





- ग्रामीणों से लेकर सामाजिक संगठन,राजनीतिक दल और पूर्व विधायक तक एक सुर में उठा रहे निष्पक्ष जांच की मांग…
- तालाब से फेंसिंग तक विवाद ही विवाद, सोनहत वन परिक्षेत्र में बढ़ा विरोध,25 अगस्त को घेराव की चेतावनी…
- वन विभाग पर बढ़ा चौतरफा दबाव, जांच की मांग को लेकर सड़क से प्रशासन तक गूंजे सवाल…
- तालाब निर्माण विवाद ने पकड़ा तूल, अब सामाजिक संगठन,राजनीतिक दल और पूर्व विधायक आमने-सामने…
- सोनहत वन परिक्षेत्र में कथित अनियमितताओं पर बवाल,वन विभाग के खिलाफ खुला मोर्चा…
- एक के बाद एक संगठन मैदान में, सोनहत वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल…
- निर्माण कार्यों पर बढ़ते आरोपों से घिरा वन विभाग,25 अगस्त को कार्यालय घेराव की चेतावनी…
- जनता,संगठन और जनप्रतिनिधि एक सुर में— ‘निर्माण कार्यों की हो निष्पक्ष जांच, दोषियों पर हो कार्रवाई’
-राजन पाण्डेय-
बैकुंठपुर/सोनहत,30 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। कोरिया वन मंडल के सोनहत वन परिक्षेत्र में तालाब,फेंसिंग एवं अन्य निर्माण कार्यों को लेकर उठे कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप अब लगातार व्यापक होते जा रहे हैं,शुरुआत ग्रामीणों द्वारा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाने से हुई थी,लेकिन अब यह मामला सामाजिक संगठनों,राजनीतिक दलों, पूर्व जनप्रतिनिधियों और नागरिक मंचों तक पहुंच चुका है,एक के बाद एक संगठन सामने आकर निष्पक्ष जांच,दोषियों पर कार्रवाई और सरकारी धन के उपयोग की पारदर्शी समीक्षा की मांग कर रहे हैं,लगातार बढ़ते विरोध और शिकायतों के बीच वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं और विभाग पर जवाबदेही तय करने का दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है,दैनिक घटती-घटना द्वारा प्रकाशित खोजी समाचारों के बाद मामले ने जिस गति से तूल पकड़ा है, वह अब केवल विभागीय शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है,अब यह मुद्दा जनहित,सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ी बड़ी बहस का विषय बन चुका है।
25 अगस्त तक कार्रवाई नहीं हुई तो होगा वन विभाग कार्यालय का घेराव- ज्ञापन के माध्यम से नागरिक एकता मंच ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 25 अगस्त तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई,तो क्षेत्र के ग्रामीणों, युवाओं और सामाजिक संगठनों के साथ वन विभाग कार्यालय का घेराव किया जाएगा,यह चेतावनी इस बात का संकेत है कि यदि समय रहते प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए तो यह विवाद बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने भी उठाई जांच की मांग-इस पूरे मामले में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) भी सक्रिय हो गई है, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व सांसद प्रत्याशी श्याम सिंह मरकाम ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर मशीनों का उपयोग किया गया,जबकि इन योजनाओं का उद्देश्य स्थानीय मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना भी है, उन्होंने कहा कि यदि मशीनों के उपयोग,मस्टर रोल,भुगतान प्रक्रिया और निर्माण गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच नहीं हुई,तो पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगी।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने पीसीसीएफ से की चर्चा-भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने भी मामले को गंभीर बताते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ),रायपुर से दूरभाष पर चर्चा की,
उन्होंने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया कि यदि वर्षाकाल में मिट्टी संबंधी कार्यों पर तकनीकी प्रतिबंध रहता है,तो जुलाई माह में भारी बारिश के दौरान तालाब निर्माण किस नियम और किस तकनीकी अनुमति के आधार पर कराया गया? उन्होंने यह भी पूछा कि यदि पहली ही बारिश में निर्माण क्षतिग्रस्त हो गया,तो गुणवत्ता परीक्षण किस स्तर पर हुआ और उसकी जिम्मेदारी किसकी है,पूर्व विधायक ने निर्माण स्थलों पर सूचना पटल नहीं लगाए जाने तथा मशीनों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच नहीं होने की स्थिति में व्यापक जनआंदोलन की चेतावनी दी।
कोरिया जन सहयोग समिति पहले ही कर चुकी है शिकायत-इस पूरे घटनाक्रम में कोरिया जन सहयोग समिति की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है, समिति ने पहले ही वनमंडलाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपकर तथा मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच की मांग की है, समिति ने अपने ज्ञापन में निर्माण गुणवत्ता, जेसीबी के उपयोग,कथित फर्जी मस्टर रोल, तकनीकी लापरवाही और सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग की जांच कर दोषियों पर विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की मांग उठाई है।
लगातार बढ़ता गया विरोध,अब कई स्तरों पर दबाव-यदि पूरे घटनाक्रम पर क्रमवार नजर डालें तो विरोध लगातार व्यापक होता गया है ग्रामीणों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए, दैनिक घटती-घटना ने क्रमवार खोजी समाचार प्रकाशित किए,तालाबों के पहली बारिश में क्षतिग्रस्त होने के बाद शिकायतों का दौर शुरू हुआ,कोरिया जन सहयोग समिति ने डीएफओ और मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी,पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने पीसीसीएफ से चर्चा कर मामले को सार्वजनिक रूप से उठाया, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने जांच और आंदोलन की चेतावनी दी,नागरिक एकता मंच ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर 25 अगस्त तक कार्रवाई नहीं होने पर वन विभाग कार्यालय घेरने की घोषणा कर दी,इन घटनाओं से स्पष्ट है कि मामला अब केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रहा,बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही,सरकारी धन के उपयोग और योजनाओं की गुणवत्ता से जुड़ा सार्वजनिक मुद्दा बन गया है।
वन विभाग पर बढ़ता जवाबदेही का दबाव…
वन विभाग के समक्ष अब सबसे बड़ी चुनौती केवल आरोपों का जवाब देना नहीं,बल्कि जनता का विश्वास बनाए रखना भी है,लगातार बढ़ रही शिकायतों,जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप और सामाजिक संगठनों की सक्रियता के बीच अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विभाग पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा,या फिर यह मामला भी केवल शिकायतों और आश्वासनों तक सीमित रह जाएगा,यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध विभागीय तथा कानूनी कार्रवाई की संभावना बन सकती है,वहीं यदि आरोप असत्य सिद्ध होते हैं, तो निष्पक्ष जांच से विभाग को भी अपना पक्ष स्पष्ट करने का अवसर मिलेगा।
अब सबसे बड़ा सवाल….
सोनहत वन परिक्षेत्र के निर्माण कार्यों को लेकर अब सवाल केवल तालाबों तक सीमित नहीं हैं, चर्चा फेंसिंग,मशीनों के उपयोग,स्थानीय मजदूरों के रोजगार,मस्टर रोल,तकनीकी गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग तक पहुंच चुकी है, ऐसे में 25 अगस्त से पहले प्रशासन क्या कदम उठाता है, यही आने वाले दिनों में इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।
नागरिक एकता मंच ने खोला मोर्चा,एसडीएम को सौंपा विस्तृत ज्ञापन
मामले में नया मोड़ तब आया जब नागरिक एकता मंच,सोनहत के संयोजक मनोज साहू के नेतृत्व में स्थानीय ग्रामीणों और प्रतिनिधियों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सोनहत को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की,ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि लाखों-करोड़ों रुपये की लागत से कराए गए तालाब, फेंसिंग एवं अन्य निर्माण कार्य पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त होने लगे,जिससे निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं,मंच का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किए गए होते तो पहली ही बारिश में ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती,मंच ने यह भी आरोप लगाया कि 15 जून के बाद सामान्यतः मिट्टी संबंधी कार्यों पर रोक रहने के बावजूद जून और जुलाई में जेसीबी,ट्रैक्टर एवं अन्य भारी मशीनों से कार्य कराया गया,उनका कहना है कि इससे न केवल शासन के दिशा-निर्देशों की अनदेखी होने की आशंका है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों एवं आदिवासी मजदूरों का रोजगार भी प्रभावित हुआ।
तन्जरा बीट के फेंसिंग कार्यों को लेकर भी उठे सवाल…
नागरिक एकता मंच ने केवल तालाब निर्माण तक अपनी शिकायत सीमित नहीं रखी,मंच ने तन्जरा बीट में कराए गए फेंसिंग एवं अन्य निर्माण कार्यों की भी जांच की मांग की है,मंच का आरोप है कि इन कार्यों में भी पारदर्शिता का अभाव रहा और संबंधित बीट गार्ड द्वारा ग्रामीणों के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं,मंच ने इन आरोपों की स्वतंत्र जांच कर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
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