कार्यकारी अध्यक्ष अधिवक्ता जय सोनपाकर बोले…‘यदि मशीनों से हुआ काम,तो मजदूरी किसे मिली? बैंक खातों से लेकर मस्टर रोल तक हो निष्पक्ष जांच’
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर (कोरिया),31 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। कोरिया वन मंडल में तालाब निर्माण,रेंगान, वृक्षारोपण,एनिकेट एवं अन्य कैम्पा कार्यों को लेकर उठ रहे कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों के बीच अब एक नया और बेहद गंभीर सवाल सामने आया है, सवाल केवल निर्माण गुणवत्ता या पहली बारिश में क्षतिग्रस्त हुए तालाबों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब सरकारी अभिलेखों में दर्ज मजदूरी भुगतान की पारदर्शिता पर भी प्रश्न उठने लगे हैं। कोरिया जन सहयोग समिति के कार्यकारी अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता जय सोनपाकर ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि अधिकांश निर्माण कार्य जेसीबी और ट्रैक्टर जैसी भारी मशीनों से कराए गए,तो सरकारी मस्टर रोल में दर्ज हजारों मजदूर आखिर कौन थे और उन्हें किस आधार पर भुगतान किया गया? उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र, तकनीकी एवं वित्तीय जांच की मांग करते हुए कहा कि अब केवल सोनहत ही नहीं, बल्कि बैकुंठपुर और देवगढ़ वन परिक्षेत्रों के निर्माण कार्यों की भी जांच आवश्यक हो गई है।
तालाब से शुरू हुआ विवाद अब मजदूरी भुगतान तक पहुंचा-सोनहत वन परिक्षेत्र में तालाब निर्माण को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब पहली ही बारिश में कुछ निर्माण कार्य क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें सामने आईं, इसके बाद निर्माण गुणवत्ता,मशीनों के उपयोग, सूचना पट्ट नहीं लगाए जाने और कथित तकनीकी अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठने लगे,दैनिक घटती-घटना द्वारा इन मुद्दों को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि और राजनीतिक दल भी सक्रिय हुए, मुख्यमंत्री को शिकायतें भेजी गईं,डीएफओ और एसडीओ फॉरेस्ट को ज्ञापन सौंपे गए,पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने पीसीसीएफ से चर्चा की, नागरिक एकता मंच ने आंदोलन की चेतावनी दी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने भी जांच की मांग उठाई, अब इस पूरे विवाद में सबसे गंभीर प्रश्न मजदूरी भुगतान का जुड़ गया है।
केवल सोनहत नहीं,तीनों वन परिक्षेत्रों की हो जांच-जय सोनपाकर ने कहा कि मामला अब केवल सोनहत वन परिक्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है,उन्होंने मांग की कि सोनहत, बैकुंठपुर, देवगढ़ तीनों वन परिक्षेत्रों में पिछले एक से दो वर्षों के दौरान कराए गए तालाब,रेंगान,एनिकेट,वृक्षारोपण और अन्य विकास कार्यों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, उनका कहना है कि यदि शिकायतें कई स्थानों से सामने आ रही हैं,तो जांच भी व्यापक दायरे में होनी चाहिए।
रणनीति तय करने होगी विशेष बैठक-वन विभाग में कथित भ्रष्टाचार, मशीनों के उपयोग,मजदूरी भुगतान और निर्माण गुणवत्ता से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति तय करने के लिए कोरिया जन सहयोग समिति ने विशेष बैठक बुलाने का निर्णय लिया है,बैठक में अधिवक्ता,सामाजिक कार्यकर्ता,जन प्रतिनिधि और समिति के पदाधिकारी उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा करेंगे,सूत्रों के अनुसार बैठक में आंदोलन की रूपरेखा, शासन को नई शिकायतें,आरटीआई के माध्यम से अतिरिक्त दस्तावेज जुटाने,तथा न्यायालय में याचिका दायर करने जैसे विषयों पर भी चर्चा हो सकती है।
बढ़ता जा रहा है दबाव-वन विभाग पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है,अब तक ग्रामीणों ने शिकायतें कीं,दैनिक घटती-घटना ने लगातार खोजी समाचार प्रकाशित किए,कोरिया जन सहयोग समिति ने ज्ञापन सौंपा,मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी गई, पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने पीसीसीएफ से चर्चा की,गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने आंदोलन की चेतावनी दी, नागरिक एकता मंच ने 25 अगस्त को वन विभाग कार्यालय घेराव की घोषणा की,और अब जय सोनपाकर ने मजदूरी भुगतान और मस्टर रोल की जांच का नया मुद्दा उठाकर पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल
यदि जांच में यह सामने आता है कि निर्माण कार्य वास्तव में मशीनों से हुए और उसी अवधि में मजदूरी के नाम पर बड़ी राशि का भुगतान भी दर्ज है, तो यह केवल निर्माण गुणवत्ता का मामला नहीं रहेगा,बल्कि सरकारी धन के उपयोग और अभिलेखों की सत्यता से जुड़ा गंभीर प्रशासनिक प्रश्न बन जाएगा,दूसरी ओर,यदि जांच में यह स्पष्ट होता है कि मशीनों का उपयोग नियमानुसार हुआ और मजदूरी भुगतान भी वास्तविक श्रमिकों को किया गया,तो इससे विभाग का पक्ष भी सामने आएगा,फिलहाल पूरा मामला निष्पक्ष जांच की मांग के केंद्र में है और अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वन विभाग और शासन इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करते हैं।
मशीनें चलीं तो मजदूर कहां से आए?
अधिवक्ता जय सोनपाकर का कहना है कि यदि निर्माण कार्यों में वास्तव में जेसीबी और ट्रैक्टर का उपयोग हुआ है,तो यह जांच का विषय है कि सरकारी अभिलेखों में दर्ज मजदूर कौन हैं,उन्होंने कहा कि वन विभाग की अधिकांश योजनाओं का उद्देश्य केवल निर्माण कराना नहीं,बल्कि स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना भी है,यदि कार्य मशीनों से हुआ, तो फिर—मस्टर रोल किसके नाम से भरे गए? मजदूरी किसे दी गई? क्या जिन लोगों के नाम दर्ज हैं, उन्होंने वास्तव में काम किया? यदि नहीं किया, तो भुगतान किस आधार पर हुआ? जय सोनपाकर का कहना है कि इन प्रश्नों का उत्तर केवल विभागीय स्पष्टीकरण से नहीं,बल्कि दस्तावेजी और वित्तीय जांच से ही मिल सकता है।
‘फर्जी मस्टर रोल और भूतहा मजदूरों’ की आशंका…
जय सोनपाकर ने आरोप लगाया कि यदि मशीनों से कराए गए कार्यों के बावजूद मजदूरी का भुगतान दिखाया गया है, तो यह फर्जी मस्टर रोल का मामला हो सकता है,उन्होंने कहा कि कई सरकारी योजनाओं में पहले भी फर्जी मस्टर रोल और काल्पनिक मजदूरों के नाम पर भुगतान के आरोप सामने आते रहे हैं,इसलिए इस मामले में भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है,उनका कहना है कि यदि विभाग ने नियमों के अनुरूप कार्य कराया है तो जांच से उसका पक्ष भी स्पष्ट हो जाएगा, लेकिन यदि अनियमितता हुई है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
समिति ने रखीं तीन बड़ी मांगें…
- मशीन बनाम मजदूर की जांच-समिति का कहना है कि प्रत्येक निर्माण स्थल का भौतिक सत्यापन किया जाए, जहां मशीनों से कार्य हुआ हो,वहां मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों का मिलान कराया जाए।
- बैंक खातों की जांच-समिति ने मांग की है कि जिन बैंक खातों में मजदूरी का भुगतान हुआ है,उनका सत्यापन कराया जाए,यह देखा जाए कि खाते वास्तविक मजदूरों के हैं या नहीं,भुगतान किस तिथि को हुआ,भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति ने वास्तव में कार्य किया या नहीं,यदि आवश्यक हो तो लाभार्थियों का स्थल पर जाकर सत्यापन कराया जाए।
- तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट-समिति का कहना है कि सभी निर्माण कार्यों की मेजरमेंट बुक (एमबी),प्रशासनिक स्वीकृति,तकनीकी स्वीकृति,भुगतान आदेश, गुणवत्ता परीक्षण,उपयोगिता प्रमाण पत्र,की स्वतंत्र जांच कराई जाए,उन्होंने सुझाव दिया कि यह जांच जिले से बाहर के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम द्वारा कराई जाए, ताकि निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur