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कविता @ शिव तेरे बिन…कविता

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शिव तेरे बिन…
शिव तेरे बिन जीवन में, जाने कैसा लगता है,
पास तेरे आ जाने पर फिर,सब-कुछ अच्छा लगता है।
शिव तेरे बिन ….
ना मैं कुछ-भी लाया था, ना लेकर जा पाऊंगा,
हां जो जीवन पाया है, उसमें सुर दे जाऊंगा।
शिव तेरे बिन …..
शिव भोले दो-दो अक्षर हैं, भेद नहीं इसमें कुछ-भी है,
हम जिस भक्ति में डूबे हैं, उसके सुबह और शाम वही हैं।
शिव तेरे बिन …..
भूली-बिसरी यादों में, भोले की बातें बिखरी हैं,
चुनकर माला बुनता हूं तो, दिखती बस निखरी-निखरी है।
शिव तेरे बिन …..
भोले सपनों का भार हरो, जीवन का एक आधार धरो,
मेरी श्वांसों की रेखा पर, भक्ति का सुर साकार करो।
शिव तेरे बिन ….


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