
घटती-घटना’ की खबर के बाद हरकत में आया पशुधन विकास अभिकरण,अब जांच की निष्पक्षता पर उठने लगे सवाल
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,30 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। पशुधन विभाग के फुट एंड माउथ डिजीज टीकाकरण अभियान में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रकाशित समाचार के बाद शासन हरकत में आ गया है,दैनिक ‘घटती-घटना’ द्वारा प्रकाशित खबर का असर यह हुआ कि छत्तीसगढ़ राज्य पशुधन विकास अभिकरण, रायपुर ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं,आदेश में जिला स्तर पर टीम गठित कर गांव-गांव जाकर टीकाकरण की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं,हालांकि, जांच के आदेश जारी होने के साथ ही जांच की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच का दायरा सीमित किया जा रहा है और पूरे मामले की तह तक जाने के बजाय इसे केवल औपचारिकता तक सीमित रखने की कोशिश हो रही है।
गांव-गांव जाकर होगी जांच…
राज्य पशुधन विकास अभिकरण द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार जांच टीम को केवल कार्यालयीन रिकॉर्ड देखने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि प्रत्येक गांव में जाकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन करना होगा, जांच के दौरान प्रमुख रूप से निम्न बिंदुओं की जांच की जाएगी, गांववार टीकाकरण का भौतिक सत्यापन,पशुपालकों से सीधे पूछताछ, पोर्टल पर दर्ज टीकाकरण आंकड़ों का वास्तविक स्थिति से मिलान, अपलोड किए गए फोटो एवं दस्तावेजों का सत्यापन,प्राप्त टीकों की मात्रा और उनके उपयोग का परीक्षण, टीकाकरण दलों की कार्यप्रणाली की समीक्षा, इन बिंदुओं से स्पष्ट है कि शासन केवल कागजी रिकॉर्ड पर भरोसा नहीं करना चाहता, बल्कि वास्तविक स्थिति जानने के लिए जमीनी स्तर पर जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
क्या केवल खड़गवां तक सीमित रहेगी जांच?
सबसे बड़ा सवाल जांच के दायरे को लेकर उठ रहा है, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कथित अनियमितताएं केवल खड़गवां विकासखंड तक सीमित नहीं हैं,बल्कि मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और कोरिया जिले के अन्य क्षेत्रों से भी शिकायतें सामने आई हैं, ऐसे में यदि जांच केवल एक विकासखंड तक सीमित रहती है तो पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ पाएगी।
शासन के आदेश ने भी खड़े किए कई सवाल…
जांच के आदेश जारी होने के बाद कई अहम सवाल स्वतः खड़े हो गए हैं यदि पूरा टीकाकरण अभियान नियमों के अनुसार हुआ था, तो जांच के आदेश देने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या बिना वास्तविक टीकाकरण किए पोर्टल पर शत-प्रतिशत उपलब्धि दर्ज कर दी गई? क्या बिना भौतिक सत्यापन के ही रिपोर्ट शासन को भेज दी गई? क्या जांच केवल औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह जाएगी? यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होगी? क्या जांच एमसीबी और कोरिया जिले के सभी प्रभावित क्षेत्रों तक विस्तारित की जाएगी?
खबर के बाद हरकत में आया शासन
एफएमडी टीकाकरण अभियान को लेकर प्रकाशित समाचार में यह सवाल उठाया गया था कि क्या बिना वास्तविक टीकाकरण किए ही पोर्टल पर शत-प्रतिशत उपलब्धि दर्ज कर दी गई? क्या रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में अंतर है? समाचार प्रकाशित होने के बाद शासन ने जांच के आदेश जारी कर दिए,जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।
अब जांच पर ही उठ रहे सवाल…
जांच शुरू होने से पहले ही शिकायतकर्ताओं ने उसकी निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं,उनका आरोप है कि जांच टीम शिकायतकर्ताओं से ही बार-बार जानकारी लेकर मामले को सीमित करने का प्रयास कर रही है,शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष है तो उसका उद्देश्य पूरे मामले की सच्चाई सामने लाना होना चाहिए,न कि केवल शिकायतकर्ता से जानकारी लेकर औपचारिक रिपोर्ट तैयार करना।
पशुपालकों में चिंता
ग्रामीण पशुपालकों का कहना है कि यदि वास्तव में टीकाकरण अभियान में अनियमितता हुई है तो इसका सीधा असर पशुधन पर पड़ सकता है, एफएमडी जैसी संक्रामक बीमारी समय पर टीकाकरण नहीं होने पर तेजी से फैल सकती है,जिससे किसानों और पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, पशुपालकों ने मांग की है कि पूरे मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और कोरिया जिले में निष्पक्ष,पारदर्शी और व्यापक जांच कराई जाए,यदि रिकॉर्ड और वास्तविकता में अंतर मिलता है तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
जांच से उठेगी परत या दब जाएगा मामला?
अब इस पूरे मामले पर पशुपालकों, ग्रामीणों और आम लोगों की नजर शासन द्वारा गठित जांच टीम पर टिकी हुई है, सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या यह जांच वास्तव में पूरे जिले में जाकर सच्चाई उजागर करेगी,या फिर इसे सीमित दायरे में समेटकर मामला खत्म करने का प्रयास होगा,यदि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होती है तो इससे न केवल एफएमडी टीकाकरण अभियान की वास्तविक स्थिति सामने आएगी,बल्कि भविष्य में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी,वहीं,यदि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई तो यह पूरे अभियान की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकती है।
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