Breaking News

एमसीबी/मनेन्द्रगढ़@ भलौर में विवाहिता की फांसी से मौत पर गहराया संदेह, मायके पक्ष ने कहा- यह आत्महत्या नहीं, हत्या की आशंका

Share

  • 30 वर्षीय निशा जायसवाल की मौत के बाद कई सवालों के घेरे में घटनास्थल, सास पर मारपीट पति पर प्रताड़ना व गला दबाने के आरोप, सरकारी अनुदान की राशि को लेकर भी विवाद का दावा
  • फांसी या हत्या? निशा की मौत में गले और पीठ के निशान ने बढ़ाया रहस्य
  • निशा की मौत पर सवालों का घेरा, पंखे से बंधा दुपट्टा और शरीर पर चोट के निशान
  • फंदे से पहले क्या हुआ? निशा की मौत में गले के निशान और पीठ की चोट बनी जांच की कड़ी

-रवि सिंह-
एमसीबी/मनेन्द्रगढ़,08 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
विवाहिता निशा जायसवाल की मौत का मामला अब केवल फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की घटना तक सीमित नहीं रह गया है,मृतिका के मायके पक्ष द्वारा सामने लाई गई तस्वीरों और घटनास्थल से जुड़े सवालों ने मौत की परिस्थितियों को लेकर संदेह और गहरा कर दिया है, परिजनों ने निशा के शरीर पर पीठ सहित अन्य स्थानों पर चोट के निशान होने का दावा करते हुए हत्या की आशंका जताई है,मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल गले पर दिखाई दे रहे निशान, पीठ पर चोट के कथित निशान और पंखे से जुड़े दुपट्टे को लेकर उठाया जा रहा है,परिजनों का कहना है कि यदि निशा ने पंखे से दुपट्टे के सहारे फांसी लगाई थी तो घटनास्थल की पूरी परिस्थितियों और शरीर पर मौजूद निशानों का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाना चाहिए।
बता दे की मनेन्द्रगढ़ जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत भलौर में 30 वर्षीय विवाहिता निशा जायसवाल की फांसी लगाकर मौत के मामले में अब मायके पक्ष के आरोपों के बाद घटना ने नया मोड़ ले लिया है,उत्तर प्रदेश के सोनभद्र से पहुंचे मृतका के परिजनों ने सिटी कोतवाली में शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है,परिजनों ने मौत को सामान्य आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना, मारपीट और पैसों की मांग किए जाने के आरोप लगाए हैं,साथ ही मृतका के शरीर पर चोट के निशान होने तथा घटनास्थल की परिस्थितियों को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई गई है, मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मृतका का शव फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिलने के बजाय नीचे पलंग पर मिलने की बात मायके पक्ष ने कही है,इसी के साथ गले पर निशान और मौके पर बेल्ट पड़े होने का दावा भी किया गया है,हालांकि इन सभी बिंदुओं की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, मौत की वास्तविक वजह क्या है,यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट,फॉरेंसिक जांच,घटना स्थल से जुटाए गए साक्ष्यों और पुलिस विवेचना के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पति पर मारपीट और गला दबाने के गंभीर आरोप-मृतका के भाई ने अपने आरोपों में पति नीरज जायसवाल पर भी कथित मारपीट और गला दबाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं,मायके पक्ष का कहना है कि निशा को लंबे समय से प्रताडि़त किया जा रहा था और पैसों को लेकर भी दबाव बनाया जाता था,हालांकि पति या ससुराल पक्ष का इस संबंध में क्या पक्ष है,यह अभी सामने नहीं आया है,पुलिस के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि मृतिका के साथ पूर्व में किसी प्रकार की मारपीट या प्रताड़ना की शिकायत हुई थी या नहीं।
शरीर पर चोट के निशान को लेकर भी सवाल-मायके पक्ष ने निशा के शव को देखने के बाद उसके शरीर पर कई स्थानों पर चोट अथवा चोट जैसे निशान होने का दावा किया है। परिजनों के अनुसार पीठ पर काले धब्बे जैसा निशान दिखाई दिया,जिसे वे बेल्ट से मारने का संभावित निशान मान रहे हैं,इसी तरह चेहरे और आंख के नीचे भी चोट अथवा कालापन दिखाई देने का दावा किया गया है,परिजनों का कहना है कि इन निशानों की भी जांच होनी चाहिए,लेकिन इन निशानों की प्रकृति और उनके कारण के बारे में अंतिम निष्कर्ष केवल देखकर नहीं निकाला जा सकता,पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक की रिपोर्ट तथा आवश्यकता पड़ने पर फॉरेंसिक परीक्षण से यह पता चल सकेगा कि शरीर पर मौजूद निशान मृत्यु से पहले के हैं, मृत्यु के बाद के हैं अथवा किसी अन्य कारण से उत्पन्न हुए हैं।
फंदा,गले का निशान और पलंग पर शव…तीन बिंदु जांच के केंद्र में…– मायके पक्ष ने घटनास्थल को लेकर सबसे गंभीर सवाल शव की स्थिति को लेकर उठाया है,परिजनों के मुताबिक यदि निशा ने फांसी लगाकर आत्महत्या की तो शव फंदे पर लटका हुआ क्यों नहीं मिला? उनका दावा है कि मृतका का वजन करीब 60 किलो था और शव नीचे पलंग पर लिटा हुआ मिला,इसके अलावा मौके पर गले के निशान के साथ एक बेल्ट पड़े होने की बात भी परिजनों ने कही है,यही कारण है कि मायके पक्ष यह सवाल उठा रहा है कि यदि शव फंदे से उतारा गया था तो उसे किसने उतारा,कब उतारा और पुलिस के पहुंचने से पहले उसे पलंग पर क्यों रखा गया? इन सवालों का उत्तर घटनास्थल के वैज्ञानिक परीक्षण से ही मिल सकता है,पुलिस को यह भी देखना होगा कि जिस स्थान पर कथित रूप से फांसी लगाई गई,वहां फंदे की ऊंचाई,रस्सी या अन्य सामग्री, कमरे की स्थिति,पलंग की स्थिति तथा अन्य भौतिक साक्ष्य क्या थे।
सरकारी अनुदान की करीब चार लाख रुपये की राशि भी जांच के दायरे में…– मृतका के भाई वीरेंद्र जायसवाल ने आर्थिक विवाद का भी आरोप लगाया है उनका कहना है कि उनके पिता के निधन के बाद वर्ष 2025 में शासन की ओर से परिवार को करीब चार लाख रुपये का अनुदान मिला था, आरोप है कि इसी राशि को लेकर नीरज जायसवाल द्वारा कथित रूप से पैसों की मांग की गई, परिजनों के अनुसार अप्रैल में करीब एक लाख रुपये दिए भी गए थे,लेकिन इसके बावजूद निशा को कथित प्रताड़ना से राहत नहीं मिली, यदि यह आर्थिक लेन-देन मामले की जांच का हिस्सा बनता है तो पुलिस के लिए संबंधित बैंक खाते, लेन-देन के रिकॉर्ड, परिजनों के बयान और उपलब्ध दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं,हालांकि अनुदान की राशि और उससे जुड़े कथित विवाद की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पांच वर्ष पहले हुई थी शादी,दो छोटी बच्चियां भी हैं…– मृतका के भाई वीरेंद्र जायसवाल के अनुसार निशा की शादी करीब पांच वर्ष पहले नीरज जायसवाल,पिता सुरेश जायसवाल के साथ हुई थी,शादी के बाद से ही निशा को कथित रूप से परेशान किए जाने की बात मायके पक्ष ने कही है, परिजनों का कहना है कि निशा के वैवाहिक जीवन को लेकर पहले भी परिवार के बीच तनाव की स्थिति बनी रहती थी और पैसों की मांग किए जाने की शिकायतें सामने आती रही थीं,निशा की दो छोटी बच्चियां हैं,जिसके कारण उसकी मौत ने परिवार को और अधिक गहरे संकट में डाल दिया है,मायके पक्ष का आरोप है कि यदि वैवाहिक जीवन में प्रताड़ना और आर्थिक दबाव की स्थिति थी तो उसकी भी जांच की जानी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि घटना से पहले मृतका किन परिस्थितियों से गुजर रही थी।
मौत से दो दिन पहले मां को फोन करने का दावा– मामले में एक अहम कड़ी मृतका की अपनी मां से हुई कथित फोन बातचीत को बताया जा रहा है,भाई वीरेंद्र जायसवाल के अनुसार 6 अगस्त को निशा ने अपनी मां को फोन कर बताया था कि उसकी सास ने उसकी छाती पर लात मारी है,मायके पक्ष का कहना है कि यह बातचीत घटना से कुछ समय पहले हुई थी और इसके करीब दो दिन बाद उन्हें निशा की मौत की सूचना मिली, ऐसे में परिजनों का सवाल है कि मौत से पहले निशा के साथ घर में क्या हुआ था और क्या उस समय किसी प्रकार का विवाद या मारपीट हुई थी? इस फोन बातचीत की वास्तविकता,समय और उसमें कही गई बातों की पुष्टि पुलिस जांच के दौरान कॉल डिटेल, उपलब्ध रिकॉर्ड अथवा अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जा सकती है।
पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल की जांच की…– घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस तथा फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची,टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक साक्ष्य जुटाए,मृतिका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है,ऐसे मामलों में घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण होते हैं,फंदे की सामग्री,गले के निशान,कमरे की स्थिति,शव की स्थिति,मौके पर मिली बेल्ट अथवा अन्य वस्तुओं तथा शरीर पर मौजूद चोट के निशान का वैज्ञानिक परीक्षण जांच की दिशा तय कर सकता है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुल सकते हैं कई सवालों के जवाब– मामले में अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक होगी। रिपोर्ट से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि मौत का चिकित्सकीय कारण क्या था और शरीर पर पाए गए निशानों की प्रकृति क्या है,यदि चिकित्सकीय रिपोर्ट में ऐसे तथ्य सामने आते हैं जो सामान्य फांसी से अलग परिस्थितियों की ओर संकेत करते हैं तो पुलिस की जांच का दायरा बढ़ सकता है,वहीं यदि रिपोर्ट आत्महत्या के अनुरूप पाई जाती है,तब भी मायके पक्ष द्वारा लगाए गए प्रताड़ना और आर्थिक दबाव के आरोपों की अलग से जांच आवश्यक हो सकती है,इसलिए केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ही पूरे मामले का अंतिम आधार मानने के बजाय पुलिस को उपलब्ध सभी परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों को जोड़कर निष्कर्ष तक पहुंचना होगा।
मायके पक्ष के आरोपों की भी होनी चाहिए निष्पक्ष जांच– मृतका के परिजनों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे निशा की मौत को आत्महत्या नहीं मानते और उन्हें हत्या की आशंका है,उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है,मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच में दोनों पक्षों के बयान दर्ज करना,मृतिका के मोबाइल फोन और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच, घटना से पहले की बातचीत,आर्थिक लेन-देन, पड़ोसियों एवं अन्य संभावित गवाहों के बयान तथा घटनास्थल की परिस्थितियों का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा।
आत्महत्या,दुर्घटना या हत्या जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई- फिलहाल इस मामले में दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं,ससुराल पक्ष की ओर से घटना को आत्महत्या के रूप में देखा जा सकता है, जबकि मायके पक्ष ने इसे हत्या की आशंका से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं,इन दोनों दावों के बीच वास्तविक सच्चाई पुलिस जांच से सामने आनी है,सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि निशा की मौत वास्तव में किन परिस्थितियों में हुई? क्या उसने स्वयं फांसी लगाई थी? क्या शव को फंदे से उतारने के बाद पलंग पर रखा गया? शरीर पर बताए जा रहे निशान कैसे आए? घटना से पहले घर में कोई विवाद या मारपीट हुई थी? और क्या पैसों को लेकर वास्तव में कोई दबाव बनाया जा रहा था? इन सवालों के जवाब केवल आरोप-प्रत्यारोप से नहीं,बल्कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य, घटनास्थल की वैज्ञानिक जांच और पुलिस विवेचना से सामने आएंगे।


Share

Check Also

जशपुरनगर@शहर के विकास कार्यों की कलेक्टर ने ली ग्राउंड रिपोर्ट,धीमे काम पर जताई नाराजगी

Share नालंदा परिसर,चौक सौंदर्यीकरण,क्रिटिकल केयर ब्लॉक और बाकी नदी पुल का निरीक्षण,गुणवत्ता के साथ समय-सीमा …

Leave a Reply