भूमि पर अतिक्रमणकारियो की संख्या में बढ़ोतरी दिखाई पड़ रही है, साथ ही भूमाफिया सक्रियता से अपने काम को अंजाम देने में जुट गए हैं।यहां तक कि अपने लाभ के लिए धोखाधड़ी करके आदिवासियों की भूमि पूंजीपतियों और भूं संहिता से अनजान लोगो को बेच दे रहे हैं। मनेन्द्रगढ़ आसपास के सटे हुये क्षेत्र में भूमि अधिग्रहित करने वालो की नजर गिद्ध की तरह डटी हुई हैं।शहर के इर्दगिर्द के क्षेत्र जैसे चैनपुर, लालपुर,चौघड़ा, चनवारी डाड में आदिवासीयों के जमीन हड़पने की कवायद शुरू हो गई है, आदिवासियो की भूमि के रिकार्ड में सामान्य वर्ग के लोगो के भी नाम देखे जा सकते हैं जो कि शासकीय कर्मचारियों के मिलीभगत से इनकार नही किया सकता। पूर्व कोरिया कलेक्टर श्री श्याम धावड़े के जनचौपाल लगाकर जाति प्रमाणपत्र बनाने के आदेश से राजस्व अधिकारियों और फर्जी मालिको की नींद सी उड़ गई थी। एक जानकारी से मुताबिक कलेक्टर के ऐसे कार्यों के कारण उनके कोरिया से स्थान्तरण की मनसा को लेकर भ्रस्ट कर्मचारियों का समूह मंत्रियों से मिलने रायपुर भी गया था और इनके आने-जाने, मिलने-जुलने से लेकर जो भी खर्च है उसे भूमाफियाओं ने वहन किया था। क्योकि उन्हें पता है कि कलेक्टर के जाने के बाद मामला खटाई में चला जायेगा। और अन्तत: वही हुआ तथा निकाय के विपरीत चुनावी परिणाम का नाम हुआ।अवतार ढाबा से लेकर चनवारीदड़ तक पूंजीपतियों का नजर जो एनएच के किनारे की जमीनों पर है वन भूमि की हो या राजस्व विभाग की हो या ज्यादातर हावी आदिवासियों की जमीनों पर क्योंकि उनको लालच देकर बहला-फुसलाकर उनकी जमीनें हड़पने की कोशिश करते हैं दलाल जिसमे कुछ अधिकारियों की मिलीभगत नजर आ रही है ।


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