बिलासपुर,06 अगस्त 2026। डॉ. भीमराव अंबेडकर के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में भिलाई निवासी अनामिका उपाध्याय (20) को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने एफआईआर,आरोपपत्र और संज्ञान आदेश को निरस्त करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि एफआईआर और गवाहों के बयानों के आधार पर प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है। ऐसे में इस स्तर पर न्यायालय का हस्तक्षेप उचित नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन मुद्दों पर अभी कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपपत्र में उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध की ओर संकेत करती है। इसलिए मामले का परीक्षण ट्रायल कोर्ट में ही होना चाहिए। इसी आधार पर एफआईआर, आरोपपत्र और संज्ञान आदेश को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी गई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की स्वीकार्यता,पेन ड्राइव की जब्ती में कथित विसंगतियां,गवाहों की विश्वसनीयता और जांच प्रक्रिया में हुई कथित त्रुटियां तथ्यात्मक विवाद हैं। इन सभी पहलुओं की जांच और मूल्यांकन ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
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