- भाजपा जिलाध्यक्ष की पोस्ट से भी सोशल मीडिया पर उठे सवाल,नपा उपाध्यक्ष ने लगाए भेदभाव के आरोप,युवाओं ने कहा…पहले सड़क,नाली और जल निकासी फिर पार्क-पाथवे
- 3 करोड़ की विकास सूचीपर बवाल,20 लाख के पार्क निर्माण ने खड़े किए बड़े सवाल
- चुनाव से पहले 3 करोड़ के विकास कार्यों पर विवाद,सोशल मीडिया में जनता ने पूछा…यही है विकास?
- बैकुंठपुर में विकास या धन का दुरुपयोग? 3 करोड़ की स्वीकृति पर उठे सवाल
- नगर पालिका की 13 विकास योजनाओं पर विवाद,सोशल मीडिया में फूटा जनता का आक्रोश
- 20 लाख के पार्क से लेकर 50 लाख के पाथवे तक…विकास कार्यों की प्राथमिकता पर सवाल
- करोड़ों की स्वीकृति,लेकिन जनता पूछ रही…जरूरत सड़क-नाली की या पार्क की?
- विकास कार्यों की स्वीकृति के साथ ही विरोध शुरू,जनता बोली…पहले मूलभूत सुविधाएं,फिर सौंदर्यीकरण
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,06 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। नगर पालिका परिषद बैकुण्ठपुर को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा अधोसंरचना मद के अंतर्गत 300.64 लाख रुपये (लगभग 3 करोड़ रुपये) की अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति मिलते ही शहर की राजनीति और विकास कार्यों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है,आमतौर पर किसी नगर निकाय को करोड़ों रुपये की स्वीकृति मिलने पर खुशी और उत्साह का माहौल बनता है, लेकिन बैकुण्ठपुर में इसके ठीक उलट स्थिति देखने को मिल रही है,यहां राशि से अधिक उन कार्यों की सूची चर्चा का विषय बन गई है,जिन पर यह राशि खर्च की जानी है,सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रस्तावित कार्य वास्तव में शहर की वर्तमान जरूरत हैं या फिर चुनावी वर्ष में कुछ विशेष क्षेत्रों और चहेते वार्डों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है? यही नहीं,भाजपा के जिला अध्यक्ष तक ने सार्वजनिक रूप से सूची साझा कर कई कार्यों के औचित्य पर सवाल खड़े किए हैं, नगर पालिका के उपाध्यक्ष ने भी वार्डों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है, जबकि शहर के युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी फेसबुक सहित अन्य माध्यमों से अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
सबसे बड़ा सवाल—जब एनएच-43 चौड़ीकरण होना है तो पाथवे क्यों? सूची में सबसे अधिक चर्चा क्रमांक-3 और क्रमांक-4 को लेकर हो रही है,एक ओर एसईसीएल कार्यालय से मुक्तिधाम तक 13.66 लाख रुपये की लागत से पाथवे निर्माण प्रस्तावित है, दूसरी ओर प्रमिला होंडा से नगर पालिका परिसर तक 36.79 लाख रुपये की लागत से दूसरा पाथवे बनाया जाना है, यानी केवल इन दोनों कार्यों पर लगभग 50.45 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे,यहीं से सबसे बड़ा विवाद शुरू होता है,शहर में लंबे समय से एनएच-43 चौड़ीकरण की चर्चा चल रही है। जनप्रतिनिधि स्वयं कई मंचों पर सड़क चौड़ीकरण का दावा कर चुके हैं,ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि भविष्य में सड़क चौड़ीकरण होना है,तो उसी मार्ग पर लाखों रुपये खर्च कर पाथवे बनाने का औचित्य क्या है? यदि बाद में चौड़ीकरण के दौरान इन्हें हटाना पड़ा तो क्या यह सार्वजनिक धन का दुरुपयोग नहीं माना जाएगा?
20 लाख के पार्क पर सबसे ज्यादा आपत्ति-सूची का क्रमांक-7 भी विवादों में है, यहां वार्ड क्रमांक-14 में मानस भवन के पास पार्क निर्माण के लिए 20.01 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं,यहीं से सोशल मीडिया पर सबसे तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं,स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया कि…क्या शहर में पहले से पार्कों की कमी इतनी गंभीर है कि 20 लाख रुपये इसी मद में खर्च किए जाएं? क्या जल निकासी, नालियां,ट्रैफिक,सड़कें और रोजगार जैसी समस्याएं इससे कम महत्वपूर्ण हैं? कुछ लोगों ने तो यहां तक टिप्पणी की कि यदि पार्क ही बनाना है तो ‘पूरा चिडि़याघर ही बना दीजिए’,जबकि शहर को मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता अधिक है।
भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी सार्वजनिक रूप से उठाए सवाल-इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग तब मिला जब भाजपा जिला अध्यक्ष ने स्वयं स्वीकृत कार्यों की सूची सोशल मीडिया पर साझा की, उन्होंने लिखा कि शहर में एक ओर एनएच-43 चौड़ीकरण की बात हो रही है,नगर पालिका बैकुंठपुर के 13 विकास कार्यों के लिए लगभग ?3 करोड़ की स्वीकृति प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान की गई है,सड़क, पाथवे एवं अन्य आधारभूत विकास कार्यों से नगर के विकास को नई गति मिलेगी और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं प्राप्त होंगी, इतना ही नहीं,बहुत जल्द बैकुंठपुर के बहुप्रतीक्षित सड़क चौड़ीकरण का कार्य भी स्वीकृत होने जा रहा है,जिससे जिला मुख्यालय के विकास को एक नया आयाम मिलेगा,उनकी इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई।
नगर पालिका उपाध्यक्ष का आरोप-वार्डों में भेदभाव
नगर पालिका उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के चयन में सभी वार्डों के साथ समान व्यवहार नहीं किया गया, उनका कहना है कि कुछ वार्डों में लगातार बड़े-बड़े कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं जबकि कई वार्डों की मूलभूत आवश्यकताओं को नजरअंदाज कर दिया गया,उन्होंने विशेष रूप से कांग्रेस पार्षदों के वार्डों की अनदेखी का आरोप लगाया, यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल विकास कार्यों का मामला नहीं रहेगा बल्कि राजनीतिक प्राथमिकताओं का भी विषय बन सकता है।
अग्रवाल सिटी की सड़क पर भी सवाल
सूची का क्रमांक-12 भी चर्चा में है,यहां 49.64 लाख रुपये की लागत से अग्रवाल सिटी में बीटी रोड निर्माण प्रस्तावित है, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निजी बिल्डर द्वारा विकसित कॉलोनी है,ऐसे में प्रश्न उठ रहा है कि क्या नगर पालिका द्वारा यहां सार्वजनिक धन से सड़क निर्माण किया जाना उचित है? क्या संबंधित भूमि और सड़क का विधिवत हस्तांतरण नगर पालिका को किया जा चुका है? यदि नहीं,तो यह खर्च किस आधार पर प्रस्तावित किया गया? इन सवालों का उत्तर नगर पालिका प्रशासन से अपेक्षित है।
31 जुलाई के आदेश से मिली अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति
संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास,छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 31 जुलाई 2026 को जारी आदेश क्रमांक 5023 के माध्यम से नगर पालिका परिषद बैकुण्ठपुर को 300.64 लाख रुपये की अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई, यह स्वीकृति मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा 1 जुलाई 2026 को भेजे गए प्रस्ताव के आधार पर जारी की गई,स्वीकृति आदेश में कुल 13 विकास कार्य शामिल किए गए हैं,इनमें प्रमुख रूप से—वार्ड 19 में जूनापारा सामुदायिक भवन निर्माण,वार्ड 14 में जय स्तंभ चौक परिसर निर्माण एवं संधारण,एनएच-43 पर एसईसीएल कार्यालय से मुक्तिधाम तक पाथवे निर्माण,प्रमिला होंडा से नगर पालिका परिसर तक पाथवे निर्माण,गेज नदी पर घाट निर्माण,नया बस स्टैंड क्षेत्र में इंटरलॉकिंग टाइल्स,मानस भवन के पास पार्क निर्माण,इंदिरा पार्क का संधारण,इंदिरा पार्क से जनपद तिराहा तक बीटी रोड मरम्मत,अग्रवाल सिटी में बीटी रोड निर्माण,महलपारा क्षेत्र में सड़क निर्माण सहित अन्य कार्य,दस्तावेज सामने आते ही इन कार्यों को लेकर शहर में बहस शुरू हो गई।
जय स्तंभ चौक आखिर है कहां?
सूची के क्रमांक-2 में वार्ड क्रमांक-14 में जय स्तंभ चौक परिसर निर्माण एवं संधारण के लिए राशि स्वीकृत की गई है,लेकिन कई नागरिकों ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि शहर में यह चौक कहां स्थित है? कुछ लोगों का कहना है कि वे पहली बार इस नाम से किसी स्थान के बारे में सुन रहे हैं, यदि यह स्थान किसी अन्य स्थानीय नाम से जाना जाता है तो नगर पालिका को इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
इंदिरा पार्क से जनपद तिराहा तक सड़क मरम्मत पर भी सवाल…
सूची में 48.54 लाख रुपये की लागत से इंदिरा पार्क के सामने से जनपद तिराहा तक बीटी रोड मरम्मत प्रस्तावित है,स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी मार्ग के एक हिस्से में कुछ माह पूर्व डीएमएफ मद से सड़क निर्माण कराया गया था,ऐसे में अब दोबारा इसी मार्ग पर बड़ी राशि खर्च करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या वर्तमान सड़क खराब हो चुकी है? यदि नहीं, तो प्राथमिकता किसी अन्य क्षेत्र को मिलनी चाहिए थी।
शहर के युवाओं ने कहा… पहले मूलभूत सुविधाएं
सोशल मीडिया पर शहर के कई युवाओं ने भी अपनी राय रखी,उनका कहना है कि शहर को व्यवस्थित जल निकासी चाहिए,नालियों का निर्माण होना चाहिए, सड़कों की गुणवत्ता सुधरनी चाहिए,रोजगार से जुड़े विकास कार्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए,उनका कहना है कि केवल पार्क और पाथवे बनाना विकास का पर्याय नहीं हो सकता।
क्या बिना व्यापक जनपरामर्श के तैयार हुई सूची?
पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि क्या इन विकास कार्यों के चयन से पहले शहर के नागरिकों, पार्षदों और संबंधित समितियों से व्यापक राय ली गई? यदि जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों को विश्वास में लेकर प्राथमिकताएं तय की जातीं तो संभवतः इतनी आपत्तियां सामने नहीं आतीं, यही कारण है कि अब यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं विकास कार्यों की सूची केवल प्रशासनिक स्तर पर या सीमित दायरे में तो तैयार नहीं कर ली गई?
जनता पूछ रही…क्या चुनावी वर्ष का असर?
नगर पालिका चुनाव निकट हैं,ऐसे समय में करोड़ों रुपये की स्वीकृति और कार्यों की सूची सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं, कुछ लोग इसे चुनाव पूर्व विकास कार्यों की शुरुआत मान रहे हैं,जबकि आलोचकों का कहना है कि जनता की वास्तविक प्राथमिकताओं की जगह दृश्यात्मक कार्यों को अधिक महत्व दिया गया है,हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी उपलब्ध नहीं है।
नगर पालिका का पक्ष भी महत्वपूर्ण
विवादों के बीच यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि नगर पालिका परिषद बैकुण्ठपुर और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आए,संभव है कि प्रत्येक कार्य के पीछे तकनीकी आवश्यकता,भविष्य की योजना या प्रशासनिक औचित्य हो,इसी प्रकार सड़क चौड़ीकरण,भूमि हस्तांतरण, पार्क निर्माण,पाथवे और अन्य कार्यों को लेकर भी नगर पालिका अपनी स्पष्ट स्थिति रख सकती है,संतुलित और निष्पक्ष पत्रकारिता की दृष्टि से इन सभी बिंदुओं पर नगर पालिका प्रशासन का पक्ष प्रकाशित किया जाना आवश्यक होगा।
अब निगाहें प्रशासन पर…
करीब 3 करोड़ रुपये की स्वीकृति बैकुण्ठपुर के विकास के लिए निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण अवसर है, लेकिन इस राशि का उपयोग किन प्राथमिकताओं पर और किस पारदर्शिता के साथ होगा, यही सबसे बड़ा प्रश्न बन गया है,सोशल मीडिया पर उठ रही आपत्तियां,जनप्रतिनिधियों के बयान, युवाओं की प्रतिक्रियाएं और नगर पालिका उपाध्यक्ष के आरोप यह संकेत दे रहे हैं कि शहर अब विकास कार्यों की केवल घोषणा नहीं,बल्कि उनकी उपयोगिता और दीर्घकालिक प्रभाव पर भी सवाल पूछ रहा है,अब देखना होगा कि नगर पालिका प्रशासन इन आपत्तियों का क्या जवाब देता है,क्या विवादित कार्यों की समीक्षा की जाती है,और क्या वास्तव में यह राशि शहर की वास्तविक जरूरतों पर खर्च होगी या चुनावी मौसम की राजनीति में यह मुद्दा और अधिक गर्माएगा।
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