बिलासपुर में फुटपाथ पर बनाया सड़क,अतिक्रमण भी,निगम कमिश्नर से पूछा…बचाने क्या किया
बिलासपुर,08 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सड़क निर्माण के दौरान कई जगह फुटपाथ गायब हो गए हैं। वहीं, अवैध कब्जे और अनियंत्रित पार्किंग के कारण पैदल चलने वालों के लिए परेशानी और सुरक्षा का खतरा बढ़ गया है। इसे लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने निगम आयुक्त से पूछा है कि फुटपाथों को बचाने और अतिक्रमण से मुक्त रखने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने इस मामले में शपथपत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पैदल चलना संविधान के तहत नागरिकों का मौलिक अधिकार है। ऐसे में नगर निगम की जिम्मेदारी है कि वह फुटपाथों का संरक्षण करे और उन्हें अतिक्रमण से मुक्त रखे। डिवीजन बेंच ने निगम आयुक्त से यह भी पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अब तक जमीन पर क्या ठोस कार्रवाई की गई है।
आरटीआई और शिकायतों के बाद भी नहीं जागा प्रशासन : याचिकाकर्ता संस्कार राजपूत ने जनहित याचिका में आरोप लगाया है कि फुटपाथों पर अवैध कब्जे और ट्रैफिक पुलिस की लापरवाही के कारण बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों के लिए सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि नगर निगम और पुलिस प्रशासन से कई बार शिकायत करने के साथ ही आरटीआई के जरिए भी जानकारी मांगी गई, लेकिन इसके बावजूद समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्रशासन के दावों की खुली पोल : सुनवाई के दौरान नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन ने कोर्ट को बताया कि अतिक्रमण हटाने, मल्टीलेवल पार्किंग बनाने और सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि साल 2024 में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ 67 हजार से ज्यादा चालान काटे गए।
फोटोग्राफ से कोर्ट में
बेनकाब हुए प्रशासन के दावे
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में हाल के फोटोग्राफ और मीडिया रिपोर्ट पेश कर प्रशासन के दावों पर सवाल उठाए। याचिका में कहा गया कि कागजों में कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति अब भी जस की तस है। फुटपाथों पर आज भी दुकानदारों का कब्जा है और वाहन खड़े किए जा रहे हैं। वहीं, शहर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर कोई ठोस और दीर्घकालिक नीति भी नहीं है। फिलहाल, मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
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