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संपादकीय@अगर मैं मुख्यमंत्री का सलाहकार होता… तो सत्ता बचाने नहीं…विश्वास जीतने की सलाह देता…

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लोकतंत्र में सरकारें केवल घोषणाओं से नहीं,बल्कि जनता के अनुभव से बनती और बिगड़ती हैं। चुनाव से कुछ महीने पहले सड़कें बनवाना, योजनाओं की बौछार करना और विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च कर देना अब उतना प्रभावी नहीं रह गया है। आज का मतदाता पहले से कहीं अधिक जागरूक है। वह देखता है कि सरकार ने पूरे कार्यकाल में क्या किया,क्या नहीं किया और उसके जीवन में वास्तव में क्या बदलाव आया।
यदि मुझे मुख्यमंत्री का सलाहकार बनने का अवसर मिले,तो मेरी पहली सलाह यही होगी कि अगला चुनाव जीतने की रणनीति मत बनाइए,बल्कि ऐसा शासन दीजिए कि जनता खुद आपको दोबारा चुनना चाहे।
सबसे पहले सरकार को कानून-व्यवस्था पर पूरी ताकत लगानी चाहिए। यदि किसी राज्य में आम नागरिक,व्यापारी,महिलाएं और निवेशक स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं करते,तो विकास के सारे दावे कमजोर पड़ जाते हैं। अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो,उसके विरुद्ध निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई जनता का विश्वास बढ़ाती है। कानून का राज केवल भाषणों में नहीं,जमीन पर दिखाई देना चाहिए। दूसरी सबसे बड़ी प्राथमिकता भ्रष्टाचार पर निर्णायक प्रहार होनी चाहिए। जनता यह मानने लगी है कि बिना पैसे या सिफारिश के सरकारी काम होना कठिन है। यदि सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार कम करना चाहती है,तो केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। बड़े अधिकारियों, प्रभावशाली लोगों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त भ्रष्ट तंत्र पर भी समान कठोरता दिखानी होगी। जब जनता देखेगी कि कानून सबके लिए बराबर है,तभी सरकार की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
तीसरी सलाह होगी कि सरकारी कार्यालयों को जनता के लिए आसान बनाया जाए। आज भी एक सामान्य नागरिक को प्रमाण-पत्र,नामांतरण,सीमांकन,पेंशन, बिजली,पानी या राजस्व संबंधी कार्यों के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। यदि हर सेवा समय-सीमा में मिले और अधिकारी जवाबदेह हों,तो यह किसी भी चुनावी घोषणा से अधिक प्रभावी उपलब्धि होगी।
युवा किसी भी सरकार की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। उन्हें केवल भत्ते नहीं, बल्कि रोजगार,कौशल और अवसर चाहिए। उद्योगों को आकर्षित करना, स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देना,स्टार्टअप और स्वरोजगार को बढ़ावा देना तथा भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। रोजगार का अवसर किसी भी राजनीतिक नारे से अधिक मजबूत संदेश देता है।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी केवल समर्थन मूल्य तक सीमित नहीं रखा जा सकता। किसानों को सिंचाई,भंडारण,प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच की स्थायी व्यवस्था चाहिए। गांव मजबूत होंगे तो शहरों पर दबाव भी कम होगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
स्वास्थ्य और शिक्षा ऐसे क्षेत्र हैं जहां सरकार की असली परीक्षा होती है। यदि सरकारी अस्पतालों में दवाएं,डॉक्टर और जांच की सुविधा उपलब्ध हो तथा सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले,तो गरीब से लेकर मध्यम वर्ग तक सरकार के प्रति विश्वास विकसित होता है। इन क्षेत्रों में सुधार का राजनीतिक लाभ भले तुरंत न मिले, लेकिन सामाजिक लाभ सबसे अधिक होता है।
सरकार को यह भी समझना होगा कि सोशल मीडिया के दौर में पारदर्शिता ही सबसे बड़ी ताकत है। गलतियों को छिपाने के बजाय स्वीकार करना, समय पर जानकारी देना और जनता से संवाद बनाए रखना सरकार की विश्वसनीयता बढ़ाता है। आलोचना से डरने के बजाय उसे सुधार का अवसर मानना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि सरकार को केवल समर्थकों की नहीं,आलोचकों की भी सुननी चाहिए। लोकतंत्र में विरोधी आवाजें दुश्मन नहीं होतीं,बल्कि वे शासन की कमियां सामने लाने का काम करती हैं। यदि सरकार हर आलोचना को राजनीति मानकर खारिज कर देगी,तो धीरे-धीरे वास्तविक समस्याएं उसकी नजरों से ओझल हो जाएंगी।
चुनाव जीतने का सबसे आसान रास्ता मुफ्त योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि भरोसा जीतना है। जनता को यह महसूस होना चाहिए कि सरकार निष्पक्ष है, संवेदनशील है और निर्णय जनता के हित में ले रही है। जब नागरिक को न्याय, सम्मान और सुविधाएं बिना भेदभाव के मिलने लगें, तब सत्ता परिवर्तन की इच्छा स्वतः कमजोर पड़ जाती है।
किसी भी सरकार की सबसे बड़ी चुनावी रणनीति विज्ञापन नहीं, सुशासन होता है। जनता को भाषण नहीं, परिणाम चाहिए। यदि शासन ईमानदार,पारदर्शी और जवाबदेह होगा,तो सत्ता में वापसी के लिए अलग से रणनीति बनाने की आवश्यकता शायद ही पड़े। लोकतंत्र में अंततः वही सरकार लौटती है, जिस पर जनता को विश्वास रहता है।


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