Breaking News

बैकुंठपुर (कोरिया)@ तीन वर्षों से अधूरा विद्युतीकरण….अंधेरे में जीने को मजबूर वनांचल के हजारों ग्रामीण

Share

चंदहा,बंशीपुर,कचोहर,नवाटोला सहित कई गांवों में पोल,तार और 11 केवी लाइन तैयार,फिर भी नहीं जली बिजली
क्या पूर्व सरकार में स्वीकृत विकास कार्य राजनीति का शिकार हो गए? ग्रामीणों का आरोप—विभागीय उदासीनता से रुका काम,जल्द बिजली नहीं मिली तो होगा जनआंदोलन
राजन पाण्डेय
बैकुंठपुर (कोरिया), 01 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
आजादी के 75 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड के वनांचल क्षेत्र के कई गांव नियमित विद्युत सुविधा का इंतजार कर रहे हैं, विडंबना यह है कि इन गांवों तक बिजली पहुंचाने की योजना स्वीकृत हो चुकी है,करोड़ों रुपये की लागत से अधिकांश कार्य भी पूरा कर लिया गया, बिजली के खंभे खड़े हो गए,तार भी खिंच गए,11 केवी लाइन भी तैयार कर दी गई,लेकिन ट्रांसफार्मर नहीं लग सके और घरों तक कनेक्शन नहीं पहुंच पाया,परिणामस्वरूप चंदहा,बंशीपुर, कचोहर,नवाटोला,कदना तथा आसपास के कई गांव आज भी अंधेरे और अधूरे विकास के बीच जीवन गुजारने को मजबूर हैं,ग्रामीणों का कहना है कि लगभग दो से तीन वर्षों से विद्युतीकरण का कार्य पूरी तरह ठप्प पड़ा है, कई बार अधिकारियों,जनप्रतिनिधियोंऔर बिजली विभाग से मांग की गई, लेकिन आश्वासन के अलावा कोई ठोस पहल नहीं हुई।
घटती-घटना की खबर के बाद कई गांवों में जली बिजली-ग्रामीण बताते हैं कि कुछ माह पूर्व दैनिक ‘घटती-घटना’ द्वारा इस मुद्दे को लगातार प्रमुखता से उठाया गया था, इसके बाद जनप्रतिनिधियों ने भी विभागीय अधिकारियों से चर्चा की और परिणामस्वरूप मेण्ड्रा,लोलकी,कछड़ी, तंजरा,ठाकुरहथी,छिंदुरा और भगवतपुर जैसे कई गांवों में बिजली आपूर्ति प्रारंभ कर दी गई,इन गांवों में भी लंबे समय तक कार्य अधूरा पड़ा था,लेकिन जनदबाव बढ़ने के बाद विभाग ने शेष कार्य पूरा कर विद्युत आपूर्ति शुरू कर दी, ग्रामीणों का कहना है कि जब अन्य गांवों में बिजली पहुंच सकती है तो चंदहा और बंशीपुर के साथ भेदभाव क्यों?
अब कितना काम बचा है?- स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार अब बहुत अधिक कार्य शेष नहीं है, मुख्य रूप से ट्रांसफार्मर स्थापित करना, घरों तक सर्विस लाइन देना,घरेलू बिजली कनेक्शन प्रदान करना,अंतिम तकनीकी परीक्षण कर विद्युत प्रवाह शुरू करना,ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग गंभीरता दिखाए तो एक-दो महीने के भीतर पूरे क्षेत्र में बिजली पहुंच सकती है।
विभागीय उदासीनता पर उठ रहे सवाल-ग्रामीणों का कहना है कि यदि अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है तो केवल अंतिम चरण का कार्य वर्षों तक लंबित क्यों रखा गया? वे पूछ रहे हैं—क्या बजट समाप्त हो गया? क्या ठेकेदार ने काम छोड़ दिया? क्या विभाग ने भुगतान रोक दिया? या फिर प्रशासनिक उदासीनता के कारण योजना अधूरी रह गई? इन सवालों का कोई स्पष्ट उत्तर ग्रामीणों को नहीं मिल रहा।
अब आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं-चंदहा,बंशीपुर,कचोहर और आसपास के गांवों के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही कार्य दोबारा प्रारंभ नहीं हुआ तो ग्रामीण चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे, उन्होंने कहा कि वर्षों तक इंतजार करने के बाद अब धैर्य जवाब देने लगा है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने उठाई आवाज-पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि उनके कार्यकाल में वनांचल के बिजलीविहीन गांवों की समस्या को गंभीरता से उठाया गया था, उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री से मांग कर इन गांवों के विद्युतीकरण की स्वीकृति दिलाई थी,जिसके बाद तेजी से कार्य प्रारंभ हुआ,उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद अधिकांश विकास कार्यों की गति रुक गई,उन्होंने कहा कि चंदहा,नवाटोला,कचोहर, तंजरा,ठाकुरहथी और बंशीपुर सहित कई गांवों में कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है, यदि विभाग शीघ्र कार्य पूरा नहीं करता तो ग्रामीणों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
पहली बार मिली थी नियमित बिजली की उम्मीद
वनांचल के इन गांवों में वर्षों तक बिजली केवल सपना रही, ग्रामीणों के अनुसार पूर्व विधायक गुलाब कमरो के प्रयासों से तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान इन विद्युतविहीन गांवों के विद्युतीकरण की स्वीकृति मिली,योजना का उद्देश्य उन बस्तियों तक बिजली पहुंचाना था,जहां आज तक राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड नहीं पहुंच सका था,स्वीकृति मिलने के बाद कार्य तेजी से प्रारंभ हुआ, अकलासडई से बंशीपुर तक सैकड़ों बिजली पोल लगाए गए,11 केवी लाइन बिछाई गई,तार खींचे गए तथा कई स्थानों पर आवश्यक तकनीकी कार्य भी पूरा कर लिया गया,ग्रामीणों को उम्मीद थी कि कुछ ही महीनों में उनके घरों में पहली बार नियमित बिजली पहुंचेगी, लेकिन यह उम्मीद अधूरी रह गई।
सरकार बदली और रुक गई विकास की रफ्तार?
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि विधानसभा चुनाव तक काम तेज गति से चलता रहा। इसके बाद लोकसभा चुनाव तक कुछ हिस्सों में काम हुआ, लेकिन फिर अचानक पूरी परियोजना ठप हो गई,इसी कारण अब ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि क्या पिछली सरकार में स्वीकृत विकास कार्य राजनीतिक कारणों से प्रभावित हो गए हैं? हालांकि इस संबंध में बिजली विभाग या शासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सौर ऊर्जा भी अब जवाब देने लगी
वर्तमान में चंदहा, बंशीपुर और आसपास के गांव क्रेडा द्वारा संचालित सौर ऊर्जा संयंत्रों के भरोसे हैं,लेकिन यह व्यवस्था अब गांवों की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही है,बरसात के मौसम में लगातार बादल छाए रहने के कारण पर्याप्त धूप नहीं मिलती,इससे सोलर प्लांट पूरी क्षमता से चार्ज नहीं हो पाते और रात में कुछ घंटों बाद ही बिजली समाप्त हो जाती है,ग्रामीण बताते हैं कि पहले प्रत्येक घर में केवल दो एलईडी बल्ब जलाने की व्यवस्था थी,लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं,आज हर घर में पंखा,मोबाइल चार्जर,टेलीविजन,पानी का पंप, मिक्सर,अन्य छोटे घरेलू उपकरण का उपयोग होने लगा है, इससे संयंत्रों पर क्षमता से अधिक भार पड़ रहा है।
नई बैटरियों का भी इंतजार
ग्रामीणों के अनुसार कई गांवों में सोलर संयंत्र की बैटरियां भी अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं, क्रेडा द्वारा रखरखाव तो किया जा रहा है, लेकिन नई बैटरियों का आबंटन समय पर नहीं होने के कारण बिजली आपूर्ति और प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों का अंतिम सवाल हमारे गांव में बिजली कब?
वनांचल के ग्रामीण कहते हैं कि जब आसपास के गांवों में बिजली पहुंच चुकी है और उनके गांवों में भी अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है,तब उन्हें और कितने वर्षों तक इंतजार करना होगा? ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग की सुस्ती और प्रशासनिक उदासीनता के कारण हजारों लोग आज भी आधुनिक जीवन की सबसे बुनियादी सुविधा—बिजली—से वंचित हैं, अब पूरा क्षेत्र इस इंतजार में है कि विभाग कब अधूरा काम पूरा करेगा और वर्षों से अंधेरे में डूबे चंदहा,बंशीपुर,कचोहर,नवाटोला और आसपास के गांवों में आखिर कब स्थायी रूप से बिजली का उजाला पहुंचेगा।


Share

Check Also

विश्रामपुर/सूरजपुर@ तीन वर्षों से बंद पड़ा निजी ट्रांसफार्मर हटाया गया

Share नगर पंचायत उपाध्यक्ष अंशुल गोयल की पहल लाई रंग,फौजी गली के लोगों को मिली …

Leave a Reply