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रायपुर@नमूना सहायक से FSO पदोन्नति पर फिर सवाल क्या इस बार नियमों के आधार पर होगा चयन या फिर दोहराई जाएगी पुरानी कहानी?

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  • खाद्य सुरक्षा अधिकारी पदोन्नति पर उठे नए सवाल, योग्य को मिलेगा अधिकार या जुगाड़ तय करेगा पदोन्नति की राह?
  • FSO पदोन्नति की नई सूची पर सबकी नजर, दैनिक घटती-घटना ने वर्षों से उठाए सवाल, अब नियमों और पात्रता की अग्निपरीक्षा
  • पदोन्नति का हक योग्य को,जुगाड़ वालों को नहीं…एफएसओ की नई सूची से पहले भर्ती नियम,तकनीकी योग्यता और पारदर्शिता की अग्निपरीक्षा
  • पदोन्नति से पहले भर्ती नियमों की
  • होगी पड़ताल? नई एफएसओ सूची से पहले पात्रता,तकनीकी योग्यता और पारदर्शिता पर उठी मांग…
  • पदोन्नति का हक योग्य को,जुगाड़ वालों को नहीं नई एफएसओ सूची से पहले भर्ती नियमों के पालन की उठी मांग…
  • नियम बनाम पदोन्नति,खाद्य
  • सुरक्षा अधिकारी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की सबसे बड़ी परीक्षा


-न्यूज डेस्क-
रायपुर,09 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के औषधि एवं खाद्य प्रशासन विभाग में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के रिक्त पदों पर एक और पदोन्नति सूची जारी होने की चर्चाओं के बीच विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है,पिछले कई वर्षों से नमूना सहायकों को खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनाए जाने की प्रक्रिया को लेकर विवाद उठते रहे हैं,भर्ती नियमों,शैक्षणिक योग्यता,तकनीकी पात्रता, विभागीय पदोन्नति समिति की भूमिका तथा पदोन्नति के कानूनी आधार को लेकर लगातार प्रश्न उठाए गए,लेकिन विभाग की ओर से अब तक ऐसा कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया,जिससे इन विवादों पर पूर्ण विराम लग सके। दैनिक घटती-घटना ने भी समय-समय पर इस विषय पर लगातार समाचार प्रकाशित कर यह प्रश्न उठाया है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी जैसे अत्यंत तकनीकी पद पर पदोन्नति किन नियमों के तहत दी जा रही है,समाचारों में यह भी पूछा गया कि यदि किसी कर्मचारी को नियमों के अनुसार पदोन्नति मिलती है तो उसका स्वागत होना चाहिए,लेकिन यदि नियमों की अनदेखी कर किसी अपात्र व्यक्ति को लाभ पहुंचाया जाता है,तो इससे योग्य कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित होंगे और पूरी चयन प्रक्रिया विवादों में घिर जाएगी।
दीपक अग्रवाल की
टेबल पर पदोन्नति सूची?

खाद्य विभाग में नमूना सहायकों को खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद पर पदोन्नत किए जाने को लेकर पहले से विवाद बना हुआ है, विभागीय सूत्रों का दावा है कि पदोन्नति से संबंधित नई सूची स्थापना शाखा में तैयार है और वह दीपक अग्रवाल के स्तर पर विचाराधीन है,आलोचकों का आरोप है कि जिन मामलों को लेकर पहले से न्यायालयों में विवाद लंबित हैं और जिन नियमों की व्याख्या पर प्रश्न उठ रहे हैं,उन्हीं परिस्थितियों में नई पदोन्नति सूची आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है,यदि ऐसा है तो विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पदोन्नति की प्रक्रिया किन नियमों, राजपत्र अधिसूचनाओं और न्यायालयीन आदेशों के आधार पर संचालित की जा रही है, यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियमित भर्ती वर्षों से नहीं हुई है,तो क्या केवल पदोन्नति के माध्यम से रिक्तियां भरना दीर्घकालिक समाधान है? और यदि पदोन्नति ही विकल्प है,तो क्या सभी पात्र कर्मचारियों के साथ समान और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है?
भर्ती नहीं,पदोन्नति पर जोर क्यों?
पिछले लगभग दस वर्षों से खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियमित भर्ती नहीं हुई है,इसी बीच नमूना सहायकों की पदोन्नति को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं, सूत्रों का दावा है कि पहले पदोन्नति का प्रतिशत 10 था, जिसे बाद में 25 प्रतिशत किया गया, आलोचकों का आरोप है कि इस बदलाव का लाभ कुछ विशेष लोगों को देने की कोशिश की जा रही है, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
’दैनिक घटती-घटना’
लगातार उठाता रहा है सवाल

खाद्य सुरक्षा अधिकारी पदोन्नति का विषय नया नहीं है,दैनिक घटती-घटना ने पिछले कई वर्षों में इस विषय पर लगातार समाचार प्रकाशित किए हैं,समाचारों में भर्ती नियमों,तकनीकी योग्यता,पदोन्नति प्रक्रिया,विभागीय पारदर्शिता तथा सेवा नियमों के पालन को लेकर प्रश्न उठाए गए,कई बार यह भी पूछा गया कि यदि किसी प्रक्रिया को लेकर लगातार विवाद हो रहे हैं तो विभाग सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता,समाचार प्रकाशित होने के बावजूद अब तक विभाग की ओर से विस्तृत तथ्यात्मक स्पष्टीकरण सामने नहीं आने के कारण यह विषय लगातार चर्चा में बना हुआ है।
नई सूची से पहले पारदर्शिता की मांग…
अब जबकि नई पदोन्नति सूची जारी होने की संभावना है,कर्मचारियों और सेवा विशेषज्ञों की मांग है कि इस बार प्रत्येक अभ्यर्थी की पात्रता का दस्तावेजी परीक्षण किया जाए,यह सुनिश्चित किया जाए कि—केवल पात्र कर्मचारियों को ही पदोन्नति मिले,जीसी-डीईबी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों की डिग्रियों का परीक्षण किया जाए,एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित विषयगत पात्रता की जांच हो, भर्ती नियमों और पदोन्नति कोटे का पालन किया जाए,डीपीसी प्रत्येक अभ्यर्थी के संबंध में कारणयुक्त निर्णय दर्ज करे।
योग्य का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए
विभाग के कर्मचारियों का भी मानना है कि जो कर्मचारी वर्षों से सेवा कर रहे हैं,आवश्यक तकनीकी योग्यता रखते हैं और भर्ती नियमों की सभी शर्तें पूरी करते हैं,उनका वैधानिक अधिकार किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होना चाहिए,उतना ही महत्वपूर्ण यह भी है कि यदि कोई कर्मचारी निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करता तो उसे केवल प्रभाव,सिफारिश, राजनीतिक दबाव या किसी अन्य आधार पर पदोन्नति न मिले, इससे न केवल योग्य कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होता है बल्कि पूरी सेवा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।
पारदर्शिता ही समाप्त कर सकती है वर्षों पुराना विवाद-खाद्य सुरक्षा अधिकारी का पद सीधे आम जनता के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा हुआ है,इसलिए इस पद पर नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया भी पूरी तरह पारदर्शी,नियमसम्मत और न्यायसंगत होनी चाहिए,यदि विभाग नई पदोन्नति सूची जारी करने से पहले भर्ती नियमों,स्नस्स््रढ्ढ के निर्धारित मानकों,विभागीय सेवा नियमों तथा डीपीसी की प्रक्रिया का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करता है और पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करता है,तो वर्षों से उठ रहे अधिकांश प्रश्न स्वतः समाप्त हो सकते हैं,लेकिन यदि इस बार भी पात्रता और नियमों को लेकर उठ रही शंकाओं का समाधान नहीं हुआ,तो यह विवाद आगे भी जारी रह सकता है,इसलिए विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल पदोन्नति सूची जारी करना नहीं,बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि पदोन्नति का अधिकार उसी कर्मचारी को मिले जो वास्तव में कानून, भर्ती नियम और तकनीकी योग्यता की सभी कसौटियों पर खरा उतरता हो।
खाद्य विभाग ही विवादों में क्यों? स्थापना शाखा पर भी उठ रहे हैं सवाल-पूरे प्रकरण में एक और सवाल लगातार सामने आ रहा है,आलोचकों का कहना है कि औषधि एवं खाद्य प्रशासन में सबसे अधिक विवाद खाद्य प्रशासन की स्थापना, पदोन्नति और पदस्थापना को लेकर सामने आते हैं,जबकि औषधि शाखा अपेक्षाकृत विवादों से दूर रहती है,इसी कारण विभाग के भीतर यह मांग भी उठ रही है कि खाद्य प्रशासन की स्थापना संबंधी मामलों की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए और यदि आवश्यकता हो तो इन मामलों की निगरानी ऐसे अधिकारियों को सौंपी जाए,जिन्हें खाद्य प्रशासन की सेवा नियमावली और तकनीकी ढांचे का प्रत्यक्ष अनुभव हो, एक बड़ा प्रश्न यह भी है कि औषधि एवं खाद्य प्रशासन विभाग में सबसे अधिक विवाद खाद्य प्रशासन शाखा में ही क्यों दिखाई देते हैं? जबकि औषधि शाखा अपेक्षाकृत कम विवादों में रहती है,क्या दोनों शाखाओं की कार्यप्रणाली अलग है? क्या निर्णय लेने की प्रक्रिया में अंतर है? या फिर इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक कारण है? इन प्रश्नों का उत्तर विभाग को देना होगा।
राज्य खाद्य प्रयोगशाला पर भी सवाल
राज्य की एकमात्र खाद्य प्रयोगशाला को लेकर भी विभागीय चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं, आरोप है कि प्रयोगशाला में पदस्थापना और कार्य आवंटन को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं,विभागीय सूत्रों का दावा है कि प्रयोगशाला में कुछ विशेष कर्मचारियों को प्राथमिकता दी गई, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है,लेकिन यदि इस संबंध में शिकायतें हैं तो विभाग को उनका तथ्यात्मक उत्तर देना चाहिए।
विवाद पदोन्नति का नहीं,नियमों के पालन का है…
पूरे मामले को लेकर यह स्पष्ट किया जा रहा है कि किसी भी कर्मचारी की वैधानिक पदोन्नति का विरोध नहीं है, यदि कोई कर्मचारी निर्धारित योग्यता,अनुभव और सेवा नियमों की सभी शर्तें पूरी करता है तो उसे पदोन्नति मिलना उसका अधिकार है, लेकिन विवाद तब उत्पन्न होता है जब यह आशंका व्यक्त की जाती है कि कहीं पात्रता की अनदेखी कर किसी अपात्र व्यक्ति को लाभ तो नहीं दिया जा रहा,यही कारण है कि इस बार विभाग के भीतर सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि पदोन्नति केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं बल्कि नियमों की कसौटी पर होनी चाहिए,यदि नियमों से समझौता किया गया तो इसका नुकसान उन कर्मचारियों को होगा जो वर्षों से विधिसम्मत तरीके से अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी का पद सामान्य
नहीं,अत्यंत तकनीकी दायित्व वाला पद
खाद्य सुरक्षा अधिकारी का दायित्व केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं होता,यही अधिकारी खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करता है,खाद्य पदार्थों के नमूने लेता है, जांच की प्रक्रिया शुरू करता है,आवश्यक होने पर अभियोजन की कार्रवाई करता है तथा न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने जैसी जिम्मेदारियां निभाता है,इसलिए इस पद को तकनीकी पद माना गया है,इसी कारण भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने स्नशशस्र स्ड्डद्घद्गह्ल4 ड्डठ्ठस्र स्ह्लड्डठ्ठस्रड्डह्म्स्रह्य क्रह्वद्यद्गह्य,2011 के नियम 2.1.3 में इस पद के लिए न्यूनतम तकनीकी शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की है,नियमों के अनुसार फूड टेक्नोलॉजी,डेयरी टेक्नोलॉजी,बायोटेक्नोलॉजी,ऑयल टेक्नोलॉजी,कृषि विज्ञान,पशु चिकित्सा विज्ञान,बायोकेमिस्ट्री,मेडिसिन अथवा रसायन विज्ञान और सूक्ष्म जीव विज्ञान जैसे विषयों में निर्धारित योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी ही इस पद के लिए पात्र माने जाते हैं,यही कारण है कि सेवा विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी का पद केवल प्रशासनिक अनुभव के आधार पर नहीं बल्कि तकनीकी दक्षता के आधार पर भी निर्धारित होता है।
क्या केवल वरिष्ठता पर्याप्त है?
सेवा कानून के जानकारों का कहना है कि किसी भी सरकारी पदोन्नति में वरिष्ठता महत्वपूर्ण होती है,लेकिन वह एकमात्र आधार नहीं होती,पदोन्नति के लिए संबंधित कर्मचारी के पास निर्धारित शैक्षणिक योग्यता,आवश्यक सेवा अवधि,विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की अनुशंसा तथा संतोषजनक सेवा अभिलेख होना भी आवश्यक है,यदि इनमें से किसी एक अनिवार्य शर्त का भी अभाव है तो पदोन्नति भविष्य में न्यायिक चुनौती का विषय बन सकती है,इसी बिंदु को लेकर वर्षों से विभाग में चर्चा होती रही है कि पात्रता का परीक्षण किस प्रकार किया जा रहा है और क्या सभी उम्मीदवार समान मानकों पर परखे जा रहे हैं।
फीडर कैडर का प्रश्न सबसे महत्वपूर्ण
पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न यह माना जा रहा है कि राज्य के भर्ती नियमों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद के लिए फीडर कैडर कौन है,सेवा नियमों में यदि किसी पद को स्पष्ट रूप से पदोन्नति का स्रोत घोषित किया गया है तो उसी आधार पर विभागीय पदोन्नति समिति आगे की प्रक्रिया करती है,यदि नियमों में स्पष्टता नहीं है या संशोधन की आवश्यकता है, तो पहले विधिसम्मत संशोधन होना चाहिए,यही कारण है कि विभाग से यह अपेक्षा की जा रही है कि नई पदोन्नति सूची जारी करने से पहले भर्ती नियमों की स्थिति स्पष्ट की जाए।
डीपीसी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
विभागीय पदोन्नति समिति केवल वरिष्ठता सूची देखकर निर्णय नहीं लेती, उसका दायित्व प्रत्येक अभ्यर्थी की योग्यता,सेवा अवधि,वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन,पात्रता तथा भर्ती नियमों के अनुपालन का परीक्षण करना होता है,यदि डीपीसी सभी अभिलेखों का विधिवत परीक्षण करती है तो पदोन्नति प्रक्रिया विवादमुक्त रहती है, लेकिन यदि किसी स्तर पर पात्रता की जांच में कमी रह जाती है तो बाद में पूरी प्रक्रिया न्यायालय में चुनौती का विषय बन सकती है।
डिस्टेंस डिग्री मान्य,लेकिन एफएसओ पदोन्नति के लिए केवल डिग्री नहीं,विषय और पात्रता भी उतनी ही महत्वपूर्ण
खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद पर पदोन्नति को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आता है कि डिस्टेंस एजुकेशन या ओपन यूनिवर्सिटी से प्राप्त डिग्री अपने आप में अमान्य नहीं होती,यदि संबंधित विश्वविद्यालय उस अवधि में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथा डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो से विधिवत मान्यता प्राप्त है,तो ऐसी डिग्री सरकारी सेवा,पदोन्नति और अन्य शासकीय उद्देश्यों के लिए सामान्य डिग्री के समान मान्य मानी जाती है,हालांकि,खाद्य सुरक्षा अधिकारी का पद एक विशुद्ध तकनीकी पद है,इसलिए केवल डिस्टेंस डिग्री होना पर्याप्त नहीं है, स्नशशस्र स्ड्डद्घद्गह्ल4 Food Safety and Standards Rules,2011 के अनुसार उम्मीदवार के पास निर्धारित तकनीकी विषयों में आवश्यक शैक्षणिक योग्यता होना अनिवार्य है,यदि किसी अभ्यर्थी ने डिस्टेंस माध्यम से भी फूड टेक्नोलॉजी,डेयरी टेक्नोलॉजी,बायोटेक्नोलॉजी,कृषि विज्ञान,पशु चिकित्सा विज्ञान,बायोकेमिस्ट्री अथवा रसायन विज्ञान या सूक्ष्म जीव विज्ञान जैसे निर्धारित विषयों में मान्यता प्राप्त डिग्री प्राप्त की है,तो वह अन्य सभी शर्तें पूरी होने पर पात्र माना जा सकता है, इसके विपरीत यदि किसी कर्मचारी ने केवल बी.ए.,बी.कॉम. या ऐसी सामान्य डिग्री प्राप्त की है,जिसमें FSSAI द्वारा निर्धारित तकनीकी विषय शामिल नहीं हैं,तो केवल डिस्टेंस शिक्षा के आधार पर नहीं बल्कि निर्धारित विषयगत पात्रता के अभाव में वह खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद के लिए पात्र नहीं माना जाएगा,विशेषज्ञों का कहना है कि पदोन्नति के समय विभाग को केवल डिग्री देखना पर्याप्त नहीं है,बल्कि यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक है कि संबंधित विश्वविद्यालय उस वर्ष त्रष्ट-ष्ठश्वख् से मान्यता प्राप्त था,संबंधित पाठ्यक्रम विधिवत स्वीकृत था तथा उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता Food Safety and Standards Rules,2011 में निर्धारित मानकों के अनुरूप है,इसी कारण विभाग से यह अपेक्षा की जा रही है कि प्रस्तावित पदोन्नति सूची जारी करने से पहले प्रत्येक उम्मीदवार की डिग्री की वैधता,विषयगत पात्रता तथा विश्वविद्यालय की मान्यता का विधिवत परीक्षण किया जाए,ताकि भविष्य में किसी प्रकार का प्रशासनिक अथवा न्यायिक विवाद उत्पन्न न हो।
योग्य का हक सुरक्षित
रहे,यही सबसे बड़ी कसौटी

पूरे विवाद का सार केवल इतना है कि किसी योग्य कर्मचारी का वैधानिक अधिकार किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होना चाहिए,यदि कोई कर्मचारी सभी नियमों,योग्यता और सेवा शर्तों को पूरा करता है तो उसे पदोन्नति मिलनी ही चाहिए,लेकिन यदि कोई कर्मचारी निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करता तो उसे केवल प्रभाव, सिफारिश, राजनीतिक दबाव या विभागीय संरक्षण के आधार पर लाभ नहीं मिलना चाहिए, खाद्य सुरक्षा अधिकारी का पद सीधे जनता के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा है,इसलिए इस पद पर नियुक्त होने वाले प्रत्येक अधिकारी की योग्यता और चयन प्रक्रिया पर जनता का विश्वास होना आवश्यक है,अब निगाहें प्रस्तावित नई पदोन्नति सूची पर टिकी हैं, यदि इस बार पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, नियमसम्मत और दस्तावेज आधारित रही तो वर्षों से चल रहा विवाद समाप्त हो सकता है, लेकिन यदि फिर वही पुराने प्रश्न अनुत्तरित रह गए,तो यह मामला आगे भी प्रशासनिक और न्यायिक बहस का विषय बना रहेगा।
क्या विभाग में ‘सिंडिकेट’ सक्रिय है?
कुछ शिकायतकर्ताओं और विभागीय सूत्रों का दावा है कि विभाग में एक प्रभावशाली समूह सक्रिय है,जो पदस्थापना,पदोन्नति और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को प्रभावित करता है, कुछ आरोप यह भी हैं कि विशेष सामाजिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को प्राथमिकता दिलाने की कोशिश होती रही है,यदि विभाग इन आरोपों को निराधार मानता है तो पारदर्शिता के हित में संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक कर सकता है।
अब जवाबदेही तय होना जरूरी
यह स्पष्ट है कि किसी भी अधिकारी पर लगे आरोप तब तक सिद्ध नहीं माने जा सकते,जब तक सक्षम जांच एजेंसी या न्यायालय ऐसा न कहे,लेकिन जब वर्षों से शिकायतें,न्यायालयीन विवाद,पदोन्नति प्रक्रिया पर प्रश्न और विभागीय चर्चाएं लगातार सामने आती रहें,तो विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा करे, यदि सभी निर्णय नियमों के अनुरूप हुए हैं,तो विभाग को संबंधित आदेश,पात्रता,पदोन्नति प्रक्रिया और पदस्थापन का आधार सार्वजनिक कर विवाद समाप्त करना चाहिए,और यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है,तो जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए, लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में किसी भी विभाग की विश्वसनीयता का आधार केवल अधिकार नहीं,बल्कि पारदर्शिता,जवाबदेही और नियमों का समान अनुपालन होता है। यही कसौटी इस पूरे प्रकरण पर भी लागू होती है।
अगले अंक में…
इस पूरे मामले को लेकर हम प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल का पक्ष भी जानेंगे,उनसे सीधे सवाल करेंगे कि आखिर खाद्य प्रशासन विभाग में वर्षों से उठ रहे पदस्थापना,अतिरिक्त प्रभार,पदोन्नति,खाद्य प्रयोगशाला और नियमों को लेकर लग रहे आरोपों पर सरकार की क्या राय है? क्या विभागीय शिकायतों और विवादों की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी या वर्तमान व्यवस्था को ही सही माना जाएगा? पढि़ए अगले अंक में— स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के साथ विशेष बातचीत,जिसमें जानेंगे कि इन गंभीर आरोपों और विभागीय विवादों पर सरकार का आधिकारिक पक्ष क्या है और आगे की कार्रवाई को लेकर उनका क्या कहना है।
‘आगे भी खबर जारी रहेगा… ‘


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