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बिलासपुर@दादा ने अपने ही बेटे के खिलाफ दर्ज कराई एफआईआर,नाबालिग बेटी से दुष्कर्म मामले में हाईकोर्ट ने बरकरार रखी उम्रकैद

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बिलासपुर,09 अगस्त 2026। अपनी ही नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए पिता को बिलासपुर हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली। अदालत ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है। हाईकोर्ट ने कहा कि यौन अपराध की पीडि़ता की गवाही यदि विश्वसनीय है,तो केवल उसी के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है और ऐसी गवाही पर संदेह करने का कोई आधार नहीं होने पर अदालत को हिचकिचाना नहीं चाहिए। मामला अगस्त 2019 का है। आरोपी शराब का आदी था और उसके मारपीट करने से परेशान होकर पत्नी बच्चों को छोड़कर चली गई थी। इसके बाद बच्चे अपने दादा-दादी के साथ रहने लगे। इसी दौरान आरोपी अपनी 13-14 वर्षीय नाबालिग बेटी को अपने साथ ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पीडि़ता ने जब घटना की जानकारी अपने परिजनों को दी तो उसके दादा ने बिना किसी दबाव के थाने पहुंचकर अपने ही बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
पुलिस ने मामले की जांच के दौरान पीडि़ता का मेडिकल परीक्षण कराया और जन्म प्रमाण पत्र समेत अन्य दस्तावेज जुटाए। फोरेंसिक जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया। मामले की सुनवाई सत्र न्यायालय (स्नभ्ष्ट क्कह्रष्टस्ह्र) में हुई, जहां आरोपी को ढ्ढक्कष्ट की धारा 376(2)(द्घ) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए जुर्माने के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
हाईकोर्ट ने कहा- भरोसेमंद गवाही पर दोषसिद्धि संभव
ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि निचली अदालत ने पीडि़ता, उसकी मां, दादा और गांव के सरपंच समेत कुल 12 गवाहों के बयान दर्ज किए थे। हाईकोर्ट ने साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। अदालत ने माना कि पीडि़ता की गवाही विश्वसनीय और सुसंगत है तथा उसके बयान पर अविश्वास करने का कोई ठोस कारण सामने नहीं आया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा बरकरार रखी।


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