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पटना/कोरिया @ नगर पंचायत पटना में करों का मुद्दा गरमाया

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जल,मकान,दुकान और व्यावसायिक कर में 50 प्रतिशत तक कमी की मांग, नागरिकों ने सीएमओ को सौंपा ज्ञापन
नगर पंचायत बनने के बाद बढ़ा करों का बोझ,गरीब,किसान और मजदूर परिवारों को राहत देने की मांग…
-संवाददाता-
पटना/कोरिया,04 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
नगर पंचायत पटना में जल कर,मकान कर, दुकान कर,व्यावसायिक कर एवं समेकित कर की दरों को लेकर लोगों में असंतोष सामने आने लगा है, नगर पंचायत क्षेत्र के नागरिकों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को एक हस्ताक्षरयुक्त आवेदन सौंपकर वर्तमान करों में 50 प्रतिशत तक कमी करने की मांग की है, आवेदन में तर्क दिया गया है कि नगर पंचायत बनने के बाद करों में हुई वृद्धि का सीधा असर गरीब,किसान और मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है,जिससे उनके लिए आर्थिक कठिनाइयाँ बढ़ रही हैं।
नगर पंचायत बनने के बाद बदली व्यवस्था, बढ़ा करों का बोझ?-आवेदन में उल्लेख किया गया है कि पटना को नगर पंचायत का दर्जा मिले लगभग दो वर्ष हो चुके हैं,इससे पहले यहां ग्राम पंचायत व्यवस्था लागू थी,जहां करों का स्वरूप और दरें अलग थीं,नगर पंचायत बनने के बाद विभिन्न प्रकार के कर निर्धारित किए गए, जिन्हें लेकर अब स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है,आवेदन के अनुसार क्षेत्र की अधिकांश आबादी किसान,मजदूर और निम्न आय वर्ग से जुड़ी है,ऐसे में वर्तमान कर दरें आम नागरिकों की आर्थिक क्षमता के अनुरूप नहीं हैं।
चार प्रमुख करों में राहत की मांग– नगरवासियों ने अपने आवेदन में निम्नलिखित करों में 50 प्रतिशत तक कमी की मांग की है जल कर,मकान कर,दुकान/व्यावसायिक कर, समेकित कर,आवेदन में कहा गया है कि वर्तमान कर निर्धारण ‘अधिक’ है और आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है,इसलिए नगर पंचायत परिषद जनहित को ध्यान में रखते हुए करों की समीक्षा कर राहत प्रदान करे।
हस्ताक्षर कर नागरिकों ने जताई एकजुटता-आवेदन पर कई नागरिकों के हस्ताक्षर दर्ज हैं तथा नगर पंचायत कार्यालय की प्राप्ति मुहर भी दिखाई दे रही है,इससे स्पष्ट होता है कि यह मांग व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक रूप से रखी गई है,स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि करों में कमी की जाती है तो आम नागरिकों को राहत मिलेगी और नगर पंचायत के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।
अब परिषद और प्रशासन के निर्णय पर निगाह-ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब यह देखना होगा कि नगर पंचायत प्रशासन और निर्वाचित परिषद इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं, यदि करों की समीक्षा की जाती है तो हजारों उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिल सकता है, वहीं यदि वर्तमान दरें यथावत रहती हैं तो नागरिकों की ओर से आगे भी आंदोलन या जनप्रतिनिधियों के माध्यम से दबाव बनाया जा सकता है।
प्रशासन का पक्ष भी महत्वपूर्ण
इस विषय पर नगर पंचायत प्रशासन का पक्ष भी महत्वपूर्ण रहेगा,संभव है कि कर निर्धारण शासन के नियमों, अधिनियमों अथवा परिषद के प्रस्ताव के आधार पर किया गया हो, ऐसे में प्रशासन का स्पष्टीकरण सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
नगरवासियों की प्रमुख मांगें…
जल कर में 50′ तक कमी।
मकान कर में 50′ तक कमी।
दुकान एवं व्यावसायिक कर में 50′ तक कमी।
समेकित कर की दरों की पुनर्समीक्षा।
गरीब,किसान एवं मजदूर परिवारों को राहत।


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